Aparna Yadav
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Aparna Yadav, ये नाम यूपी की राजनीति में आजकल काफी चर्चे में है. वो क्या है ना कि इस फिल्ड में कोई किसी का सगा नहीं होता. लेकिन, सत्ता का नशा किसी को इस कदर अंधा कर देगा कि वो अपने ही घर में आग लगा दे, ये किसी ने नहीं सोचा था. बात हो रही है मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू Aparna Yadav की. जो 2022 से पहले तक सपाई होने पर गर्व कर रहे थे, आज उसी परिवार के वारिस ने उन्हें ‘बुरी आत्मा’ करार दे दिया है. 19 जनवरी 2026 की तारीख ने वो सच बाहर ला दिया है, जिसे चार साल से दबाया जा रहा था.
शादी के बाद से ही Aparna Yadav थीं सत्ता की भूखी
मुलायम यादव के बेटे प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की कहानी शुरू हुई थी साल 2011 में. जब अपर्णा बिष्ट ने मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव से शादी की. ये लव मैरिज थी. प्रतीक जो हमेशा जिम और अपने बिजनेस में खुश रहने वाले एक सीधे-सादे इंसान माने जाते थे. लेकिन Aparna Yadav के मन में कुछ और ही पक रहा था. उन्हें प्रतीक की सादगी नहीं, बल्कि यादव सरनेम से मिलने वाली पावर चाहिए थी, यानी कि प्रतीक की पत्नी होना अपर्णा के लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी, क्योंकि सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने की भूख उन्हें शुरू से ही थी.
जब पहली बार मैदान में उतरीं अपर्णा यादव
Aparna Yadav ने अपना पहला दांव साल 2017 में खेला… समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ा. लगा था कि मुलायम की बहू का टैग उन्हें विधानसभा पहुँचा देगा. लेकिन जनता ने उनकी महत्वाकांक्षा को पहचान लिया और उन्हें हार का स्वाद चखाया… बीजेपी की रीता बहुगुणा जोशी ने उन्हें पटखनी दी. ये पहली बार था जब अपर्णा को लगा कि सपा में रहकर वो ‘रानी’ नहीं बन पाएंगी. क्योंकि वहां अखिलेश यादव का कद उनके आड़े आ रहा था.
जब कर दी यादव परिवार से गद्दारी
फिर आती है गद्दारी की तारीख वाला साल. जी हां, सत्ता का लालच जब सर चढ़कर बोलने लगा, तो Aparna Yadav ने उस परिवार और पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा जिसने उन्हें पहचान दी. मुलायम यादव का परिवार और सपा. 19 जनवरी 2022. ये वो तारीख थी जब यूपी चुनाव सिर पर थे और अखिलेश यादव को अपनों की सबसे ज्यादा जरूरत थी. ठीक उसी वक्त अपर्णा ‘राष्ट्रवाद’ का बहाना बनाकर बीजेपी में शामिल हो गईं. बीजेपी ने उन्हें चेहरा तो बनाया, लेकिन टिकट नहीं दिया. अंत में एक ‘महिला आयोग’ की कुर्सी देकर उन्हें चुप करा दिया गया.
Aparna Yadav को उनके पति ने क्या-क्या कहा?
Aparna Yadav की सत्ता की ये भूख घर के अंदर क्या गुल खिला रही थी, ये पता चला.19 जनवरी 2026 को ठीक 4 साल बाद और वही तारीख. प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर वो पोस्ट किया जिसने अपर्णा के आदर्श बहू वाले मुखौटे को उतार फेंका. प्रतीक ने लिखा कि उन्हें इस शादी पर अफसोस है… उन्होंने अपनी पत्नी को स्वार्थी और Bad Soul कहा.
प्रतीक का आरोप साफ है, अपर्णा को सिर्फ पब्लिसिटी चाहिए, उन्हें सिर्फ अपनी पावर बढ़ानी है. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका पति किस मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा है…और आज हकीकत सबके सामने है. Aparna Yadav ने जिस ‘सत्ता’ के लिए अखिलेश का साथ छोड़ा, जिस ‘कुर्सी’ के लिए बीजेपी की दहलीज पर मात्था टेका. उसी सत्ता ने आज उनके अपने घर की नींव हिला दी.
प्रतीक यादव का बयान सिर्फ एक पति का गुस्सा नहीं है, बल्कि उस इंसान की चीख है जिसने अपनी पत्नी को राजनीति की वेदी पर रिश्तों का कत्ल करते देखा है. अपर्णा यादव आज दूसरों के घर के झगड़े सुलझाने का पद संभालती हैं. लेकिन खुद उनका पति कह रहा है कि उन्होंने रिश्तों को बर्बाद कर दिया. अब आप खुद सोचिए. जो महिला अपने उस पति की नहीं हो सकी जिसने उसे अपनी जिंदगी दी. वो जनता की क्या खाक होगी.
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