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BJP के नेताओं को रीलबाजी और फोटोबाजी का ऐसा शौक चढ़ा है कि उन्हें अब गरीबों की लाचारी भी सिर्फ एक ‘कंटेंट’ नजर आती है। ये हैं बिहार के गोपालगंज की सोनी कुमारी, जो शारीरिक रूप से विकलांग हैं। आप वीडियो में साफ देख सकते हैं कि इनके दुखों को खत्म करने के बजाय, BJP नेताओं ने इनका किस तरह मजाक बनाया है। और यह सिर्फ सोनी कुमारी की बात नहीं है, बल्कि पूरी BJP का चाल-चरित्र ही अब केवल दिखावे और फोटोबाजी तक सिमट कर रह गया है।
कुछ दिनों पहले सोनी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह बिना ट्राई साइकिल के घिसटते हुए कई किलोमीटर दूर स्कूल जाने को मजबूर थी। वह अपने उस शरीर से लाचार थी जो उसे कुदरत ने दिया था, लेकिन मदद के नाम पर उसके साथ जो हुआ, वह किसी क्रूर मजाक से कम नहीं है।
मैथिली ठाकुर की मदद या फोटो खिंचवाने का अवसर?
बिहार के अलीनगर से BJP विधायक और फोक सिंगर मैथिली ठाकुर, जो अभी-अभी विधायक बनी हैं, उन्होंने सोनी को मदद भेजी। पूरे तामझाम के साथ अधिकारियों ने फोटो खिंचवाई और शानदार रील बनाई गई। सोनी को एक ट्राई साइकिल थमा दी गई, लेकिन उस ट्राई साइकिल की क्वालिटी इतनी घटिया थी कि महज एक हफ्ते में ही वह कबाड़ हो गई।
आज सोनी फिर उसी मोड़ पर खड़ी है, जहां से उसने शुरुआत की थी। BJP विधायक जी को तो अपनी रील और सुर्खियां मिल गईं, लेकिन उस मासूम गरीब बच्ची का दुख दोगुना हो गया।
सिंधिया की बांटी ट्राई साइकिल का 500 मीटर में खुला पहिया
सिर्फ मैथिली ठाकुर ही नहीं, BJP में ऊपर से नीचे तक सबको प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही रीलबाजी और फोटोबाजी का शौक चढ़ा हुआ है। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही देख लीजिए। 16 मार्च को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में उन्होंने भी ट्राई साइकिल बांटी। बड़ी-बड़ी फोटो खिंचवाई गईं, लेकिन अफसोस कि उस ट्राई साइकिल का पहिया महज 500 मीटर चलने के बाद ही मुड़ गया। हद तो तब हो गई जब इस घटिया क्वालिटी का ठीकरा भी सरकारी अधिकारियों पर ही फोड़ दिया गया।
सोचिए, इन BJP नेताओं को गरीबों और लाचारों की रूह कांप देने वाली तकलीफ नजर नहीं आती, इन्हें सिर्फ अपना कैमरा और फ्रेम नजर आता है।
उद्घाटन से लेकर निर्माण तक, सिर्फ भ्रष्टाचार का बोलबाला
BJP के शासन में यही तो हो रहा है। ये नेता कभी पानी की टंकी का उद्घाटन करते हैं, तो वह हफ्ते भर में ढह जाती है। किसी ब्रिज का फीता काटते हैं, तो वह पहली बारिश में गिर जाता है। यहां तक कि भगवान और देश के महापुरुषों की प्रतिमाएं तक BJP राज में सुरक्षित नहीं हैं। इसका सीधा कारण यह है कि इन लोगों का ध्यान काम की क्वालिटी पर है ही नहीं। BJP के नेताओं का पूरा फोकस इस बात पर रहता है कि फोटो कैसी आएगी और सोशल मीडिया की रील पर कितने लाइक्स मिलेंगे।
सुल्तानपुर की फोटोबाजी: जब चंगे-भले लोग बन गए विकलांग
BJP के भीतर फोटोबाजी का जुनून इस कदर बढ़ चुका है कि पिछले साल सुल्तानपुर में तो सारी हदें ही पार हो गईं। वहां BJP विधायक ने ट्राई साइकिल पर उन लोगों को बैठाकर फोटो खिंचवाई जो पूरी तरह फिट थे और जिन्हें विकलांगता की कोई समस्या नहीं थी। शायद BJP विधायक का आशीर्वाद ही ऐसा है कि वहां दिव्यांग रातों-रात अपने पैरों पर चलने लगे।
यह शर्मनाक है। यह उन लोगों का अपमान है जिन्हें भगवान ने खुद चुना है और इस धरती पर भेजा है। BJP नेताओं को समझना होगा कि सत्ता सेवा के लिए होती है, न कि गरीबों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए।
जनता देख रही है रीलबाजी का यह घटिया खेल
इसलिए अब यह गंभीर सवाल उठता है कि आखिर कब तक विज्ञापन के नाम पर यह घटिया खेल चलता रहेगा? सत्ता का नशा इतना भी नहीं होना चाहिए कि आम आदमी की सिसकियां सुनाई देना ही बंद हो जाएं। BJP के वे सभी रीलबाज और फोटोबाज नेता याद रखें कि जिस जनता ने आपको कुर्सी पर बैठाया है, वह यह तमाशा देख भी रही है और वक्त आने पर इसका हिसाब भी बराबर करेगी। BJP को यह समझना होगा कि जनता के वोटों से मिली शक्ति का उपयोग विकास के लिए होना चाहिए, न कि खोखले प्रचार के लिए।
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