M.M. Naravane
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M.M. Naravane की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब को लेकर जिस तरह का हड़कंप मचा है और अब जो FIR की खबरें सामने आ रही हैं, उसने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर उस किताब के पन्नों में ऐसा क्या राज छिपा है जिसे दबाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी को सक्रिय कर दिया गया है। क्या इसके पीछे अग्निपथ योजना की वो कड़वी सच्चाई है जो सरकार की नींव हिला सकती है या फिर मामला चीन सीमा विवाद से जुड़ा है जिस पर राहुल गांधी ने संसद में सरकार को घेरा था।
संसद में गूँजी सेना की अनसुनी दास्तान
मामला तब गरमाया जब राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान संसद में जनरल M.M. Naravane की किताब का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चीनी टैंकों को भारत की सीमा की तरफ आते देख सरकार में घबराहट पैदा हो गई थी। राहुल गांधी के अनुसार, किताब में उल्लेख है कि सरकार ने सेना प्रमुख को असमंजस में डालते हुए कह दिया था कि “जैसा उचित समझो, वैसा करो”। यह बयान उस सरकार की छवि पर सवाल उठाता है जो ‘घर में घुसकर मारने’ का दावा करती है। विपक्ष का आरोप है कि इसी सच के उजागर होने से सरकार डरी हुई है।
स्पेशल सेल की जांच पर उठते सवाल
अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस बात की जांच की तैयारी कर रही है कि M.M. Naravane द्वारा लिखी गई यह किताब ‘लीक’ कैसे हुई और राहुल गांधी तक कैसे पहुँची। ताज्जुब की बात यह है कि यह कोई गुप्त दस्तावेज नहीं बल्कि एक किताब है जो साल 2023 से ही चर्चा में है। खुद M.M. Naravane ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर इसके प्रकाशन की जानकारी दी थी और इसे खरीदने के लिए लिंक भी साझा किया था। तब सरकार को कोई खतरा नजर नहीं आया था, लेकिन अब जांच का बैठना कई संदेह पैदा करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम राजनीतिक प्रोपेगेंडा
जनरल M.M. Naravane के उस ट्वीट के समय सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन जैसे ही संसद के पटल पर इस किताब के जरिए सरकार को घेरा गया, इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए खतरा बताया जाने लगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि सरकार अब बुरी तरह फंस चुकी है क्योंकि M.M. Naravane की यह यादें अग्निपथ योजना और चीन के सामने कमजोर पड़ती कूटनीति जैसे मोर्चों पर सरकार को आईना दिखा रही हैं।
पूर्व सेनापतियों की आवाज़ को कुचलने की कोशिश?
M.M. Naravane द्वारा अपनी किताब में व्यक्त किए गए अनुभवों को अब कानूनी उलझनों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी को सच्चाई बताने से रोकने के लिए पूरा जोर लगा लिया है। सवाल यह उठता है कि यदि सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है, तो फिर जांच और FIR का यह पूरा ड्रामा क्यों किया जा रहा है। जनता अब यह देख रही है कि कैसे M.M. Naravane के अनुभवों को अपराध साबित करने की कोशिश हो रही है।
क्या आत्मसम्मान से बड़ा है राजनीतिक बिज़नेस?
M.M. Naravane की इस किताब पर मचे विवाद ने देश के सामने यह बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या सेना के शौर्य पर राजनीति करने वाले लोग अब अपने ही सेनापतियों की आवाज को कुचलना चाहते हैं। M.M. Naravane के सच और सरकार के प्रोपेगेंडा के बीच यह जंग अब लंबी खिंचने के आसार हैं। अंततः यह देखना दिलचस्प होगा कि M.M. Naravane की यह किताब और कितने बड़े खुलासे करती है और मोदी सरकार इस दबाव को कैसे संभालती है।
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