Modi Bhakti at Peak
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Modi Bhakti at Peak: आपको पीएम मोदी का वो बयान याद है, जब उन्होंने खुद को ईश्वर का भेजा हुआ दूत बताया था। जब खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बताया था। इसे सुनने के बाद कितनी हैरानी हुई थी। जनता सोच में पड़ गई कि एक आदमी, जिसे हमने वोट देकर ऊंचे पद पर बिठाया, ताकि वो हमारे लिए काम कर सके, हमारी सेवा कर सके। वो अब खुद को भगवान समझ बैठा है। खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बता रहा है। अपने इस बयान के बाद पीएम मोदी बहुत बुरी तरह से ट्रोल हुए थे।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अच्छे से इन्हें याद दिलाया था कि भई आप भगवान नहीं हो, जनता के सेवक हो, तो ज्यादा आसमान में मत उड़ो। कुछ समय बाद इसका असर भी देखने को मिला था। एक दूसरे इंटरव्यू में मोदी जी ने ये माना कि वो भगवान नहीं हैं।इसके बाद जनता को लगा कि शायद अब ये किस्सा खत्म हो गया। मोदी जी अब गलतफहमी में नहीं हैं। उन्हें होश आ चुका है। लेकिन यहीं पर गलती हो गई।
जनता ने कर दी ये गलती
जनता को ये एहसास ही नहीं हुआ कि पीएम मोदी की गलतफहमी कभी दूर हुई ही नहीं थी। वो अभी तक यही मानकर बैठे हैं कि वो ही भगवान (Modi Bhakti) हैं। ईश्वर के दूत हैं। जो वो करते हैं, वो एकदम सही है, उनसे कभी गलती हो ही नहीं सकती। अपनी इस गलतफहमी को हवा देते रहने के लिए उन्होंने अपने आस-पास ऐसे नेताओं की फौज इकट्ठी कर ली है, जो उन्हें भगवान मान चुके हैं। ये नेता अंधभक्ति में अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। हाल फिलहाल में ही इसके दो उदाहरण देखने को मिले हैं।
पहला भक्त- निशिकांत दुबे (Modi Bhakti)
इसमें पहले हैं निशिकांत दुबे। हां वही BJP के गालीबाज सांसद, जिनका मुंह जब भी खुलता है, तो उससे ऐसी घटिया बातें ही निकलती हैं, जिन्हें सुनने के बाद किसी का भी दिमाग खराब हो जाए। इस बार इस गालीबाज सांसद ने मोदी भक्ति (Modi Bhakti) में सीमाएं पार की हैं। निशिकांत दुबे ने “आप की अदालत” शो पर खुलकर कहा कि “नरेंद्र मोदी सवालों से ऊपर हो गए हैं।” इनके कहने का मतलब है कि अब मोदी जी से सवाल नहीं कर सकता कोई।
ये बयान सुनने के बाद लोकतंत्र की बात करने वाले हर आदमी को गुस्सा आया है। मोदी जी के ये मंत्री इतनी सी बात भूल गए हैं कि लोकतंत्र में कोई भी इंसान, चाहे वो प्रधानमंत्री ही क्यों न हो, सवालों से ऊपर नहीं हो सकता। अगर मोदी जी सवालों से ऊपर हैं, तो वो सत्ता में क्यों बैठे हैं? कुर्सी छोड़कर मंदिर में विराजमान हो जाएं। लेकिन नहीं, सत्ता चाहिए, पर जवाबदेही से भागना है। ये कैसे संभव है भला।
दूसरा भक्त- तेजस्वी सूर्या (Modi Bhakti)
मोदी भक्ति (Modi Bhakti) में पागल हुए दूसरे नेता हैं तेजस्वी सूर्या। इनका कहना है कि “एंटी-मोदी होना मतलब एंटी-इंडिया होना”। यानी मोदी जी ही भारत हैं? जो मोदी की आलोचना करे, वो देश का दुश्मन है।मोदी जी ने अपने आस-पास ऐसी ही चाटुकारों की पूरी फौज खड़ी कर ली है। जो उन्हें भगवान बताते हैं। उनकी पूजा करते हैं। निशिकांत दुबे और तेजस्वी सूर्या जैसे लोग इसी फौज का हिस्सा हैं। ये लोग मोदी जी को इसलिए भगवान बना रहे हैं ताकि कोई जवाबदेही न मांगे, कोई सवाल न उठे। लेकिन ये देश के लिए बहुत खतरनाक है।
देश की स्थिति है खराब
देश में बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अस्पतालों से बेड, ऑक्सीजन, जरूरी मशीनें यहां तक कि डॉक्टर भी गायब है। स्कूल बंद हो रहे हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति हर जगह बेहद खराब है। रोज़गार के नाम पर पकौड़ा और चाय योजना चला रही है मोदी सरकार। मोदी जी और उनके मंत्रियों के नाम अमेरिका के सेक्स ऑफेंडर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में दर्ज है। Trump लगातार हम पर दबाव बना रहा है। संसद में काम की बात को छोड़कर, सब चीजों की चर्चा हो रही है।
फिर भी BJP के नेता (Modi Bhakti) चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि “मोदी जी सवालों से ऊपर हैं”। एंटी-मोदी मतलब एंटी-इंडिया है। ये अंधभक्ति का जहर धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है। हमें ये समझने की जरूरत है कि जहां नेता खुद को भगवान मानने लगें, वहां जनता गुलाम बन जाती है। लोकतंत्र में नेता जनता के सेवक होते हैं, भगवान नहीं।
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