Rahul Gandhi

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Rahul Gandhi का वो बड़ा दावा सच साबित हो गया है, जिसने मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोट चोरी के खेल की पोल खोलकर रख दी है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कैसे चुनाव आयोग के भीतर ही ज्ञानेश कुमार की मनमानी और वोट चोरी के इस खेल के खिलाफ बगावत शुरू हो चुकी है। राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब चुनाव आयोग के अंदरूनी कलह की बातें खुलकर सामने आने लगी हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और चुनाव आयोग की बगावत

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों आयुक्तों ने साफ कहा कि आयोग के कई बड़े और अहम फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना ही चुपचाप ले लिए गए।

28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। हद तो तब हो गई जब 16 अप्रैल को एक ही दिन में चार-चार आपत्तियां दर्ज की गईं। ये आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित उप चुनाव आयुक्तों को भेजी गईं, लेकिन इन्हें दरकिनार कर मनमानी की जाती रही।

Rahul Gandhi का कड़ा रुख और अफसरों को सीधी चेतावनी

इस बड़े खुलासे के बाद अब Rahul Gandhi का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। जनता के मताधिकार को इस तरह छीने जाने पर Rahul Gandhi अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। Rahul Gandhi ने एक वीडियो जारी कर इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को सीधे ललकारा है।

Rahul Gandhi ने साफ-साफ कहा है कि आयोग में बैठकर जो किया जा रहा है वह पूरी तरह से गलत है। यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि सीधे-सीधे राजद्रोह और देश के खिलाफ अपराध है। Rahul Gandhi ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वक्त बदलेगा और जब समय आएगा तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

एसआईआर और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का विवाद

दरअसल Rahul Gandhi ने तो साल 2025 में ही इस बात का बड़ा खुलासा कर दिया था। Rahul Gandhi ने साफ कहा था कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की शह पर देश में बड़े पैमाने पर वोट चोरी करा रहे हैं। यह पूरा विवाद जून 2025 में बिहार से शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर से जुड़ा हुआ है।

एसआईआर के नाम पर 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा असली और वैध मतदाताओं के नाम चुपचाप हटा दिए गए। इसके पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर किए गए, जिसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम जैसे राज्यों में नतीजे प्रभावित हुए।

संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष की लड़ाई

इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘साबित कदाचार’ के गंभीर आरोपों के तहत हटाने का नोटिस दिया था। वहीं केसी वेणुगोपाल ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग उठाई थी। हालांकि लोकसभा और राज्यसभा के सभापतियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बावजूद विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरता आ रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।

एसआईआर का तीसरा फेज और Rahul Gandhi का अभियान

अब चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में एसआईआर का तीसरा फेज शुरू कर दिया है। 30 मई से 23 दिसंबर तक चलने वाले इस प्रोसेस में 36 करोड़ से ज्यादा वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। Rahul Gandhi अब इस पूरे खेल को देश के सामने लाकर ज्ञानेश कुमार और उनके आकाओं को पूरी तरह से घेर चुके हैं। Rahul Gandhi जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए पूरी मजबूती के साथ मैदान में डटे हुए हैं।


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