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BJP में अगर आप नेता हैं, कार्यकर्ता हैं या फिर समर्थक ही सही, इनमें से आप जो भी हैं, न्याय की उम्मीद तो बिल्कुल मत कीजिएगा। यहाँ न्याय नहीं मिलता, यहाँ मिलता है तो सिर्फ दबाव और समझौता। जी हाँ, हमारे पास इस बात का पुख्ता सबूत है जो किसी भी संवेदनशील इंसान का खून खौला सकता है।
मामला उत्तर प्रदेश के महोबा का है, जहाँ BJP के जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने अपनी ही पार्टी की एक महिला नेता दीपाली तिवारी के सामने ऐसी घिनौनी शर्त रख दी जिसे सुनकर रूह कांप जाए। अध्यक्ष ने महिला से कहा कि आप सिर्फ मेरे साथ एक बार हम-बिस्तर हो जाइए, उसके बदले में हम आपको जिला उपाध्यक्ष का पद और जिला पंचायत का टिकट दे देंगे। यह दावा खुद उस महिला नेता ने किया है।
पद के बदले अस्मत का सौदा और धमकियों का दौर
दीपाली ने फेसबुक पर लाइव आकर सिसकते हुए अपनी पूरी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि BJP नेता मोहनलाल कुशवाहा ने पहले उन्हें पद का लालच दिया और जब उन्होंने अपनी अस्मत का सौदा करने से साफ इनकार कर दिया, तो यह अहंकारी नेता धमकियों पर उतर आया। मोहनलाल ने महिला को डराया कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो वह महिला के पूरे परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाकर बर्बाद कर देगा। इस घटना ने एक बार फिर राजनीति के उस अंधेरे पहलू को उजागर किया है जहाँ महिलाओं की निष्ठा से ज्यादा उनकी देह की कीमत लगाने की कोशिश की जाती है।
जांच कमेटी का नाटक और पीड़ित पर बनाया जा रहा दबाव
असली खेल तो तब शुरू हुआ जब यह वीडियो वायरल हो गया। अपनी साख बचाने के लिए BJP ने आनन-फानन में एक ‘जांच कमेटी’ गठित करने का नाटक रचा। जनता को लगा कि शायद अब आरोपी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली।
वह जांच कमेटी जिसे न्याय करना था, अब उल्टा दीपाली पर ही मामला रफा-दफा करने के लिए दबाव बना रही है। उन्हें चुप रहने के लिए धमकाया जा रहा है। यह BJP का वह असली सिस्टम है जहाँ सत्ता के रसूख वाले अपराधियों को संरक्षण दिया जाता है और न्याय मांगने वाली पीड़ित महिला को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
इस्तीफे के बाद भी उठ रहे हैं सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल
मामला बढ़ते देख और लोगों के गुस्से को भांपते हुए मोहनलाल कुशवाहा ने अपने पद से इस्तीफा तो दे दिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं। जो लोग ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का ढोल पीटते हैं, वे आज इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं? BJP के भीतर जब अपनी ही महिला नेता सुरक्षित नहीं हैं, तो देश की आम महिलाओं की सुरक्षा की क्या गारंटी होगी? क्या पद के बदले शोषण करने वाले इन नेताओं के खिलाफ केवल इस्तीफा ही काफी है? आखिर क्यों ऐसी घटनाओं पर BJP का शीर्ष नेतृत्व मौन साध लेता है?
कुलदीप सेंगर से लेकर बृजभूषण शरण सिंह तक का इतिहास
महिलाओं का शोषण अब BJP के कार्यभार की एक कड़वी सच्चाई बनता जा रहा है। याद करिए उन्नाव का वह कुलदीप सिंह सेंगर कांड, जिसने एक नाबालिग का जीवन नरक बना दिया था। उस वक्त भी पार्टी ने पीड़ित का साथ देने के बजाय अपने बलात्कारी विधायक को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
यही हाल बृजभूषण शरण सिंह के मामले में भी दिखा, जहाँ देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवान महीनों तक दिल्ली की सड़कों पर न्याय के लिए रोती रहीं, लेकिन सरकार उनके खिलाफ ढाल बनकर खड़ी रही। इन मामलों में BJP का रवैया हमेशा से ही आरोपी के प्रति नरम दिखा है।
प्रज्वल रेवन्ना कांड और सत्ता की नैतिकता पर प्रहार
हद तो तब हो गई जब प्रधानमंत्री ने प्रज्वल रेवन्ना जैसे आरोपी के लिए चुनावी मंच से वोट मांगे। तब कहा गया था कि रेवन्ना को दिया गया हर वोट मोदी को जाएगा। लेकिन जब रेवन्ना के हजारों अश्लील वीडियो सामने आए और उसकी दरिंदगी की कहानी दुनिया ने देखी, तब BJP के बड़े नेताओं के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। आज BJP की कड़वी सच्चाई यही है कि दिन-रात महिला सम्मान का ढोंग किया जाता है, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हीं का शोषण करने वालों को राजनीतिक शरण दी जाती है। प्रशासन और सरकार की यह चुप्पी अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है।
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