Global Hunger Index

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Global Hunger Index: अगर आप भी सुबह से शाम तक व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और न्यूज़ चैनल्स के उस ‘Delulu’ में जी रहे हो कि इंडिया बस अब ‘Vishvaguru’ बनने ही वाला है, गरीबी खत्म हो चुकी है और हम दुनिया की सबसे तेज़ भागती हुई इकोनॉमी हैं… तो ज़रा रुकिए. क्योंकि Global Hunger Index 2026 की लेटेस्ट रिपोर्ट ने BJP के इन चमकदार दावों को तगड़ा Reality Check दिया है. 122 देशों की लिस्ट में इंडिया की रैंक आई है hundred! हां भाई, भूखमरी में सौवें नंबर पर. मतलब सरकार का PR तो एकदम Main Character Energy दे रहा है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी का Vibe Check पूरी तरह फेल हो गया है.

डराने वाले हैं नंबर्स

रिपोर्ट में आए नंबर्स डराने वाले हैं, ये नंबर भरोसेमंद इंस्टिट्यूशन्स में शामिल जर्मनी की Welthungerhilfe और आयरलैंड की Concern Worldwide जैसी संस्थाओं ने निकाले हैं. ये इंडेक्स सिर्फ ये नहीं देखता कि किसको रोटी मिली, बल्कि 4 बड़े पैरामीटर्स पर काम करता है. पहला Undernourishment यानी पोषक तत्वों की कमी, देश की 9.8% आबादी को आज भी पूरी कैलोरीज़ यानी भरपेट पोषण वाला खाना नहीं मिल रहा है.

दूसरा Child Stunting यानी छोटे बच्चों की समय के साथ हाइट ग्रोथ कम होना…5 साल से कम उम्र के करीब 30% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट ही नहीं बढ़ पा रही! सोचो, देश के लगभग हर तीसरे बच्चे की ग्रोथ रुकी हुई है…. तीसरा Child Wasting: 19% बच्चे ऐसे हैं जिनका अपनी हाइट के हिसाब से वज़न बेहद कम है यानी भयंकर कमजोरी… आखिरी पैरामीटर है, Child Mortality 2.7% बच्चे अपने 5वें बर्थडे से पहले ही दम तोड़ देते हैं.

यानी पूरी दुनिया का एवरेज हंगर स्कोर जहां 18.1 है, वहीं साउथ एशिया का 23.5 पर अटका है. और हमारे पड़ोसी चीन, यूएई, कुवैत और यहां तक कि उज्बेकिस्तान जैसे 24 देश ऐसे हैं जिनका हंगर स्कोर 5 से भी कम है… और हम? हम बस इस बात की खुशी मना रहे हैं कि चलो पाकिस्तान 106 पर है, हम कम से कम 100 पर तो हैं!

मोदी सरकार के बड़े-बड़े दावों का क्या?

अब असली सवाल… मोदी सरकार के बड़े-बड़े दावों का क्या? हर दूसरे दिन हमें सुनाया जाता है कि ‘हमने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाल दिया, अमृत काल चल रहा है, GDP रॉकेट की तरह भाग रही है… तो भाई, अगर गरीबी मिट गई है, तो ये 30% बच्चे कुपोषित किसके हैं? अगर देश में इतना विकास हो रहा है, तो 80 करोड़ लोगों को आज भी 5 किलो फ्री राशन की लाइन में क्यों लगना पड़ रहा है? सच तो ये है कि सिर्फ चने और गेहूं बांटने से पेट तो भर सकता है, लेकिन Nutrition नहीं मिलता! जेन-Z लिंगो में इसे ही Gaslighting कहते हैं.

मतलब आप जनता को GDP के बड़े-बड़े नंबर्स दिखाओ, पर ये मत बताओ कि उस GDP की मलाई सिर्फ टॉप 1% अरबपतियों की जेब में जा रही है, जबकि आम आदमी के लिए दाल, दूध, फल और सब्जियां खरीदना एक लक्ज़री बन चुका है… अगर देश के 30% भविष्य का शारीरिक और मानसिक विकास ही रुक गया है, तो कौन सा Demographic Dividend और कैसा Vishvaguru? बिना हेल्दी बच्चों के हम सुपरपावर कैसे बनेंगे?

Global Hunger Index पर सरकार की टिप्पणी का इंतजार

इस रिपोर्ट के बाद सरकार का वही पुराना स्क्रिप्टेड रिप्लाई आएगा- ‘Methodology गलत है, इंडिया की इमेज खराब करने की कोशिश हो रही है… पर कब तक हर आईना दिखाने वाली रिपोर्ट को साजिश बोलकर इग्नोर करोगे? भूख और कुपोषण को किसी इवेंट मैनेजमेंट या PR कैंपेन से नहीं छुपाया जा सकता. The math is simply not mathing…

आपको क्या लगता है… क्या वाकई Methodology गलत है, या फिर सरकार की प्रायोरिटीज़? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर लिखना, और अगर ये वीडियो एक ज़रूरी Reality Check लगा हो, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करो जो अभी भी Delulu में हैं.

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