Rahul Gandhi

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Rahul Gandhi की रणनीतिक सोच और थलापति विजय के करिश्मे ने मिलकर तमिलनाडु की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव के परिणाम केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि यह Rahul Gandhi की उस दूरदर्शी ‘बैक-सीट ड्राइविंग’ का परिणाम है, जिसने दक्षिण भारत में भाजपा के लिए सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की पार्टी टीवीके (TVK) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। इस पूरी पटकथा के पीछे Rahul Gandhi का वह मास्टरमाइंड दिमाग था, जिसने विजय को राजनीति के केंद्र में लाने का ब्लूप्रिंट बहुत पहले ही तैयार कर लिया था।

पर्दे के पीछे की जुगलबंदी और रणनीतिक तालमेल

तमिलनाडु की जीत की असली कहानी परदे के पीछे लिखी गई थी। चुनाव से पहले Rahul Gandhi और विजय लगातार संपर्क में थे। Rahul Gandhi ने जान-बूझकर तमिलनाडु में ज्यादा रैलियां नहीं कीं, क्योंकि वह इस मुकाबले को ‘राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय’ की पुरानी जंग में नहीं फंसने देना चाहते थे। उनकी रणनीति साफ थी कि सत्ता विरोधी लहर का पूरा फायदा केवल विजय को मिले और उन्हें पर्याप्त राजनीतिक स्पेस प्राप्त हो। यह तालमेल इतना गहरा था कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही विजय का मौन समर्थन Rahul Gandhi को मिल चुका था, जो आज एक सफल गठबंधन के रूप में दुनिया के सामने है।

संकट के समय का साथ और पुराना भरोसा

इन दोनों नेताओं के बीच आपसी सम्मान का रिश्ता काफी पुराना है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 2009 का वीडियो इसका प्रमाण है, जिसमें विजय, Rahul Gandhi की प्रशंसा करते दिख रहे हैं। वहीं, 27 सितंबर 2025 को करूर के वेलुसामीपुरम में रैली के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद, Rahul Gandhi ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने विजय को फोन कर ढांढस बंधाया था। संकट के उन पलों में मिले इस साथ ने दोनों के बीच राजनीतिक भरोसे को और मजबूत कर दिया। आज विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी Rahul Gandhi ने विजय की जमकर तारीफ की है, जिसके जवाब में विजय ने भी उन्हें अपना आभार व्यक्त किया है।

केरल से तमिलनाडु तक राहुल की चाणक्य नीति

Rahul Gandhi ने अपनी इसी चाणक्य नीति का सफल प्रयोग केरल में भी किया, जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने 102 सीटें जीतकर शानदार वापसी की है। तमिलनाडु में उन्होंने इतनी खामोशी से अपनी पैठ बनाई कि विरोधियों को अंत तक भनक नहीं लगी। Rahul Gandhi ने पर्दे के पीछे से विजय की हर संभव मदद की, जिससे भाजपा की दक्षिण विस्तार की मंशा पूरी तरह ध्वस्त हो गई। आंध्र प्रदेश को छोड़कर पूरे दक्षिण भारत में भाजपा का सूपड़ा साफ करने का श्रेय Rahul Gandhi की इसी शांत और सटीक प्लानिंग को जाता है।

तमिलनाडु के सियासी समीकरण और विजय का राजतिलक

मौजूदा आंकड़ों की बात करें तो 108 सीटों के साथ टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक इस सरकार को स्थिरता प्रदान कर रहे हैं। Rahul Gandhi के मार्गदर्शन में कांग्रेस ने बिना देरी किए विजय को अपना आधिकारिक समर्थन दे दिया है। चुनाव परिणामों ने स्थापित पार्टियों को भी चौंका दिया है, जहाँ डीएमके (DMK) 59 सीटों पर सिमट गई और एआईएडीएमके (AIADMK) को महज 47 सीटें ही नसीब हुईं। Rahul Gandhi की उपस्थिति में अब सत्ता के सारे समीकरण फिट बैठ चुके हैं और तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक क्रांति का उदय हो चुका है।

7 मई: दक्षिण भारत में एक नए सवेरे का उदय

कल यानी 7 मई को थलापति विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह ऐतिहासिक पल इस बात का गवाह होगा कि कैसे Rahul Gandhi ने शून्य से शिखर तक का सफर तय करने में एक मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। इस शपथ ग्रहण समारोह में खुद Rahul Gandhi के चेन्नई पहुंचने की पूरी संभावना है। यह महज एक सरकार का गठन नहीं है, बल्कि Rahul Gandhi की उस सोच की जीत है जिसने नफरत की राजनीति के खिलाफ ‘मोहब्बत की दुकान’ और क्षेत्रीय अस्मिता को एकजुट किया है। अब कांग्रेस और टीवीके की यह चट्टानी मजबूती भविष्य के लोकसभा चुनावों में भी बड़े उलटफेर का संकेत दे रही है।


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