BJP in Kerala

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BJP in Kerala: केरल में बीजेपी आज तो क्या, आगे भी कभी सत्ता में नहीं आ सकती है. जानते हैं क्यों? क्योंकि वहाँ शिक्षा है. केरल में लोग अनपढ़ नहीं हैं. वहाँ की जनता को कुछ रुपए और शराब बांटकर उनका वोट नहीं खरीदा जा सकता है. और न ही उन्हें मुसलमानों और घुसपैठियों का डर दिखाकर उनका वोट छीना जा सकता है.

केरल की जनता कभी नफरत या लालच पर वोट नहीं देती है. वो वोट देती है विकास पर. वो देखती है कि उसके सामने खड़ा नेता कितना पढ़ा लिखा है और उसके राज्य के विकास के लिए क्या काम कर सकता है. वो उस पर फोकस करके अपना वोट देती है. इसलिए आज तक बीजेपी कभी केरल में सरकार नहीं बना पायी है और आगे भी नहीं बना पाएगी.

जहां शिक्षा, वहां बीजेपी नहीं (BJP in Kerala)

जहां शिक्षा होगी, वहां बीजेपी कभी नहीं आ सकती. और ये बात बीजेपी को भी बहुत अच्छी तरह से पता है. इसीलिए तो वो शिक्षा के इतनी खिलाफ है. जान लीजिए कि केरल भारत का सबसे शिक्षित राज्य है. यहां साक्षरता दर 95% से ऊपर है. महिलाओं की साक्षरता भी करीब 94-95% है. यहां हर बच्चा स्कूल जाता है. शिक्षा यहां जीवन का हिस्सा है, न कि सिर्फ चुनावी नारा.

शुरु से केरल ने शिक्षा को दिया महत्व

केरल (Kerala) आज से ही नहीं, बहुत पहले से शिक्षा का महत्व जानता था. 19वीं शताब्दी से ही त्रावणकोर और कोचीन रियासतों में राजाओं ने शिक्षा को प्राथमिकता दी. 1817 में रानी गौरी पार्वती बाई ने घोषणा की कि राज्य शिक्षा का खर्च उठाएगा. 1957 से वामपंथी सरकारों ने भी शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी खर्च किया. केरल में लिंग अनुपात भी अच्छा है और महिला साक्षरता बहुत ऊंची है. यहां लगभग हर गांव में अच्छे सरकारी स्कूल हैं.

प्राथमिक शिक्षा लगभग 100% है. 2025 में 99% से ज्यादा डिजिटल साक्षरता के साथ केरल भारत का पहला पूरी तरह डिजिटली साक्षर राज्य बन गया. यानी केरल पूरी तरह से शिक्षित राज्य है. इसीलिए यहां (Kerala) की जनता सोच-समझकर वोट देती है. यहां नफरत, धर्म और जाति का खेल नहीं चलता.

यूपी-बिहार में इसलिए सरकार बना पाती है बीजेपी

दूसरी तरफ आप उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को देखिए. इन राज्यों में साक्षरता दर अभी भी 70-73% के आसपास है. यहां बीजेपी कई बार सत्ता में आई है. क्यों? क्योंकि यहां कम पढ़े-लिखे लोगों को पैसे, शराब, डर और भावनाओं के सहारे आसानी से प्रभावित किया जा सकता है. बिहार में इस बार के चुनाव में हमने देखा कि कैसे बीजेपी ने महिलाओं को 10 हजार रुपये देने का वादा किया और वोट हासिल कर लिए. यानी कभी लालच, कभी डर, कभी मंदिर-मस्जिद के नाम पर बीजेपी कम पढ़ी-लिखी जनता से वोट ले लेती है.

Kerala में नहीं चल पाता ये फॉर्मुला

अशिक्षित या कम शिक्षित आबादी इन चक्कर में आसानी से आ जाती है. लेकिन केरल (Kerala) में ये फॉर्मूला फेल हो जाता है. वहां लोग सवाल पूछते हैं कि आपने क्या काम किया? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर आपका प्लान क्या है? इसलिए जहां शिक्षा होगी, वहां बीजेपी कभी नहीं आ सकती. और ये बात बीजेपी को भी बहुत अच्छी तरह से पता है. इसीलिए तो वो शिक्षा के इतनी खिलाफ है. इसीलिए वो हर शैक्षणिक संस्थान पर कब्जा कर रही है, उसे अपंग बनाने की कोशिश कर रही है. स्कूलों में अपने लोगों को बिठाना, पाठ्यक्रम बदलना, इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार लिखना. ये सब सत्ता को लंबे समय तक कायम रखने की रणनीति है.

अनपढ़ युवाओं को अंधभक्त बनाना है आसान

बीजेपी जानती है कि अगर देश का हर युवा शिक्षित हो गया, तो अंधभक्ति खत्म हो जाएगी. लोग तथ्यों पर सोचेंगे, झूठ को पहचानेंगे और सही फैसला लेंगे. यही वजह है कि बीजेपी शिक्षा को कमजोर रखना चाहती है. शिक्षा ही वो हथियार है जो युवाओं को नफरत, विभाजन और अंधेरे से बचा सकता है. अगर हमें इस देश से विभाजन की राजनीति को जड़ से उखाड़ना है, तो शिक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता देनी होगी.

केरल (Kerala) हमें यही सबक देता है. वो इस बात का उदाहरण है कि जहां शिक्षा मजबूत होती है, वहां नफरत की राजनीति टिक नहीं पाती. अब अगर हम चाहते हैं कि देश में सच्ची लोकतंत्र चले, देश का असल विकास हो, न कि सिर्फ विकास का ढोल पीटा जाए, तो हमें सबसे पहले शिक्षा को बेहतर करना होगा. हर गांव में अच्छे स्कूल बनाने होंगे, हर बच्चे को अच्छी पढ़ाई देनी होगी और हर युवा को सोचने-समझने की ताकत देनी होगी. क्योंकि शिक्षित जनता कभी किसी की गुलाम नहीं बनती. वो सवाल पूछती है, जवाब मांगती है और सही फैसला लेती है.


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