Donald Trump

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Donald Trump के सत्ता में आते ही भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच वह ‘झप्पी’ वाली केमिस्ट्री अब कड़वाहट में बदलती दिख रही है। जिस ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का नारा गूंजा था, आज उसी दोस्ती के दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं। कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर जिस तरह एक विदेशी उम्मीदवार का प्रचार किया गया, उसका परिणाम आज भारत के सामने है।

डिपोर्टेशन के आंकड़े दे रहे गवाही

आंकड़ों पर गौर करें तो 2021 से 2025 के बीच हजारों भारतीयों को अमेरिका से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। 2021 में 805, 2022 में 862 और 2023 में 617 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,368 हो गई। लेकिन Donald Trump के दोबारा प्रशासन संभालते ही 2025 में यह आंकड़ा 3,800 के पार जा चुका है। शर्मनाक बात यह है कि भारतीय नागरिकों को बेड़ियों में जकड़कर अमेरिकी सैन्य विमानों से वापस भेजा गया, जिस पर भारत सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली है।

अर्थव्यवस्था और टैरिफ पर प्रहार

Donald Trump ने न केवल व्यापारिक मोर्चे पर भारत को ‘टैरिफ किंग’ कहा, बल्कि जुलाई 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ तक घोषित कर दिया। हालिया ट्रेड डील, जिसे विपक्ष किसान विरोधी बता रहा है, के बावजूद भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स लगाया गया है। Donald Trump का रुख स्पष्ट है कि उन्हें भारत के हितों की कोई परवाह नहीं है।

अपमानजनक बयान और कूटनीतिक मौन

व्हाइट हाउस से दिए गए अपने हालिया बयान में Donald Trump ने भारतीय प्रधानमंत्री के राजनीतिक करियर को लेकर ऐसी टिप्पणी की जो किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए अपमानजनक हो सकती है। Donald Trump ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह मोदी का करियर बर्बाद नहीं करना चाहते। एक विदेशी राष्ट्रपति द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना भारत के ‘विश्वगुरु’ होने के दावों पर सवाल उठाता है।

क्या आत्मसम्मान का सौदा हो रहा है?

Donald Trump की जीत पर जश्न मनाने वाले और हवन करने वाले समर्थकों के लिए यह हकीकत किसी झटके से कम नहीं है। Donald Trump की नीतियों ने भारतीय युवाओं और व्यापारिक हितों को गहरी चोट पहुंचाई है। आलोचकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को देश के आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए, न कि विदेशी दबाव के आगे झुकना चाहिए। क्या Donald Trump के साथ यह दोस्ती भारत को बर्बादी की ओर ले जा रही है? जनता अब जवाब मांग रही है।


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