PM Modi
PM Modi ने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी कर 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ रेट का ढिंढोरा पीटा है। PM Modi ने इस आंकड़े को देश की मजबूती और लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। वीडियो में PM Modi ने यह भी दावा किया कि वैश्विक युद्ध, आर्थिक संकट और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
लेकिन यह सवाल उठना लाजमी है कि कागजी आंकड़ों का यह जाल क्या सिर्फ जनता की नजरों में धूल झोंकने और वाहवाही बटोरने के लिए बुना गया है?
महंगाई का बोझ और आम आदमी की जेब
ग्रोथ रेट के इन दावों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। देश में दूध, चीनी, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, कमर्शियल सिलेंडर और सीएनजी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। PM Modi के नेतृत्व वाली सरकार एक तरफ मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी को विदेश न घूमने और सोना न खरीदने जैसी सलाह दी जा रही है। सहूलियतें छीनकर बचत का पाठ पढ़ाना किसी मजबूत अर्थव्यवस्था की निशानी नहीं हो सकता।
बेरोजगारी और कर्ज का बढ़ता संकट
देश का युवा आज भी काम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर है। PM Modi के शासनकाल में बेरोजगारी दर 5% के पार पहुंच चुकी है, जिसने युवाओं की कमर तोड़ दी है। इसके साथ ही देश पर कर्ज का बोझ इस कदर बढ़ गया है कि आज भारत के हर नागरिक पर औसतन 2 लाख रुपये से अधिक का कर्ज चढ़ चुका है। ऐसे में चमकते आंकड़े इस कड़वे सच को छिपाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में गिरती साख
कागजी विकास का सच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उजागर हो रहा है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 125 देशों की सूची में 111वें स्थान पर खिसक चुका है। इसके अलावा पासपोर्ट इंडेक्स में 197 देशों में 125वां और प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 157वां स्थान मिला है। PM Modi अपने प्रचार वीडियो में इन गिरते सूचकांकों पर कभी बात करना पसंद नहीं करते।
सपनों का महल और हकीकत का धरातल
अमृतकाल और विश्वगुरु का जो सपना देशवासियों को दिखाया गया था, उसकी हवा बहुत पहले ही निकल चुकी है। जनता अब समझ चुकी है कि दावों और हकीकत में कितना बड़ा अंतर है। PM Modi जिस 7.8% ग्रोथ रेट को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, वह आम जनता के लिए महज एक नया झुनझुना बनकर रह गया है।
अंधभक्तों की वाहवाही और जनता की जागरूकता
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो संदेश सिर्फ अपनी टोली को खुश करने के लिए लाया गया है। भारी-भरकम शब्दों से जनता को अब और अधिक भ्रमित नहीं किया जा सकता। PM Modi को यह समझना होगा कि सिर्फ आंकड़ों के जाल से देश नहीं चलता, बल्कि ज़मीनी स्तर पर राहत देने से स्थिति सुधरती है।
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