BJP
BJP की उत्तर प्रदेश इकाई में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है और 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी अंदर ही अंदर बिखरती हुई नजर आ रही है। पार्टी के भीतर नेताओं की जबरदस्त रस्साकशी और सिर-फुटव्वल अब बंद कमरों से निकलकर सोशल मीडिया के चौराहे पर आ चुकी है। बड़े-बड़े दिग्गज नेता अब खुलकर अपनी ही सरकार और अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठ गए हैं। पहले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बगावती सुर दिखाए और अब पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के एक बयान ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है।
गोदी मीडिया की चुप्पी पर उठे सवाल
देश का गोदी मीडिया इस पूरे तमाशे पर धृतराष्ट्र बनकर बैठा हुआ है। चित्रा त्रिपाठी से लेकर रुबिका लियाकत तक सब के सब इस मुद्दे पर चुप हैं और मोदी सरकार के तमाम एंकर इस अंदरूनी कलह पर एक शब्द बोलने को तैयार नहीं हैं। सोचिए अगर यही तकरार और दंगल किसी विपक्षी दल में चल रहा होता तो अब तक टीवी स्क्रीन पर न जाने कितने तीखे प्राइम टाइम शो चला दिए जाते और चिल्ला-चिल्लाकर लोकतंत्र की दुहाई दी जाती। लेकिन BJP का यह पारिवारिक दंगल इन एंकरों को दिखाई ही नहीं दे रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री का छलका दर्द
ताजा मामला दरअसल BJP के कद्दावर दलित नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर का है। मोहनलालगंज से पूर्व सांसद कौशल किशोर ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बयान जारी किया है जो सीधा शीर्ष नेतृत्व को चुभ रहा है। उन्होंने एक सितंबर को सोशल मीडिया पर लिखा कि जब कोई भी संगठन या आंदोलन अपने वसूलों से भटक जाता है तो वो वहीं लौट आता है जहां से शुरू हुआ था और इस चक्कर में विचारधारा से जुड़े लोगों का भरोसा भी टूट जाता है।
पहले भी आलाकमान पर कसा था तंज
इससे पहले भी कौशल किशोर BJP आलाकमान को आईना दिखा चुके थे। उन्होंने 1 अगस्त को तंज कसते हुए लिखा था कि एक दोस्त से बात हो रही थी और उसने कहा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब वो नीचे आ रही है तथा उसके गिरने की रफ्तार को कोई रोक नहीं सकता। जिस नेता को पार्टी ने कल तक सिर आंखों पर बैठाया और मंत्री बनाया, आज जब वो 2024 का चुनाव हार गया तो उसे इस कदर साइडलाइन कर दिया गया कि उसे अपनी ही बात खुलकर कहनी पड़ रही है।
इस्तेमाल करो और फेंक दो की नीति
यह BJP की उस पुरानी आदत को दर्शाता है जहां काम निकल जाने के बाद अपने ही नेताओं की कोई इज्जत नहीं रह जाती है और पार्टी अपने ही समर्पित कार्यकर्ताओं तथा नेताओं का इस्तेमाल करके उन्हें किनारे फेंक देती है। यही हाल यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का भी है। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच की तकरार किसी से छिपी नहीं है। केशव मौर्य एक इंटरव्यू के दौरान खुलेआम कह चुके हैं कि अगली बार लोग उन्हें सीएम के रूप में देख सकते हैं।
वर्चस्व की जंग और संस्कार पर सवाल
योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच की लड़ाई के बारे में सब जानते हैं, जिसमें बैठकों से दूरी बनाना और दिल्ली जाकर आलाकमान के चक्कर काटना शामिल है। यह साफ बयां करता है कि BJP के भीतर वर्चस्व की जंग किस हद तक पहुंच चुकी है। सवाल तो उठता है कि आखिर यह कैसे संस्कार हैं जो BJP अपने नेताओं को सिखाती है, जहां अपने ही वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया जाता है, जबकि इन्हीं नेताओं ने दिन-रात मेहनत करके पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया था।
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