The Book, That Exposed PM Modi

The Book, That Exposed PM Modi

Share this news :

Rahul Gandhi Exposed PM Modi: भारत ने कई प्रधानमंत्री देखे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा झूठ किसी ने भी देश को नहीं सही बोला। भारत की सेना के साथ फरेब किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। और न ही किसी प्रधानमंत्री ने युद्ध की स्थिति में पहुंचने के बाद सेना को उसके हाल पर छोड़ा। 1999 की कारगिल युद्ध हो या फिर 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध, भारत के प्रधानमंत्रियों ने सारे फैसले अपने दम पर लिए। सेना को समय-समय पर बताया कि उन्हें क्या करना है, कैसे करना है, रणनीतियां बनाई। उनके साथ खड़ी रही।

PM Modi ने सेना के साथ किया गलत

लेकिन मोदी जी (PM Modi) ने ठीक इसका उलटा किया, वो भी तब जब भारतीय सेना चीन के साथ युद्ध की स्थिति में खड़ी थी। 2014 के बाद जब ये प्रधानमंत्री बने, तो करोड़ों रुपए फूंककर जनता के बीच अपनी एक छवि बनाई। एक साहसी, निर्णायक और खुद हाथ में कमान संभालने वाले नेता के रूप में चित्रित किया गया। लेकिन इनकी हकीकत क्या है, आज राहुल गांधी ने बता दिया।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

दरअसल आज नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सदन में कुछ ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनने के बाद आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। अगर आपने कभी मोदी (PM Modi) को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट दिया होगा, तो आपको अपने फैसले पर शर्म आएगी। राहुल गांधी ने वो खुलासा कर दिया है, जिसे छुपाने के लिए मोदी सरकार ने हजारों तरह के पापड़ बेले थे। न कोई घुसा है, न कोई घुसा हुआ है, वाला डायलॉग याद है न आपको। मोदी जी के इस झूठ बयान की हकीकत राहुल गांधी ने देश के सामने ला दी है।

यही कारण है कि, जब संसद में राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया, तो बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं की कुर्सियों में आग लग गई। बिचारे अपनी कुर्सी पर बैठ नहीं पा रहे थे। उछलने लगे, राहुल गांधी को रोकने के लिए, उन्हें चुप कराने के लिए तमाम कोशिशें करने लगे।

पूर्व आर्मी चीफ ने लिखी एक किताब

दरअसल बात ये है कि डोकलाम विवाद और चीनी घुसपैठ पर पूर्व आर्मी चीफ एम. नरवणे ने एक किताब लिखी थी, पर रक्षा मंत्रालय ने उसको प्रकाशित नहीं होने दिया। और आज लोकसभा में राहुल गांधी ने उसी किताब की 5 लाइन सुनाने की कोशिश की, तो उनका माइक बंद कर दिया गया। बीजेपी के नेता (PM Modi) हंगामा करने लगे। इनके हंगामे की वजह से राहुल गांधी भले नहीं बोल पाए, लेकिन कांग्रेस ने उस किताब के उस हिस्से को जरूर पब्लिक कर दिया है, जिसे राहुल गांधी सदन में सुनाना चाहते थे।

PM Modi के बारे में आखिर क्या है उस किताब में?

हम आपको बताते हैं आखिर किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिससे मोदी सरकार इतना डर रही है। किताब में लिखा है: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी, जो भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख हैं, उन्हें 31 अगस्त 2020 को रात 8.15 बजे एक फोन कॉल आया। कॉल पर उन्हें जो जानकारी मिली, उससे वे चिंतित हो गए। उन्हें पता चला कि इन्फैंट्री के सपोर्ट से चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर एक खड़ी पहाड़ी के रास्ते आगे बढ़ने लगे थे।

सेना ने अधिकारियों को दी जानकारी

जोशी ने इस मूवमेंट की जानकारी आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को दी, जिन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझ लिया। टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे।भारतीय सैनिकों ने एक illuminating round फायर किया, जो एक तरह की चेतावनी थी। इसका कोई असर नहीं हुआ। चीनी आगे बढ़ते रहे। नरवणे ने भारत के राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठान के नेताओं को ताबड़तोड़ फोन करना शुरू कर दिया, जिनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल थे।

‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में नरवणे लिखते हैं, ‘मेरा हर किसी से एक ही सवाल था, ‘मेरे लिए आदेश क्या हैं?’ स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी और स्पष्टता की जरूरत थी। मौजूदा प्रोटोकॉल के मुताबिक नरवणे को साफ आदेश थे कि “जब तक ऊपर से मंजूरी न मिले, तब तक गोली न चलाएं।” ऊपर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आए। मिनट बीतते गए। इस बीच कई बार लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने राजनाथ सिंह को फोन किया, लेकिन कोई निर्देश नहीं मिला। इधर चीनी टैंक आगे बढ़ते जा रहे थे। वे अब टॉप से सिर्फ पांच सौ मीटर दूर थे।

2 घंटे बाद मिला जवाब

नरवणे ने रक्षा मंत्री को एक और फोन किया, जिन्होंने वापस फोन करने का वादा किया। समय बीतता गया। हर मिनट, चीनी टैंक टॉप पर पहुंचने के एक मिनट करीब आ रहे थे। राजनाथ सिंह ने रात 10.30 बजे वापस फोन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी, जिनके निर्देश एक ही वाक्य में थे: “जो उचित समझो, वह करो” यानी ‘जो आपको ठीक लगे, वह करो’।

यह ‘पूरी तरह से एक सैन्य फैसला’ होने वाला था। मोदी (PM Modi) से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था। लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। नरवणे कहते हैं कि मुझे ऐसा लगा जैसे “मुझे एक गर्म आलू पकड़ा दिया गया था और अब पूरी ज़िम्मेदारी मुझ पर थी।” अब आप सोचिए, यहां कितना गलत हुआ हमारी सेना के साथ। उन्हें आखिरी वक्त तक लटकाए रखा गया और फिर ऐन मौके पर कह दिया गया—जो समझ आए, करो। यहां अगर सेना से कोई भी गलती हुई होती, तो आज भारत का बहुत नुकसान हो गया होता।

सेना ने दिखाया साहस

वो तो शुकर है हमारी साहसी सेना का, जिसने उस वक्त चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया। भारतीय सेना ने चीनी टैंकों को रोक दिया, जिससे स्थिति भारत के कंट्रोल में आई और चीन को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। और सबसे शर्मनाक बात पता है क्या है। भारतीय सेना ने यहां इतना शानदार काम किया, लेकिन पीएम मोदी ने उसे अक्नॉलेज करने और अपनी गलती को मानने के बजाय भारत की जनता से झूठ बोल दिया। कह दिया कि “न कोई घुसा है, न कोई घुसा हुआ है”। ये बयान भारत के लिए बेहद शर्मनाक था। हालांकि पीआर के दम पर चलने वाली सरकार (PM Modi) से और कुछ उम्मीद कर भी नहीं सकते।


Also Read-

Epstein files में निकला मोदी का नाम, राहुल गांधी ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी

मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *