Himanta Biswa Sarma

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Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व वाली असम सरकार और विपक्ष के बीच चल रहा सियासी संग्राम अब व्यक्तिगत हमलों और पत्रकारों के साथ तीखी नोकझोंक तक पहुंच गया है। Himanta Biswa Sarma इस समय अपनी भाषा और व्यवहार को लेकर चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।

लल्लनटॉप के रिपोर्टर के साथ तीखी बहस

ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब ‘लल्लनटॉप’ के एक रिपोर्टर ने Himanta Biswa Sarma से उनकी ‘असंसदीय’ भाषा को लेकर सवाल किया। पत्रकार ने पूछा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा के खिलाफ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया? इस पर हिमंत बिस्वा सरमा बुरी तरह भड़क गए और कहा कि उनकी भाषा मीडिया संस्थानों से बेहतर है। जब पत्रकार ने कड़ा रुख अपनाया, तो Himanta Biswa Sarma ने उनसे अपॉइंटमेंट और सवाल पूछने के अधिकार पर ही बहस शुरू कर दी।

विवाद की असल वजह

यह पूरा मामला तब गरमाया जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा नेहिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा का दावा था कि उनकी पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट और दुबई में अघोषित संपत्ति है। इन आरोपों पर जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने जांच की बात कही, तो Himanta Biswa Sarma ने खड़गे को ‘पागल’ तक कह दिया। हिमंत बिस्वा सरमा की इस टिप्पणी ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

विपक्ष का पलटवार

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने Himanta Biswa Sarma के इस बयान को दलित समाज का अपमान बताया है। कांग्रेस का कहना है कि हिमंत बिस्वा सरमा की यह भाषा बीजेपी की ‘दलित विरोधी’ सोच को उजागर करती है। वहीं, गौरव गोगोई जैसे नेताओं का मानना है कि चुनाव में हार के डर से Himanta Biswa Sarma बौखला गए हैं।

सत्ता का रसूख और पुलिसिया कार्रवाई

पवन खेड़ा के आरोपों के बाद Himanta Biswa Sarma ने असम पुलिस को दिल्ली भेज दिया, जिसे विपक्ष सत्ता का दुरुपयोग बता रहा है। केसी वेणुगोपाल का कहना है कि हिमंत बिस्वा सरमा भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए जुबानी गंदगी फैला रहे हैं। आने वाले असम विधानसभा चुनाव के नतीजों से तय होगा कि हिमंत बिस्वा सरमा की यह आक्रामक शैली जनता को कितनी पसंद आती है, लेकिन फिलहाल हिमंत बिस्वा सरमा अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों के केंद्र में बने हुए हैं।

संस्कार की बातें और हकीकत का आईना

देखा जाए तो बीजेपी हमेशा खुद को एक संस्कारी और अनुशासित पार्टी होने का दावा करती है, लेकिन Himanta Biswa Sarma जैसे शीर्ष नेताओं का व्यवहार इस दावे पर बड़े सवाल खड़े करता है। जब सवाल तीखे हों या हार का डर सामने दिखने लगे, तो अक्सर बीजेपी नेताओं के संस्कारों की पोल खुल जाती है और वे सीधे गाली-गलौज या असभ्य भाषा पर उतर आते हैं।

मर्यादा की बातें सिर्फ मंच तक सीमित रह गई हैं, क्योंकि हकीकत में सत्ता के नशे में चूर ये नेता अब पत्रकार से लेकर विपक्षी बुजुर्ग नेताओं तक का सम्मान करना भूल गए हैं। Himanta Biswa Sarma की यह बौखलाहट साफ बता रही है कि उनके पास सवालों के जवाब नहीं हैं, इसलिए वे अपनी जुबान को ही हथियार बना रहे हैं। असम में हार दिखने के अलावा अब ये भी दिख रहा है कि बीजेपी की भाषा पर ना तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई कंट्रोल है, और नाही अमित शाह का।


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