Rahul Gandhi

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Rahul Gandhi की सुरक्षा को लेकर एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने पूरे देश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर के रक्षक और देश के प्रधानमंत्री की तस्वीरों के सामने खड़े होकर एक शख्स सरेआम कांग्रेस नेताओं के कत्लेआम की धमकी दे रहा है। खुद को करणी सेना का सदस्य बताने वाला यह व्यक्ति Rahul Gandhi और 25 कांग्रेस सांसदों को सरेआम गोली मारने की बात कह रहा है। इस घटना ने ‘न्यू इंडिया’ की कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर फैल रही नफरत की पोल खोल दी है।

तस्वीर के सामने नफरत का नंगा नाच

हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त यह शख्स धमकी दे रहा है, उसके ठीक पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की तस्वीरें टंगी हुई हैं। यह उसकी सियासी पसंद को साफ तौर पर उजागर कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी और गंभीर धमकी के बावजूद न तो प्रधानमंत्री कार्यालय और न ही स्पीकर साहब की ओर से कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है। Rahul Gandhi जैसे कद के नेता के खिलाफ ऐसी हिंसक भाषा के इस्तेमाल पर सत्ता पक्ष की चुप्पी हैरान करने वाली है।

मीडिया की खामोशी और सिस्टम का दोहरा रवैया

बात-बात पर राष्ट्रवाद का प्रमाण पत्र बांटने वाले ‘गोदी मीडिया’ के संस्थानों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है। न कोई डिबेट हो रही है और न ही कोई सवाल पूछा जा रहा है। विपक्ष के नेता Rahul Gandhi की सुरक्षा पर यह खामोशी क्या किसी बड़ी साजिश का इशारा है? अभी तक इस मामले में न तो कोई FIR दर्ज हुई है और न ही उस शख्स की गिरफ्तारी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह व्यक्ति खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है, जबकि देश के गृह मंत्री की जिम्मेदारी घर के भीतर लग रही इस आग को शांत करने की है।

धमकियों का डरावना इतिहास

यह कोई पहली बार नहीं है जब Rahul Gandhi को जान से मारने की साजिशों या धमकियों का सिलसिला शुरू हुआ हो। अभी कुछ महीने पहले ही, 26 सितंबर 2025 को केरल के भाजपा नेता और प्रवक्ता पिंटू महादेवन ने एक टीवी डिबेट में सरेआम जहर उगला था। उन्होंने दावा किया था कि Rahul Gandhi के सीने पर गोली मार दी जाएगी। एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की ऐसी भाषा समाज को किस दिशा में ले जा रही है, यह समझना मुश्किल नहीं है।

जून 2024 से सितंबर 2025 तक का घटनाक्रम

जून 2024 में भी एक मामला सामने आया था जब सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने ऐलान किया था कि अगर Rahul Gandhi ओडिशा दौरे पर आए, तो वह ‘नाथूराम गोडसे’ बन जाएगा। गोडसे की उस हिंसक सोच को आज खुलेआम बढ़ावा दिया जा रहा है। Rahul Gandhi ने खुद भी पुणे की एक अदालत में सुरक्षा की गुहार लगाई थी और कहा था कि राजनीतिक द्वेष के चलते उनके खिलाफ हिंसा भड़काई जा रही है और उनकी जान को खतरा है।

जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों का अमर्यादित आचरण

जब सत्ता में बैठे बड़े चेहरे ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो समाज के अराजक तत्वों को बल मिलता है। सितंबर 2024 में भाजपा नेता तरविंदर सिंह मारवाह ने Rahul Gandhi को सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि “संभल जाओ, वरना तुम्हारा भी वही हाल होगा जो तुम्हारी दादी का हुआ था।” यह सीधे तौर पर एक शहादत का अपमान और खुली धमकी थी। इसी तरह, 15 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने Rahul Gandhi को “देश का नंबर 1 आतंकवादी” करार दिया था।

लोकतंत्र की गरिमा पर गहरा संकट

आज सवाल सिर्फ Rahul Gandhi की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि उस लोकतंत्र का है जहां विपक्ष के नेता को Z+ सुरक्षा मिलने के बावजूद सरेआम गोली मारने की बात कही जा सकती है। जब प्रधानमंत्री विदेशी मंचों पर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, तो क्या उन्हें अपने ही देश में फैल रही यह नफरत नहीं दिखती? Rahul Gandhi के खिलाफ इस तरह की धमकियां देना और उन पर कोई ठोस कार्रवाई न होना, देश की कानून व्यवस्था के तबाह होने का संकेत है।

मौन ही सबसे बड़ी साजिश?

इतिहास गवाह है कि सत्ता का मौन अक्सर बड़ी साजिशों का हिस्सा होता है। अगर Rahul Gandhi को मिल रही इन धमकियों को समय रहते नहीं रोका गया और इन दीमकों को साफ नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह नफरत की आग किसी बड़े हादसे में बदल सकती है। आज Rahul Gandhi निशाने पर हैं, कल कोई और होगा। गृह मंत्री और प्रशासन को चाहिए कि वे चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर देश के संविधान और नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।


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