Sonam Wangchuk
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Sonam Wangchuk आज एक ऐसे व्यक्तित्व बन चुके हैं जिनसे सत्ता के गलियारे थर-थर कांप रहे हैं। लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर देश को ‘विश्वगुरु’ बनाने का दम भरने वाली मोदी सरकार आज उस वैज्ञानिक से खौफजदा है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी लद्दाख की सूखी और बंजर मिट्टी में पानी पैदा करने और पहाड़ों की ऊंचाइयों पर शिक्षा की अलख जगाने में लगा दी।
Sonam Wangchuk को जोधपुर सेंट्रल जेल की काल कोठरी में डालकर सरकार को शायद लगा था कि उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबा दिया जाएगा, लेकिन वे भूल गए कि लोहे की सलाखें फौलादी इरादों को कैद नहीं कर सकतीं। जिस इंसान ने शून्य से नीचे के तापमान में बिना बुनियादी सुविधाओं के रहना सीखा हो, उसके लिए जेल की ये दीवारें सिर्फ मिट्टी के ढेर से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
जेल को ही बना दिया पाठशाला
जेल की चारदीवारी के भीतर Sonam Wangchuk ने अपनी हार स्वीकार करने के बजाय वहां भी सुधार का एक नया मोर्चा खोल दिया है। वे जेल की उस बैरक में हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठे हैं, बल्कि वहां मौजूद जेल कर्मियों और सुरक्षाबलों के लिए एक गुरु की भूमिका निभा रहे हैं। Sonam Wangchuk वहां तैनात सिपाहियों को ‘पेरेंटिंग’ यानी बच्चों की सही परवरिश के गुर सिखा रहे हैं। वे उन्हें समझा रहे हैं कि बच्चों की कमियों पर चिल्लाने के बजाय उनकी छिपी हुई प्रतिभा को कैसे पहचाना और निखारा जाए।
एक वैज्ञानिक का दिमाग वहां भी शांत नहीं है; उन्होंने जेल प्रशासन से थर्मामीटर और कुछ वैज्ञानिक उपकरण मांगे हैं ताकि वे जेल की बैरकों के तापमान को नियंत्रित करने का कोई समाधान निकाल सकें। Sonam Wangchuk का लक्ष्य है कि बिना किसी भारी खर्च के बैरकों को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखा जा सके ताकि कैदियों को मानवीय परिस्थितियों में रहने का मौका मिले।
चींटियों पर शोध और नई किताब की तैयारी
इतना ही नहीं, Sonam Wangchuk ने एकांतवास को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बना लिया है। वे वहां चींटियों के सामाजिक व्यवहार पर शोध कर रहे हैं और ‘Forever Positive’ नाम की एक किताब लिख रहे हैं। यह सत्ता के अहंकार पर सबसे बड़ा तमाचा है, जो यह संदेश देता है कि ज्ञान और रचनात्मकता को किसी भी काल कोठरी में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। Sonam Wangchuk की यह सक्रियता दिखाती है कि मोदी सरकार उन्हें शारीरिक रूप से तो बंद कर सकती है, लेकिन उनके विचारों के प्रसार को रोकने में पूरी तरह विफल रही है।
देश के लिए Sonam Wangchuk का अतुलनीय योगदान
भारत को गर्व होना चाहिए था कि उसके पास Sonam Wangchuk जैसा सपूत है, जिसने ‘आइस स्तूपा’ जैसी क्रांतिकारी तकनीक दी, जिससे लद्दाख के प्यासे रेगिस्तान में खेती करना मुमकिन हो पाया। उन्होंने दुनिया को मिट्टी के ऐसे घर बनाने सिखाए जो बिना हीटर के भी अंदर से गर्म रहते हैं। Sonam Wangchuk ने ‘सेकमोल’ (SECMOL) जैसा संस्थान बनाया, जहां उन बच्चों को हुनरमंद बनाया जाता है जिन्हें पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था ‘फेल’ घोषित कर देती है।
जिस स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत का ढिंढोरा मोदी सरकार दुनिया भर में पीटती है, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा Sonam Wangchuk जैसे वैज्ञानिकों ने रखी है। दुख की बात यह है कि जो व्यक्ति चीन के सामान का बहिष्कार करने की अपील कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा था, आज उसे ही अपनी सरकार अपराधी मानकर जेल में सड़ा रही है।
आखिर क्यों हुई गिरफ्तारी? क्या है पूरा मामला?
Sonam Wangchuk का सबसे बड़ा ‘गुनाह’ यह है कि उन्होंने लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और वहां की संस्कृति को बचाने के लिए संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) की मांग की। मोदी सरकार ने उन्हें सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया। 20 सितंबर 2025 को जब लद्दाख के लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, तो सरकार ने उनसे बात करने के बजाय लाठियां चलवाईं और दमन का रास्ता चुना।
Sonam Wangchuk पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) जैसी बेहद सख्त और दमनकारी धाराएं थोप दी गईं, जैसे कि वे कोई अपराधी हों। उन पर दंगा भड़काने और समाज में वैमनस्य फैलाने जैसे बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। सच तो यह है कि मोदी सरकार को लोकतंत्र की उठती हुई आवाजें पसंद नहीं हैं, लेकिन Sonam Wangchuk वह सूरज हैं जो जेल की कोठरी से भी अपनी चमक बिखेरकर सत्ता के अहंकार को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
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