Adani Group
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Adani Group की वैश्विक जड़ें जमाने के लिए जिस तरह से भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री के दौरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों का मुख्य उद्देश्य देश को मजबूत करना नहीं, बल्कि अपने मित्र के व्यावसायिक साम्राज्य का विस्तार करना है। आज स्थिति यह है कि एक तरफ भारत की विदेश नीति अलग-थलग पड़ गई है और पड़ोसी देश हमें आंख दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री जहां भी पैर रखते हैं, वहां Adani Group के लिए करोड़ों के टेंडर फिक्स हो जाते हैं।
भारत के आत्मसम्मान को दांव पर लगाकर एक उद्योगपति को फायदा पहुँचाने का यह सिलसिला अब अंतरराष्ट्रीय विवादों का केंद्र बन चुका है।
मलेशिया में 9 फरवरी 2026 को हुआ नया समझौता
आज की ताजा मिसाल मलेशिया से आ रही है। आज 9 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया में हैं और वहां Adani Group को एक और बड़ा जैकपॉट मिल गया है। कुआलालंपुर से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर Adani Group एक विशाल पोर्ट बनाने की तैयारी में जुट गया है। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को अपना ‘खास दोस्त’ बताकर मोदी जी ने Adani Group की राह पूरी तरह आसान कर दी है। क्या एक प्रधानमंत्री का काम दुनिया भर में घूम-घूम कर अपने मित्र के लिए टेंडर फिक्स करना रह गया है?
विदेशी धरती पर सेट किया गया एक खास पैटर्न
यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। यही पैटर्न बांग्लादेश, श्रीलंका, सिंगापुर, नेपाल, केन्या और ऑस्ट्रेलिया में भी साफ दिखाई दिया है। साल 2017 में बांग्लादेश के साथ हुआ वह बिजली सौदा, जिसने आज वहां की जनता को भारत के खिलाफ खड़ा कर दिया है, वह पूरी तरह Adani Group के फायदे के लिए था। आज वहां की सरकार इन डील्स पर दोबारा विचार कर रही है। श्रीलंका के एक अधिकारी ने तो ऑन-कैमरा यह कुबूल किया था कि विंड पावर का प्रोजेक्ट Adani Group को मिले, इसके लिए मोदी जी ने स्वयं दबाव डाला था।
केन्या में अपमान और वैश्विक स्तर पर कलंक
इस व्यावसायिक लालच के चक्कर में भारत को पूरी दुनिया में भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। केन्या में जब Adani Group ने वहां के एयरपोर्ट पर कब्जा करने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर ‘गो बैक इंडिया’ के नारे लगाए। वहां के एक्टिविस्ट्स ने पूरी दुनिया के सामने भारत को एक ‘भ्रष्ट देश’ तक कह दिया। मोदी जी के इस ‘दोस्तवाद’ ने 140 करोड़ भारतीयों के माथे पर भ्रष्टाचार का कलंक लगा दिया है।
अमेरिका में $250 मिलियन की रिश्वतखोरी का आरोप
सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय तमाचा तब लगा, जब नवंबर 2024 में न्यूयॉर्क की कोर्ट ने Adani Group पर 250 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया। अमेरिका में यह केस दर्ज हुआ कि Adani Group ने भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों की रिश्वत दी थी। जिस देश में ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का नारा दिया जाता है, वहां के सबसे बड़े उद्योगपति पर विदेशी अदालतें रिश्वतखोरी का ठप्पा लगा रही हैं और हमारे प्रधानमंत्री वहां जाकर भी ‘दोस्ती’ निभा रहे हैं।
आत्मसम्मान गिरवी या महान कूटनीति?
आज आलम यह है कि ऑस्ट्रेलिया से लेकर श्रीलंका और केन्या तक, हर देश Adani Group की इन संदिग्ध डील्स पर पुनर्विचार कर रहा है। दुनिया समझ चुकी है कि मोदी जी जहां भी जाते हैं, वहां भारत का तिरंगा नहीं, बल्कि Adani Group का मुनाफा ऊंचा करने जाते हैं। देश और पूरा विपक्ष आज यह पूछ रहा है कि आखिर कब तक भारत की प्रतिष्ठा को एक उद्योगपति के चरणों में गिरवी रखा जाएगा? क्या Adani Group का बिजनेस भारत के आत्मसम्मान से बड़ा हो गया है? अब समय आ गया है कि राष्ट्रवाद के चोले में चल रहे इस ‘मित्रवाद’ के धंधे को बंद किया जाए।
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