Asim Munir
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Asim Munir आज दुनिया के सामने पाकिस्तान की उस गिरती साख का चेहरा बन चुके हैं, जिसकी पहचान अब केवल ‘भीख का कटोरा’ बनकर रह गई है। हाल ही में जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पाकिस्तानी सेना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धज्जियां उड़ा दी हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे खुद को ‘सुल्तान’ समझने वाले Asim Munir को एक साधारण सुरक्षा गार्ड ने संदिग्ध मानकर दरवाजे पर ही रोक दिया।
सिक्योरिटी गार्ड ने दिखाई जगह
जब Asim Munir बड़ी शान के साथ सम्मेलन के भीतर दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, तभी वहां तैनात गार्ड ने उन्हें हाथ के इशारे से ‘ठहरो’ कहा। गार्ड ने किसी आम संदिग्ध की तरह पहले उनकी आईडी चेक की और पूरी तसल्ली होने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ने दिया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो आग की तरह फैल रहा है, जहां लोग कह रहे हैं कि Asim Munir को विदेशी जमीन पर उनकी असली हैसियत का अहसास दो सेकंड में करा दिया गया। वर्दी पहन लेने से कोई जनरल नहीं बन जाता और यह अपमान इसी बात का सबूत है।
आतंकियों के ‘नर्सरी’ के माली
भारत के खिलाफ साजिशें रचने और पहलगाम जैसे कायराना आतंकी हमलों के पीछे Asim Munir का ही हाथ माना जाता है। वह सरहद पार बैठकर पाकिस्तानी आतंकियों के ‘स्वघोषित फील्ड मार्शल’ बने फिरते हैं, लेकिन दुनिया अब उन्हें एक फौज के प्रमुख के तौर पर नहीं बल्कि ‘आतंकियों की नर्सरी’ चलाने वाले के रूप में देखती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर Asim Munir की तलाशी लेना इस बात का संकेत है कि ‘पाकिस्तानी’ शब्द अब वैश्विक सुरक्षा के लिए शक के दायरे में आ चुका है।
कर्ज और कूटनीति का खेल
आलोचकों का कहना है कि Asim Munir की हैसियत केवल अमेरिकी मदद और कर्ज पर टिकी है। जब भी वाशिंगटन से कोई घुड़की मिलती है, तो पाकिस्तानी हुक्मरान दुम हिलाने लगते हैं। जैसे ही वहां से कर्ज रूपी ‘हड्डियां’ मिलती हैं, Asim Munir फिर से भारत की तरफ जहर उगलना शुरू कर देते हैं। अपनी घर की राजनीति में दखल देने और पड़ोसी देशों में आतंक भेजने के अलावा पाकिस्तानी फौज के पास अब कोई काम नहीं बचा है।
भारत की विदेश नीति पर सवाल
हालांकि, इस पूरी घटना के बीच भारत सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने चीन और पाकिस्तान को लेकर अधिक कड़ा रुख अपनाया होता, तो Asim Munir जैसे लोगों की म्यूनिख तक पहुंचने की हिम्मत नहीं होती। विदेशी यात्राओं और दावों के बावजूद अगर सीमा पर हमारे जवान शहीद हो रहे हैं, तो ‘लाल आंख’ दिखाने वाले वादे खोखले नजर आते हैं। Asim Munir का बेखौफ घूमना भारतीय कूटनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सुधरने की आखिरी चेतावनी
म्यूनिख में जो हुआ वह तो महज एक ‘ट्रेलर’ है। अगर पाकिस्तान ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया, तो दुनिया भर के एयरपोर्ट्स और सम्मेलनों में Asim Munir और उनके अधिकारियों को इसी तरह की जिल्लत सहनी पड़ेगी। अब वक्त बदल चुका है और दुनिया आतंकियों के आकाओं को उनके असली नाम Asim Munir से पहचान रही है। यह पाकिस्तान के लिए आत्ममंथन का समय है कि आखिर क्यों उनके सबसे शक्तिशाली व्यक्ति को एक दरबान के सामने अपनी पहचान साबित करनी पड़ रही है।
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