Moid Khan

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Moid Khan Acquitted: क्या योगी सरकार ने बिना किसी ठोस सबूत के सपा नेता मोईद खान की बेकरी पर बुलडोजर चलवाकर उनका अपमान किया? क्या अब वो इस गलती की भरपाई करेगी? और अगर नहीं कर सकती, तो बुलडोजर चलवाने का अधिकार योगी सरकार को किसने दिया? ये सवाल आज हर कोई पूछ रहा है, क्योंकि अयोध्या के भदरसा गैंगरेप मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है, और कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है, जिसे सुनने के बाद हर कोई योगी सरकार पर सवाल उठा रहा है।

क्या था मामला?

शुरु करते हैं 29 जुलाई 2024 से, जब ये पूरा मामला शुरु हुआ। जुलाई में अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र में भदरसा इलाके की 12 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ। लड़की बेकरी पर काम करती थी, जहां सपा नेता मोईद खान (Moid Khan) मालिक थे और उनका नौकर राजू खान भी काम करता था।

लड़की के परिवार को मेडिकल जांच से पता चला कि वो दो महीने की गर्भवती है। दबाव डालने पर लड़की ने बताया कि राजू खान ने उसे धोखे से मोईद खान के पास भेजा, जहां मोईद ने गलत काम किया और वीडियो बना लिया। फिर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर दोनों ने करीब दो महीने तक उसका यौन शोषण किया। ये सुनने के बाद परिवार थाने पहुंचा। पुलिस ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया।

गिरफ्तार हुए Moid Khan

मामला मीडिया में आया तो लखनऊ से अयोध्या तक हंगामा मच गया। मोईद खान उस समय सपा के भदरसा नगर अध्यक्ष थे, अवधेश प्रसाद के करीबी। उनका इलाके में दबदबा था, लेकिन 30 जुलाई को पुलिस ने मोईद और राजू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद योगी सरकार ने यहां गजब की जल्दबाजी दिखाई। 3 अगस्त को प्रशासन ने मोईद की 3000 स्क्वायर फीट की A-1 बेकरी शॉप और उनके भाई के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चला दिया। अवैध निर्माण का बहाना बनाया गया। मोईद (Moid Khan) के परिवार ने चिल्ला चिल्लाकर खुद को बेकसूर बताया लेकिन किसी ने नहीं सुना। बेकरी बनाने में 40 लाख रुपये लगे थे, सब मिट्टी में मिल गया।

जांच में हुआ ये खुलासा

अब जांच आगे बढ़ी। 6 अगस्त को KGMU में नाबालिग का अबॉर्शन हुआ, और भ्रूण का DNA सैंपल लिया गया। 7 अगस्त को मोईद और राजू का DNA टेस्ट हुआ। 30 सितंबर 2024 को रिपोर्ट आई। केस पॉक्सो कोर्ट में चला, डेढ़ साल तक सुनवाई हुई। 28 जनवरी 2026 को फैसला आया, पता चला कि मोईद खान का DNA नेगेटिव था, मतलब वो दोषी नहीं। अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया, लेकिन राजू खान का DNA पॉजिटिव था, उसे दोषी ठहराया गया। 20 साल की कठोर कारावास की सजा, साथ में 50,000 रुपये का जुर्माना लगा।

योगी सरकार पर उठ रहे सवाल

तो अब सवाल ये कि पुलिस ने मोईद (Moid Khan) को बिना ठोस सबूत के आरोपी क्यों बनाया? लड़की के बयान में नाम था, लेकिन DNA ने साफ कर दिया कि मोईद का इसमें हाथ नहीं। फिर भी योगी सरकार ने बुलडोजर क्यों चलवाया? क्या ये सिर्फ इसलिए कि मोईद मुसलमान थे और सपा के नेता? देखिए, इसमें तो कोई दोराय नहीं है कि योगी सरकार अक्सर मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर चलवाती है, कभी मस्जिदों पर, कभी मकानों पर, कभी दुकानों पर।

सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका है फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार इसके लिए योगी सरकार को फटकार भी लगाई है। कहा है, बिना सोचे-समझे, बिना नोटिस के बुलडोजर न चलाओ। ये बदले की राजनीति है, कानून का उल्लंघन है। लेकिन योगी सरकार ने एक नहीं सुनी। मोईद खान (Moid Khan) की संपत्ति पर भी बुलडोजर चलवा दिया गया, जिसे बनवाने में जानें कितने सालों की कमाई लगी थी। और अब मोईद बरी हो गए, अब उनके बेटे जहीर खान ने सवाल किया है योगी सरकार से कि क्या हमारी बेकरी शॉप वापस मिलेगी? क्या पिता को वो सम्मान मिलेगा जो बरी होने के बाद मिलना चाहिए?

योगी सरकार क्या करेगी अब? क्या माफी मांगेगी? क्या संपत्ति की भरपाई करेगी? या फिर कहेगी कि गलती हो गई, भूल जाओ? सवाल ये भी है कि अगर सबूत नहीं थे, तो बुलडोजर चलवाने का हक किसने दिया? क्या ये मुसलमानों को टारगेट करने का तरीका है?


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