Smriti Irani

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Smriti Irani का वह दौर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है जब 2012-13 के दौरान सिलेंडर की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी पर भी वे सड़कों पर उतर आती थीं। Smriti Irani उस समय गैस सिलेंडर सिर पर उठाकर मनमोहन सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करती थीं। Smriti Irani के उस ‘सिलेंडर अवतार’ की तस्वीरें आज सोशल मीडिया पर फिर से तैरने लगी हैं क्योंकि वर्तमान में देश की महिलाएं खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर खड़ी होने को मजबूर हैं।

बदलते हालात और Smriti Irani की खामोशी

आज जब गैस एजेंसियों के बाहर किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हैं और लोग भूख-प्यास से तड़प रहे हैं, तब Smriti Irani कहीं नजर नहीं आ रही हैं। Smriti Irani जो कभी एक-एक रुपये की बढ़ोतरी पर चूल्हा न जलने का दोषी सरकार को ठहराती थीं, आज देश के ग्रामीण इलाकों में सिलेंडर के लिए लगे 45 दिन के लॉक-इन पीरियड पर चुप हैं। Smriti Irani के पुराने तेवर आज की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं जहाँ एक सिलेंडर लेने के बाद अगले डेढ़ महीने तक दूसरे की उम्मीद छोड़नी पड़ रही है।

ईरान-इजराइल जंग और रसोइयों पर ताला

वर्तमान संकट के पीछे ईरान और इजराइल की जंग का बहाना बनाया जा रहा है, जिससे आम आदमी की रसोई पर ताला लग गया है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी संसद में कह रहे हैं कि गैस की कमी नहीं है, लेकिन हकीकत यह है कि 4000 रुपये देने पर भी कालाबाजारी के कारण सिलेंडर नसीब नहीं हो रहा है। Smriti Irani के उस दौर में सिलेंडर मात्र 400 रुपये का था, जबकि आज स्थितियां चमत्कार की उम्मीद करने जैसी हो गई हैं।

मोदी जी की वो ‘सिलेंडर को नमस्कार’ वाली बात

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के आसपास कहा था कि वोट देने जाने से पहले घर में रखे सिलेंडर को नमस्कार करके जाना। आज वह बात अक्षरशः सच साबित हो रही है क्योंकि लोग सुबह उठकर सिलेंडर को प्रणाम कर रहे हैं कि आज कम से कम रिफिल मिल जाए। Smriti Irani ने उस समय इस अपील का भरपूर समर्थन किया था, लेकिन आज की किल्लत और लोगों के बहते आंसू कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

संसद में हंगामा और ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल

13 मार्च को संसद में विपक्ष ने इस किल्लत को लेकर भारी हंगामा किया और प्लेकार्ड दिखाए। सवाल यह उठाया गया कि जब रूस से सस्ता तेल मिल रहा था, तब भंडार क्यों नहीं भरा गया? Smriti Irani की पार्टी की सरकार पर यह भी आरोप है कि निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये शेयर बाजार में डूब गए और ऊर्जा सुरक्षा अब विदेशी लाइसेंसों के भरोसे है। Smriti Irani को शायद याद होगा कि तब 400 रुपये की कीमत पर भी वे जनता के दर्द की बात करती थीं।

क्या जनता भूल पाएगी पुराना दौर?

आज लोग गैस के लिए लाइनों में खड़े होकर बेहोश हो रहे हैं और एक हफ्ते में तीन बार नियम बदले जा चुके हैं। Smriti Irani के मौन रहने के बीच जनता अब 400 रुपये वाले पुराने दौर को याद कर रही है। Smriti Irani जिस जनता की आवाज बनती थीं, वही जनता अब अगले चुनाव में सिलेंडर को नमस्कार करते समय अपने ठंडे पड़े चूल्हों और सरकार के खोखले वादों को जरूर याद रखेगी। Smriti Irani के उस समय के संघर्ष और आज की बेबसी के बीच का अंतर अब साफ दिखाई दे रहा है।


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