Rahul Gandhi
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Rahul Gandhi के लिए राजनीति महज सत्ता का जरिया नहीं, बल्कि जनता के आंसू पोंछने का एक माध्यम है। कांग्रेस की तरफ से वायनाड की तबाही भूली नहीं गई है, जहाँ कुदरत के कहर ने सब कुछ मिट्टी में मिला दिया था। लेकिन आज वहां उम्मीद की नई किरण जागी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और लोगों के लिए जननायक Rahul Gandhi और वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी आज उन पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने पहुंचे हैं। Rahul Gandhi ने वहां 100 घरों वाले प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया, ताकि बेघर हुए परिवारों को अपनी छत मिल सके।
सरकार की विफलता और राहुल-प्रियंका का मानवीय हस्तक्षेप
हैरानी की बात देखिए कि सरकार की तरफ से अब तक उन 40 दुकानदारों को कोई मदद नहीं मिली थी, जिनका सब कुछ उजड़ गया था। इन व्यापारियों ने अपना दर्द प्रियंका गांधी को बताया और नतीजा सबके सामने है। आज उन 40 दुकानदारों को 5-5 लाख रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जा रही है। यह है असल राजनीति, जो सिर्फ वादे नहीं करती, बल्कि ज़मीन पर उतरकर लोगों के आंसू पोंछती है। तभी तो Rahul Gandhi देश की जनता के दिलों में समाते हैं। आखिर राहुल तो राहुल ही हैं।
प्रियंका गांधी भी अपने भाई के साथ साये की तरह रहती हैं और Rahul Gandhi द्वारा किए गए हर अच्छे काम में वह हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।
वोटर नहीं, जनता को मानते हैं अपना सगा परिवार
इन दोनों भाई-बहनों के लिए जनता सिर्फ एक वोटर नहीं, बल्कि अपना सगा परिवार है। और यह सेवा भाव सिर्फ वायनाड तक सीमित नहीं है। Rahul Gandhi का दिल कितना बड़ा है, इसे समझने के लिए उनके पुराने कामों को देखना होगा। याद कीजिए सुलतानपुर के रामचेत मोची को, Rahul Gandhi उनकी दुकान पर अचानक रुके, उनके साथ बैठकर जूते सिले और उनका दर्द समझा। बात सिर्फ फोटो खिंचवाने तक नहीं रही, बाद में Rahul Gandhi ने उन्हें आधुनिक सिलाई मशीन और आर्थिक मदद भेजी ताकि उनका परिवार सम्मान से जी सके।
सरहद के अनाथों से लेकर कुपोषित बच्चों तक का सहारा
ऐसे ही जम्मू-कश्मीर के पूँछ में जब उन्होंने उन 22 अनाथ बच्चों के बारे में सुना जिन्होंने अपनों को खो दिया था, तो Rahul Gandhi ने बिना देर किए उन सभी बच्चों की ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया। इंसानियत का एक और चेहरा तब दिखा जब वायनाड में हाथी के हमले का शिकार हुए अजीश के परिवार से Rahul Gandhi मिलने पहुंचे। उन्होंने अजीश के छोटे बेटे को गले लगाकर अपना नंबर दिया और कहा कि “मैं तुम्हारे साथ हूँ”। यही वह सादगी है जो उन्हें दूसरों से अलग करती है।
जमीन से जुड़ाव: ट्रक ड्राइवरों और मैकेनिकों के बने साथी
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी हमने देखा कि कैसे वे एक छोटी बच्ची के जूते के फीते बांधने के लिए सड़क पर बैठ गए। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने बड़े नेता हैं, उन्हें बस इस बात की फिक्र रहती है कि उनके सामने खड़ा व्यक्ति तकलीफ में न हो। इतना ही नहीं, सालों पहले जब उत्तर प्रदेश में मुकेश नाम का एक बच्चा भीषण कुपोषण से जूझ रहा था, तब Rahul Gandhi ने उसे खुद एम्स में भर्ती कराया और उसकी जान बचाई। Rahul Gandhi कभी मैकेनिकों के साथ बैठकर गाड़ियां ठीक करते हैं, तो कभी ट्रक ड्राइवरों के साथ सफर कर उनकी समस्याओं को समझते हैं।
देश का सबसे बड़ा जननायक: सेवा ही जिसका धर्म है
वे हर उस शख्स के साथ खड़े होते हैं जिसकी आवाज़ दबाई जा रही है। आज के दौर में Rahul Gandhi से बड़ा जननायक इस देश में कोई दूसरा नहीं है, जो सत्ता में न होकर भी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को सबसे ऊपर रखता है। प्रियंका गांधी का साथ और Rahul Gandhi का यह अटूट सेवा भाव बता रहा है कि वे देश की सेवा को अपना धर्म मानते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि नेता वही है जो जनता के दिलों पर राज करे, न कि उन पर हुकूमत। वाक़ई, जनता की सेवा में समर्पित Rahul Gandhi आज करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बन चुके हैं।
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