Narendra Modi
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Narendra Modi के नाम पर बने अहमदाबाद के विशाल स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की 76 रनों की करारी हार ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आज एक ही शब्द गूंज रहा है— ‘पनौती’। यह शब्द किसी आम इंसान के लिए नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार है, जिसने सुपर-8 के अहम पड़ाव पर भारत की लगातार 12 जीत के विजयी रथ को भी रोक दिया है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक खेल की हार है या इसके पीछे कोई गहरा पैटर्न छिपा है?
पुराने जख्म और 2023 वर्ल्ड कप का वो काला दिन
साल 2023 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल की यादें आज भी ताजा हैं। उस वक्त टीम इंडिया लगातार 10 मैच जीतकर अपराजेय लग रही थी, लेकिन फाइनल मैच उसी Narendra Modi स्टेडियम में आयोजित हुआ। करोड़ों भारतीय जीत की दुआ कर रहे थे, लेकिन वहां प्रधानमंत्री खुद मौजूद थे और नतीजा उम्मीदों के उलट रहा।
भारत ऑस्ट्रेलिया से फाइनल हार गया और तभी से यह धारणा प्रबल होने लगी कि जहां Narendra Modi के कदम पड़ते हैं या जहां उनका नाम जुड़ता है, वहां भारत का नसीब रूठ जाता है। 2026 के इस टी-20 वर्ल्ड कप में वही कहानी फिर दोहराई गई है—वही स्टेडियम, वही नाम और वही हार का मंजर।
इसरो से लेकर क्रिकेट तक: मौजूदगी और नाकामी का संयोग
यह मामला सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। इतिहास के पन्ने पलटने पर Narendra Modi की मौजूदगी और मिशन की विफलता के बीच अजीब संयोग दिखते हैं। साल 2019 में जब चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर लैंड करने वाला था, तब Narendra Modi इसरो के ऑफिस में मौजूद थे और वह मिशन फेल हो गया।
इसके विपरीत, जब चंद्रयान-3 की बारी आई और प्रधानमंत्री वहां मौजूद नहीं थे, तो मिशन पूरी तरह सफल रहा। लोग इसे ‘अल्ट्रा लेवल की पनौती’ कह रहे हैं क्योंकि आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि उनकी गैरमौजूदगी भारत के लिए खुशियां लेकर आती है।
आंकड़ों की गवाही: जब PM दूर रहे, तब भारत जीता
हालिया वर्षों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में Narendra Modi नहीं पहुंचे और भारत जीत गया। 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भी प्रधानमंत्री गायब थे और भारत ने फिर जीत दर्ज की। चाहे महिला विश्व कप हो या एशिया कप का फाइनल, जहां Narendra Modi की परछाईं नहीं पड़ी, वहां भारतीय टीम ने तिरंगा लहराया। वैज्ञानिकों से लेकर खिलाड़ियों तक, हर क्षेत्र में एक ही ट्रेंड दिख रहा है कि जहां प्रधानमंत्री का दखल कम है, वहां भारत का परचम बुलंद है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिरती साख और ‘पब्लिसिटी’ की भूख
सिर्फ खेल के मैदान में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी Narendra Modi की नीतियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जो प्रधानमंत्री कभी विदेशी नेताओं के साथ ‘झप्पियों’ के लिए मशहूर थे, आज उनके कार्यकाल में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल उठ रहे हैं। कभी ट्रंप के बयानों से किरकिरी होती है, तो कभी अन्य अंतरराष्ट्रीय फाइलों में नाम आने की चर्चा से देश का सिर झुक जाता है।
आलोचकों का मानना है कि Narendra Modi की ‘पब्लिसिटी’ की भूख देश के आत्मसम्मान और नसीब पर भारी पड़ रही है। आज एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर किसानों के हक तक, सब कुछ दांव पर लगा दिया गया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक भारत का मान-सम्मान और खेल का मैदान इस साये में रहेगा? यह सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि भारत के उत्थान और गौरव का सवाल है।
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