Congress

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Congress के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) केरल में एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले आए तमाम सर्वे और ग्राउंड रिपोर्ट एक ही तरफ इशारा कर रहे हैं कि केरल में इस बार सत्ता परिवर्तन तय है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, Congress गठबंधन 70 से 80 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकता है। वहीं, पिछले 10 सालों से राज कर रहा वामपंथी एलडीएफ (LDF) गठबंधन इस बार पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है और अनुमान है कि वह 60 से 70 सीटों के बीच ही सिमट जाएगा।

राहुल गांधी का ‘जननायक’ अवतार

केरल में Congress की इस संभावित जीत के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर राहुल गांधी की ‘जननायक’ वाली छवि बनकर उभरा है। वायनाड भूस्खलन के समय जिस तरह राहुल गांधी ने पीड़ितों के साथ खड़े होकर उनकी तकलीफों को साझा किया, उसने केरल की जनता के दिल में उनके प्रति अटूट विश्वास पैदा कर दिया है। वायनाड के लोगों के साथ उनका यह भावनात्मक जुड़ाव अब पूरे केरल में Congress के लिए एक जबरदस्त लहर में तब्दील हो चुका है। लोग उन्हें अब केवल एक राष्ट्रीय नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे मसीहा के रूप में देख रहे हैं जो जमीन पर उतरकर उनके दुख-दर्द समझता है।

विजयन सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लिए इस बार राहें बहुत मुश्किल नजर आ रही हैं। लगातार 10 साल तक सत्ता में रहने के कारण सरकार के खिलाफ भारी ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ यानी सत्ता विरोधी लहर साफ देखी जा सकती है। प्रशासन पर मजबूत पकड़ होने के बावजूद जनता के बीच बदलाव की छटपटाहट साफ दिखाई दे रही है, जिसका सीधा और पूरा लाभ Congress को मिलता दिख रहा है। जनता में यह संदेश घर कर गया है कि अब केरल को नई ऊर्जा और नई सोच की जरूरत है, जो केवल Congress ही दे सकती है।

बीजेपी का शून्य पर सिमटना तय

भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी की बात करें तो इस बार भी केरल की धरती पर ‘कमल’ खिलना नामुमकिन सा लग रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों में मामूली बढ़त के बावजूद, विधानसभा के बड़े दंगल में बीजेपी कहीं भी टिकती नजर नहीं आ रही है। हालांकि पार्टी करीब 20 से 25 सीटों पर संघर्ष का दावा कर रही है, लेकिन असल में यह मुकाबला भी Congress के पक्ष में माहौल बना रहा है। केरल की जागरूक जनता ने एक बार फिर यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वहां नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है और बीजेपी का खाता खुलना इस बार भी लगभग असंभव है।

इतिहास दोहराने की दहलीज पर

Congress केरल का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां की जनता नियमित अंतराल पर बदलाव को पसंद करती है। Congress के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वह 10 साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता के करीब पहुंची है। इससे पहले साल 2011 में Congress के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने केरल में सरकार बनाई थी और ओमन चांडी मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि 2016 और 2021 में वामपंथियों ने जीत दर्ज कर दशकों पुराने ट्रेंड को तोड़ा था, लेकिन अब 2026 में परिस्थितियां फिर से Congress के अनुकूल हो चुकी हैं।

10 साल का वनवास होगा खत्म

साल 1977, 1982, 1991 और 2001 में भी Congress ने केरल में अपनी धाक जमाई थी और अब राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी उसी गौरवशाली इतिहास को दोहराने की ओर बढ़ रही है। वर्तमान में केरल विधानसभा में एलडीएफ के पास 94 सीटें हैं, जबकि Congress गठबंधन के पास केवल 40 सीटें मौजूद हैं। लेकिन 9 अप्रैल की वोटिंग इन आंकड़ों को पूरी तरह बदलने वाली है। ग्राउंड रिपोर्ट बता रही है कि केरल में 10 साल का वनवास खत्म होने को है और Congress एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत करने जा रही है।


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