Rahul Gandhi
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Rahul Gandhi against BJP: बीजेपी ने एक-एक करके सभी क्षेत्रीय दलों को निपटा दिया। नवीन पटनायक, केजरीवाल, ममता, अखिलेश यादव, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, एक-एक करके सबकी बारी आई। आज वो क्षेत्रीय नेता जो खुद को प्रधानमंत्री पद के तगड़े दावेदार समझते थे, वे अपनी-अपनी सीटें हार गए। नवीन पटनायक अपनी सीट हारे। केजरीवाल अपनी सीट हार गए। ममता बनर्जी दो बार अपनी सीट हारीं। स्टालिन अपनी सीट हार गए। अखिलेश दो बार हारे। तेजस्वी दो बार हारे। शरद पवार अपनी पार्टी नहीं बचा पाए। उनकी पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई। उद्धव ठाकरे की भी पार्टी टूट गई।
इस कारण हारते गए क्षेत्रीय नेता
आपको क्या लगता है ये सब कोई संयोग था? जी नहीं। क्षेत्रीय नेता अपने स्वार्थ, अहंकार और राष्ट्रीय सोच के अभाव में एकजुट होने से बचते रहे। हर कोई सोचता था कि मेरा राज्य, मेरा गढ़, मुझे अकेले लड़ने दो। नतीजा ये हुआ कि एक-एक करके सबकी पार्टी कमजोर हुई और बीजेपी ने फायदा उठाया।
Rahul Gandhi टिके रहे
लेकिन इन सबके बीच एक नेता ऐसे हैं जो शुरुआत से आखिर तक डटे रहे। वो हैं राहुल गांधी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जब सब चुप थे, तब भी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बीजेपी की धांधली के खिलाफ आवाज उठाते रहे। उन्होंने दो-दो प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं। एक को उन्होंने हाइड्रोजन बॉम्ब कहा और दूसरे को एटम बॉम्ब। उन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सबूत रखे। कैसे वोट चोरी हो रही है, कैसे वोटर लिस्ट में धांधली होती है, कैसे चुनाव आयोग और बीजेपी की सांठ-गांठ है, कैसे हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चुनाव चुराए गए।
बीजेपी की बढ़ा दी टेंशन
उन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी में तहलका मच गया। बीजेपी के बड़े-बड़े नेता मंच पर आकर रोने लगे कि राहुल हमें बदनाम कर रहे हैं। लेकिन राहुल (Rahul Gandhi) रुके नहीं। उन्होंने सबूत इकट्ठा किए, जनता के सामने रखे और लगातार लड़ते रहे। आज भी वे मोदी एंड कंपनी से नहीं डरते। हर चुनाव में धांधली जानते हुए भी लड़ते हैं, ताकि लोकतंत्र बच सके।
अगर ये सारे क्षेत्रीय नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की बात पहले मान लेते, अगर वे अहंकार छोड़कर एक मंच पर आ जाते, तो आज का नजारा कुछ और होता। लेकिन उन्होंने निम्न स्तर की राजनीति नहीं छोड़ी। स्वार्थ हावी रहा। मैं की भावना हावी रही। नतीजा सामने है, एक-एक करके सबकी बारी आई।
अकेले लड़ रहे हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) आज अकेले खड़े होकर लड़ रहे हैं। वे विपक्ष के उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जो बीजेपी के सामने सीना तानकर खड़े होते हैं। बाकी नेता हारकर चुप हो जाते हैं या बहाने बनाने लगते हैं, लेकिन राहुल लगातार सवाल पूछते हैं, सबूत दिखाते हैं और जनता को जागरूक करते हैं। अब विपक्षी पार्टियों को ये समझने की जरूरत है कि ये लड़ाई अब किसी एक पार्टी की नहीं रही। ये भारत की लड़ाई है। लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है।
क्षेत्रीय दलों को समझना होगा कि अकेले लड़कर बीजेपी जैसी मशीन को नहीं रोका जा सकता। एकजुटता जरूरी है। अहंकार छोड़ना होगा, स्वार्थ छोड़ना होगा। राहुल गांधी ने दिखा दिया कि हार मान लेना जवाब नहीं है। लगातार लड़ना, सबूत जुटाना और जनता के बीच जाना, यही सच्ची राजनीति है। बाकी नेताओं को उनसे सीख लेनी चाहिए। अगर विपक्ष अब भी नहीं जागा, तो बीजेपी एक के बाद एक राज्य हड़पती जाएगी और लोकतंत्र पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। तानाशाही आ जाएगी देश में।
विपक्षी पार्टियों को यह समझने की है जरूरत
बीजेपी इसके लिए काम करना शुरू भी कर चुकी है। एक देश एक चुनाव का नारा उसकी इसी सोच का नतीजा है। अब यह बात टीएमसी, समाजवादी पार्टी, राजद सबको समझनी होगी कि असल खतरा संविधान और लोकतंत्र पर है। यह अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भारत जोड़ो यात्रा निकालें तो अखिलेश यादव को भी यूपी यात्रा निकालनी पड़ेगी। ममता बनर्जी को भी इस दुर्दांत वोट चोरी के खिलाफ अब बंगाल की सड़कों पर उतरने का साहस करना पड़ेगा। वरना कोई भी नहीं बचेगा।
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