BJP ruined Nitish Kumar

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BJP ruined Nitish Kumar: आज आखिरकार नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति से सन्यास ले ही लिया। राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने शपथ ले ली। मतलब साफ है कि बिहार का पूरा कंट्रोल अब गुजरात में चला गया। बीजेपी ने नीतीश की पार्टी जेडीयू का काम तमाम कर दिया। कुछ साल बाद हाल ये होगा कि कोई जेडीयू का नाम तक याद नहीं रखेगा। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) भी कोई नेता था, ये लोग भूल जाएंगे।

शुरु से यही करती आई है बीजेपी

सही कहते हैं लोग कि बीजेपी नाम का दीमक जिस पार्टी में लग जाए, उसे खाकर ही दम लेता है। शुरू से यही खेल खेलती आई है। गठबंधन करो, धीरे-धीरे उस पार्टी को खोखला कर दो, फिर निगल लो। न पार्टी बचे, न नाम-निशान। महाराष्ट्र ही देख लीजिए। शिवसेना कितनी ताकतवर थी। बाल ठाकरे की पार्टी, पूरा महाराष्ट्र हिलाती थी। बीजेपी ने एकनाथ शिंदे के साथ गठबंधन किया। पहले तो साथ लड़े, फिर शिंदे को तोड़कर अपनी तरफ कर लिया। आज असली शिवसेना टुकड़ों में बंट गई। शिंदे गुट बीजेपी का गुलाम बन गया। पार्टी का नाम तो बचा, लेकिन रुतबा चला गया।

Nitish Kumar के पहले इन पार्टियों को कर चुकी है बर्बाद

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल का भी वही हाल हुआ। ये पार्टी दशकों तक पंजाब की राजा थी। किसानों की आवाज, गुरुद्वारों की ताकत। बीजेपी के साथ गठबंधन किया। शुरू में अच्छा चला, लेकिन धीरे-धीरे बीजेपी ने अकाली दल को इतना कमजोर कर दिया कि आज वो एक-एक सीट के लिए तरस रही है। नाम तो है, लेकिन वजूद खत्म। हरियाणा भी देखिए। दुष्यंत चौटाला की जेजेपी कितनी तेजी से उभरी थी। युवा नेता, जाट वोट बैंक, अपनी ताकत थी। इन्होंने भी बीजेपी के साथ हाथ मिलाया। कुछ साल बाद क्या हुआ? पार्टी का वजूद ही खत्म। दुष्यंत अब कहीं दिखते भी हैं तो सिर्फ पुरानी यादों में।

आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी की YSRCP के साथ भी यही हुआ। एक समय पूरा राज्य उनके कब्जे में था। फिर बीजेपी ने उनके साथ भी खेल कर दिया। आज जगन की हालत सब जानते हैं। पार्टी कमजोर हो चुकी है, वोट बैंक छिन गया। ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजेडी का भी ऐसे ही बीजेपी ने काम तमाम कर दिया। बीजेडी ने 20-25 साल तक ओडिशा पर राज किया। फिर आई बीजेपी और गठबंधन का जाल बिछाया। चुनाव में साथ लड़े, फिर धीरे-धीरे नवीन की पार्टी को निगल लिया। आज बीजेडी का नाम लेने वाले भी कम हैं।

तमिलनाडु में AIADMK को भी देखिए। जयललिता के बाद कितनी बड़ी पार्टी थी ये। बीजेपी ने गठबंधन किया, तोड़-फोड़ मचाई। और आज AIADMK इतनी कमजोर हो गई है कि सरकार में लौटना भी मुश्किल है। और अब बिहार के साथ भी बीजेपी ने खेल कर दिया। एक समय बिहार में नीतीश “सुशासन बाबू” कहलाते थे। जेडीयू अलग-अलग दलों से बनी, लेकिन नीतीश ने उसे बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया।

Nitish Kumar ने कई सालों में खड़ी की पार्टी

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) लालू के साथ भी लड़े, बीजेपी के साथ भी गठबंधन किया। कई बार तोड़ा-जोड़ा। लेकिन हर बार जब बीजेपी के साथ आए, अपनी पार्टी को कमजोर करते गए। पहले तो नीतीश सीएम थे, जेडीयू उनके कंट्रोल में थी। फिर बीजेपी ने धीरे-धीरे अपने लोग भेजे, अपने एजेंडे चलाए। नीतीश (Nitish Kumar) को सिर्फ नाम का सीएम बनाकर रखा। और अब आखिरी दांव चल दिया है – नीतीश को राज्यसभा भेजकर।

नया सीएम बनाएगी बीजेपी

अब अपना नया सीएम बनाएगी, जो उसकी मर्जी से चलेगा। अब जेडीयू का क्या होगा? वही जो बाकी पार्टियों का हुआ – धीरे-धीरे खोखली, फिर नामोनिशान मिट जाएगा। ये बीजेपी का पुराना फॉर्मूला है। गठबंधन करो, साथी को इस्तेमाल करो, फिर उसे खा जाओ। हिंदुत्व का नारा लगाओ, लेकिन असल खेल वोट और सत्ता का खेलते हैं ये लोग। आज नीतीश (Nitish Kumar) दिल्ली में शपथ ले रहे हैं, कल बिहार में बीजेपी का राज होगा। नीतीश कुमार भी अब इतिहास बन गए। अब दूसरी पार्टियों को इन घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है, वरना ये दीमक धीरे-धीरे उन्हें भी निगल जाएगा।


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