AI Impact Summit

AI Impact Summit

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AI Impact Summit का आयोजन दिल्ली में इस उम्मीद के साथ किया गया था कि भारत दुनिया को अपनी असली तकनीकी ताकत दिखाएगा। दुनियाभर के दिग्गज इस AI Impact Summit में जुटे थे, लेकिन जो कुछ हुआ उसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख को नीलाम कर दिया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी और मोदी सरकार के मंत्रियों की जल्दबाजी ने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया है। यह सिर्फ एक रोबोट का मामला नहीं है, बल्कि AI Impact Summit जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भारत की ईमानदारी को दांव पर लगाने का मामला है।

स्वदेशी के नाम पर चीनी माल: गलगोटिया की बड़ी जालसाजी

मामला इतना शर्मनाक है कि किसी भी भारतीय का खून खौल जाए। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इस AI Impact Summit में एक ‘रोबो-डॉग’ शोकेस किया और सीना ठोककर दावा किया कि यह उनके ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की अपनी रिसर्च है। इसे AI Impact Summit में भारत का भविष्य बताया गया, लेकिन जैसे ही इंटरनेट पर मौजूद विशेषज्ञों की नजर इस पर पड़ी, जालसाजी का भांडा फूट गया। यह कोई स्वदेशी आविष्कार नहीं, बल्कि चीन की ‘Unitree’ कंपनी का रेडीमेड रोबोट निकला, जो ऑनलाइन महज ढाई-तीन लाख रुपये में उपलब्ध है।

अश्विनी वैष्णव की भूमिका और ‘फेक’ प्रोपेगेंडा की राजनीति

हैरानी की बात तो यह है कि इस फर्जीवाड़े में मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री अश्विनी वैष्णव भी शामिल हो गए। बिना जांचे-परखे और बिना सच जाने, मंत्री जी ने इस चीनी रोबोट का वीडियो अपने सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। उन्होंने AI Impact Summit की इस प्रदर्शनी को भारतीय इंजीनियरों की महान उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपाना शुरू कर दिया। सवाल उठता है कि क्या अश्विनी वैष्णव का आईटी सेल इतना अक्षम हो गया है कि उसे चीनी और हिंदुस्तानी माल का फर्क भी समझ नहीं आता? क्या AI Impact Summit का उपयोग ‘मेक इन इंडिया’ का फर्जी लेबल चिपका कर जनता को बेवकूफ बनाने के लिए किया जा रहा था?

3 लाख का रोबोट और 350 करोड़ का झूठ: डीडी न्यूज का तमाशा

इस प्रोपेगेंडा की आग में घी डालने का काम सरकारी चैनल डीडी न्यूज ने किया। इस चैनल ने AI Impact Summit की कवरेज में बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए दावा कर दिया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 350 करोड़ रुपये का रोबोट बनाया है। जो चीज बाजार में 3 लाख की है, उसे AI Impact Summit के नाम पर 350 करोड़ का बताना किस तरह की पत्रकारिता है? जब सरकारी संस्थानों में खास विचारधारा के लोग बैठेंगे, तो फेक न्यूज का ऐसा ही नंगा नाच देखने को मिलेगा।

विश्वगुरु का दावा और वैश्विक स्तर पर होती थू-थू

जब पूरी दुनिया में थू-थू होने लगी और चीनी सोशल मीडिया हैंडल भारत का मजाक उड़ाने लगे, तब जाकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पल्ला झाड़ा और डीडी न्यूज ने चोरी-छिपे अपनी पोस्ट डिलीट कर दी। लेकिन तब तक AI Impact Summit के जरिए भारत की प्रतिष्ठा को गहरा घाव लग चुका था। क्या इसी को ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विश्वगुरु’ कहा जाता है, जहाँ सरकारी चैनल खुलेआम झूठ परोसते हैं? गलगोटिया को AI Impact Summit से बाहर कर देने मात्र से काम नहीं चलेगा। उन मंत्रियों और अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी जिन्होंने इस झूठ को प्रमोट किया?

विकास के दावों की पोल और जनता की मांग

आज पूरी दुनिया में भारत का नाम बदनाम हो रहा है कि AI Impact Summit जैसे आयोजनों में चीन का माल दिखाकर उसे स्वदेशी बताया जाता है। यह सीधे तौर पर देश के साथ गद्दारी है। AI Impact Summit के नाम पर हुए इस तमाशे का जवाब अश्विनी वैष्णव और डीडी न्यूज के आकाओं को देना ही होगा। जनता अब समझ चुकी है कि विकास के दावों के पीछे असलियत क्या है।


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