Modi Government

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Modi Government के कामकाज और हालिया फैसलों पर जब भी सवाल उठते हैं, तो अक्सर एक नया विवाद सामने आ जाता है। 4 फरवरी की सुबह संसद परिसर के मकर द्वार पर जो कुछ भी हुआ, वह इसी ‘मुद्दा भटकाओ’ फैक्ट्री का सबसे ताजा नमूना जान पड़ता है। एक तरफ जब Modi Government अमेरिका के साथ हुई विवादास्पद ट्रेड डील पर घिरने लगी और जनरल नरवणे की किताब में लिखे कड़वे सच सामने आने लगे, तो अचानक एक नया राग अलापना शुरू कर दिया गया। यह राग था ‘सिखों के अपमान’ का, जिसे लेकर पूरी भाजपा ने आसमान सिर पर उठा लिया है।

मकर द्वार की घटना और बीजेपी का ‘रोना-धोना’

असल में, मकर द्वार पर राहुल गांधी और उनके कुछ निलंबित साथी सांसद धरना दे रहे थे। उसी समय वहां से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू गुजरे। उन्हें देखते ही राहुल गांधी ने मजाक या तंज के लहजे में कहा, “मेरा गद्दार दोस्त इधर आ रहा है।” बस इतना कहना था कि Modi Government के मंत्रियों और प्रवक्ताओं ने इसे पूरे सिख समाज का अपमान घोषित कर दिया। हरदीप पुरी से लेकर अमित मालवीय तक, सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे करने लगे जैसे राहुल गांधी ने किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को निशाना बनाया हो।

गद्दारी का असली संदर्भ: सियासी दलबदली या समाज का अपमान?

हकीकत यह है कि राहुल गांधी ने बिट्टू को किस संदर्भ में ‘गद्दार’ कहा, उसे समझना जरूरी है। रवनीत सिंह बिट्टू करीब 15-16 साल तक कांग्रेस में रहे, सांसद बने और पार्टी के तमाम बड़े पदों का लाभ लिया। लेकिन 2024 के चुनाव से ठीक पहले वह अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर Modi Government की गोद में जा बैठे। राहुल गांधी ने इसी सियासी दलबदली को लेकर उन्हें ‘गद्दार’ कहा था। यह दो पुराने दोस्तों के बीच की एक राजनीतिक टिप्पणी थी, लेकिन Modi Government ने इसे बड़ी चतुराई से सिखों के सम्मान से जोड़ दिया।

बीजेपी का दोहरा चरित्र: किसान आंदोलन से ‘मौनमोहन’ तक

यह वही Modi Government है, जिसके राज में किसान आंदोलन के समय सड़कों पर बैठे सिखों को ‘खालिस्तानी’ और ‘आंदोलनजीवी’ कहा गया था। तब इन नेताओं का सिख प्रेम कहाँ चला गया था? आज जब खुद की जवाबदेही तय होने की बारी आई, तो इन्हें अचानक सिखों की पगड़ी की याद आ गई। जिस कांग्रेस पर ये आरोप लगा रहे हैं, उसने देश को डॉ. मनमोहन सिंह जैसा प्रधानमंत्री दिया, जिन्हें यही भाजपा नेता 10 साल तक ‘मौनमोहन’ कहकर अपमानित करते रहे।

असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश

Modi Government के पास आज बुनियादी सवालों का कोई जवाब नहीं है। न तो वे जनरल नरवणे की किताब पर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहते हैं और न ही उस ‘काली ट्रेड डील’ पर कोई सफाई देना चाहते हैं, जिसमें भारत का बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है। जनता का ध्यान भटकाने के लिए Modi Government ने यह पुराना और घिसा-पिटा फॉर्मूला अपनाया है।

सत्ता बचाने के लिए समाज को ढाल बनाना बंद हो

सच्चाई तो यह है कि Modi Government को सिखों के सम्मान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें केवल अपनी सत्ता और अपनी गुप्त डील्स को बचाना है। किसी एक नेता की निजी दलबदली को पूरे समाज का अपमान बताना न केवल गलत है, बल्कि यह Modi Government की उस गंदी राजनीति का हिस्सा है जो समाज में दरार पैदा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहती है। Modi Government को समझना होगा कि जनता अब उनके इन ‘डाइवर्जन’ हथकंडों को अच्छी तरह समझने लगी है।


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