Bangladesh

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Bangladesh से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। पिछले 18 महीनों में वहां जो कुछ भी हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। लेकिन उससे भी ज्यादा शर्मनाक है भारत की मोदी सरकार का इस मुद्दे पर रवैया। एक तरफ Bangladesh में हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है और दूसरी तरफ भारत सरकार उसे करोड़ों रुपये की वित्तीय मदद भेज रही है।

56 इंच का सीना और घुटने टेक कूटनीति

क्या आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह 56 इंच के सीने वाला चुनावी जुमला याद है? वह अक्सर कहा करते थे कि हम घर में घुसकर मारेंगे। लेकिन आज हकीकत यह है कि पड़ोस में बैठा एक छोटा सा देश Bangladesh हमारे माथे पर नाच रहा है। वह हमारे लोगों को काट रहा है और हमारी सरकार उसे ईनाम में करोड़ों रुपये बांट रही है। खबर आई है कि मोदी सरकार ने Bangladesh को 60 करोड़ रुपये की ‘वित्तीय मदद’ भेजी है।

हिंदुओं के नरसंहार पर सरकार की चुप्पी

आंकड़ों पर नजर डालिए, पिछले डेढ़ साल में Bangladesh में 250 से ज्यादा हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सैकड़ों महिलाओं की अस्मत लूटी गई और 1500 से ज्यादा घरों और मंदिरों को आग के हवाले कर दिया गया। लेकिन मोदी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हैरानी की बात देखिए कि जिस देश को 1971 में इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के चंगुल से छुड़ाकर इंसान बनाया, आज वही Bangladesh हमें आंखें दिखा रहा है।

कूटनीतिक हैसियत पर गहरा सवाल

वहां की BNP सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान खुलेआम कह रहे हैं कि भारत इतना स्पेशल नहीं है कि उसकी बातों पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि एक-दो हिंदुओं की हत्या को हिंसा ना कहा जाए। इसका सीधा मतलब है कि Bangladesh में हिंदुओं की जान की कीमत जीरो है और हमारे प्रधानमंत्री की हैसियत वहां के नेताओं की नजर में कुछ भी नहीं है। इतना ही नहीं, वहां के नेता भारत के ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर को तबाह करने की धमकियां देकर भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं।

टैक्सपेयर्स के पैसे का अपमान

आइडियल स्थिति तो यह थी कि भारत इस भूखे-नंगे देश का दाना-पानी बंद कर देता और इनकी कमर तोड़ देता। लेकिन मोदी सरकार Bangladesh को 60 करोड़ रुपये का तोहफा भेज रही है। ये 60 करोड़ रुपये भारत के टैक्सपेयर्स का पैसा है। क्या ये पैसा इसलिए दिया जा रहा है ताकि Bangladesh और ज्यादा हथियार खरीदकर हमारे ही लोगों को मारे? या फिर मोदी सरकार इतनी डर गई है कि उसे लगता है कि पैसे देकर वह हालात शांत कर लेगी?

दिखावे का राष्ट्रवाद और कड़वी हकीकत

साफ दिख रहा है कि मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई हैसियत नहीं रह गई है। जो सरकार अपने ही पड़ोसी देश Bangladesh को सबक नहीं सिखा सकती, उससे आप क्या उम्मीद करेंगे? अब्दुल मोइन खान जैसे लोग भारत को नीचा दिखा रहे हैं और हमारे साहब विश्व गुरु बनने का नाटक कर रहे हैं। हकीकत तो ये है कि मोदी सरकार का राष्ट्रवाद सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित है। न्यूज़ कैप्सूल आज डंके की चोट पर सवाल पूछता है कि क्या उन 250 हिंदुओं के खून की कीमत ये 60 करोड़ रुपये हैं?

मोदी सरकार चाहे जितना पीआर कर ले, लेकिन Bangladesh में बहता हिंदुओं का खून और सरकार की ये ‘कायर’ कूटनीति इतिहास में काले अक्षरों में लिखी जाएगी। अब वक्त आ गया है कि एक रुपये की भी मदद बंद की जाए और इस पड़ोसी को उसकी औकात दिखाई जाए।


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