Epstein files Exposed PM Modi
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Epstein Files से निकले राज अब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इनकी गूंज भारत के राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दे रही है। सात समंदर पार अमेरिका की एक जेल में जो राज दफन था, उसने आज दिल्ली के सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यह एक ऐसा सच है जो फाइलों के अंबार से निकलकर अब सीधे देश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे नरेंद्र मोदी के माथे पर सवालिया निशान लगा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की फाइलों में पीएम का नाम?
Epstein Files का मामला सिर्फ एक अपराधी का नहीं है, बल्कि यह देश की साख का सवाल है जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीलाम होने की कगार पर खड़ी दिख रही है। जिस चेहरे को साफ-सुथरा दिखाने के लिए करोड़ों रुपए विज्ञापनों पर पानी की तरह बहाए जाते हैं, वह नाम अब अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की फाइलों में जगह पा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि जो मोदी जी बार-बार नेहरू को घेरने की कोशिश करते हैं और उनके वैज्ञानिक आइंस्टीन से मिलने पर कटाक्ष करते हैं, उनके खुद के तार Epstein Files के मुख्य आरोपी जेफरी एप्सटीन जैसे गुनहगारों से जुड़ रहे हैं।
9 जुलाई 2017 का वो खौफनाक ईमेल
Epstein Files की पड़ताल में एक ईमेल सामने आया है जो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 9 जुलाई 2017 के इस ईमेल में जेफरी एप्सटीन ने कथित तौर पर लिखा है कि भारतीय पीएम ने उससे ‘सलाह’ ली थी। अब जनता यह पूछ रही है कि आखिर एक लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री को एक यौन अपराधी और ब्लैकमेलर से सलाह लेने की क्या जरूरत पड़ गई? क्या देश की विदेश नीति अब Epstein Files के गुनहगारों के बंद कमरों में बैठकर तय की जा रही थी?
‘डांस और गाना’: इजराइल दौरे का रहस्यमयी पक्ष
Epstein Files में दर्ज ईमेल में एक और आपत्तिजनक और अपमानजनक बात लिखी गई है। इसमें दावा किया गया है कि मोदी जी ने इजराइल में अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए ‘परफॉर्म’ किया। यह शब्द किसी भी भारतीय के लिए अपमानजनक हैं। सवाल खड़ा होता है कि क्या भारत का प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए विदेशी धरती पर जाकर समझौता कर रहा था? आखिर वह कौन सा निजी फायदा था जिसके लिए देश की गरिमा को Epstein Files के किरदारों के सामने दांव पर लगा दिया गया?
“IT WORKED”: क्या था वो गुप्त एजेंडा?
जब Epstein Files का मुख्य आरोपी जेफरी एप्सटीन अपने ईमेल में लिखता है “IT WORKED” यानी ‘यह काम कर गया’, तो संदेह और गहरा जाता है। सवाल यह है कि आखिर क्या काम कर गया? वह कौन सा गुप्त एजेंडा था जो सफल रहा? क्या वह भारत की जनता के हित में था या फिर ट्रंप और एप्सटीन जैसे लोगों के रसूख को बचाने की कोई अंतरराष्ट्रीय साजिश थी? Epstein Files के ये खुलासे अब सरकार के लिए गले की फांस बनते जा रहे हैं।
कौन था जेफरी एप्सटीन? एक दरिंदे का काला साम्राज्य
Epstein Files का केंद्र जेफरी एप्सटीन कोई मामूली अपराधी नहीं था। वह वह दरिंदा था जिसने नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदगी का अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य खड़ा किया था। उसने अपने निजी द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ को हवस का अड्डा बना रखा था, जिसे दुनिया ‘पीडोफाइल आइलैंड’ के नाम से जानती है। Epstein Files के मुताबिक, यहाँ दुनिया भर की नाबालिग लड़कियों को लालच देकर लाया जाता और उन्हें बंधक बनाकर रसूखदार लोगों के सामने परोसा जाता था।
विपक्ष का हमला: साख पर लगा गहरा दाग
जबसे Epstein Files के ये दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं, विपक्षी दल बेहद आक्रामक हो गए हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपने निजी रिश्तों और दिखावे के चक्कर में देश के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी में मिला दिया है। आज पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे एक भारतीय पीएम का नाम उस अपराधी के साथ जुड़ रहा है जिसकी मौत जेल की सलाखों के पीछे संदिग्ध हालत में हुई थी। Epstein Files ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे पर गंभीर नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या साहेब की साख अब कटघरे में है?
जेफरी एप्सटीन एक ऐसे नरक का राजा था, जो मासूम लड़कियों के बचपन को रौंद देता था। Epstein Files बताती हैं कि वह लड़कियों की तस्करी का वो इंटरनेशनल सिंडिकेट चला रहा था, जहाँ मासूमों की चीखें रसूखदारों की अय्याशियों के नीचे दब जाती थीं। आज उन्हीं Epstein Files ने जो राज उगला है, उसने प्रधानमंत्री की साख को पूरी दुनिया के सामने कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन Epstein Files पर कोई ठोस सफाई देगी या चुप्पी साधे रखेगी।
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