Ram Mandir Controversy
Ram Mandir Controversy: राम मंदिर से चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब होने का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। लेकिन इसके बावजूद सवाल लगातार उठ रहे हैं और लोग जवाब मांग रहे हैं।
अब खबर आ रही है कि इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई जानने के लिए ऊपरी स्तर पर रिपोर्ट तलब की गई है। इसी सिलसिले (Ram Mandir Controversy) में सोमवार को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या पहुंच गए। उन्होंने मंदिर परिसर के अंदर एक बंद कमरे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ करीब चार घंटे तक लंबी मीटिंग की। ये मीटिंग बंद दरवाजों के पीछे हुई, जिससे लोगों के मन में और ज्यादा सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अंदर क्या चर्चा हुई।
दैनिक जागरण ने फिर छापी खबर (Ram Mandir Controversy)
दूसरी तरफ दैनिक जागरण अखबार ने लगातार दूसरे दिन इस खबर को प्रमुखता से छापा है। अखबार ने जो दावे किए हैं, वो सुनकर हैरानी होती है। जागरण के अनुसार, जब रामलला को मिले नकद चढ़ावे की गिनती की जा रही थी, तब कुछ कर्मचारी लगातार हेराफेरी कर रहे थे। गोपनीय कक्ष में छुपाकर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों में ये सब कैद हो गया। फुटेज देखते ही चार संदिग्ध कर्मचारियों को तुरंत पकड़ लिया गया। शनिवार को यात्री सुविधा केंद्र से कुछ रकम बरामद की गई। फिर देर शाम एक बैंक कर्मी के खाते से ट्रस्ट के खाते में पैसे ट्रांसफर कराए गए।
अगले दिन यानी रविवार को कौशलपुरी इलाके में एक कर्मचारी के घर से भी नकदी बरामद हुई। जागरण अखबार आगे लिखता है कि मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि गबन की रकम चालीस-पचास लाख नहीं, बल्कि चार से पांच करोड़ रुपये तक हो सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं, ट्रस्ट ने एक वरिष्ठ कर्मचारी पर, जो दूसरे प्रांत का था, बड़ी रकम गबन करने का आरोप लगाया है और उसे नौकरी से निकाल दिया गया है।
लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है मामला
दैनिक जागरण के ये खुलासे बेहद चौंकाने वाले हैं। राम मंदिर (Ram Mandir Controversy) लाखों-करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के साथ नकद चढ़ावा, सोना-चांदी और तरह-तरह के दान देते हैं। अगर इन पैसों में गड़बड़ी हुई है तो ये बहुत गंभीर बात है। भक्तों का विश्वास टूटना किसी भी कीमत पर सही नहीं है। ट्रस्ट की तरफ से चंपत राय भले कह रहे हैं कि आरोप गलत हैं, लेकिन जब अखबार लगातार खबर छाप रहा है, सीसीटीवी की बात आ रही है, रकम बरामद होने की खबरें हैं और एक कर्मचारी को निकाला गया है, तो सवाल तो उठते ही हैं।
अखिलेश यादव ने किया था ट्वीट
बता दें कि इस पूरे मामले (Ram Mandir Controversy) की शुरुआत हुई है सपा प्रमुख अखिलेश यादव की एक ट्वीट से। दरअसल रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये गायब हो गए हैं। उन्होंने लिखा कि भगवान राम के भक्तों के लिए ये बहुत संवेदनशील खबर है। करोड़ों का चढ़ावा गायब है। और सवाल किया कि ट्रस्ट और सरकार चुप क्यों है? उन्होंने कोर्ट से मांग की कि खुद संज्ञान ले और जांच करे।
शंकराचार्य ने भी लगाए गंभीर आरोप
मामले (Ram Mandir Controversy) पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वहां तो रोज घोटाला हो रहा है। पूरा ट्रस्ट ही फर्जी है। पहले राम मंदिर की भूमि में घोटाला हुआ, अब ट्रस्ट में घोटाला कर रहे हैं। जो चढ़ावा दान पेटिका में चढ़ता है, सुबह कुछ और और शाम को कुछ और ही बताया जाता है। शंकराचार्य ने साफ कहा कि जब आप चोर को रक्षक बना देंगे तो वो क्या करेगा?
इस तरह की भी चली खबरें
इन आरोपों के बीच सोमवार को सूत्रों के हवाले से कई न्यूज चैनलों ने दावा किया कि दान पात्र की गिनती के लिए एसबीआई से तैनात चार कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। उनसे रिकवरी भी हुई। यात्री सुविधा केंद्र से पैसे रिकवर किए गए। दैनिक जागरण जैसी खबरों में भी ये दावा किया गया। लेकिन थोड़ी देर बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया, न पूछताछ हो रही है। मीडिया में चल रही खबर भ्रामक है।
हालांकि अब दैनिक जागरण ने एक बार फिर से इस खबर (Ram Mandir Controversy) को छापा है और इस बार भी कई नए खुलासे हैं। ऐसे में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता जानना चाह रही है कि क्या वाकई चार-पांच करोड़ का गबन हुआ है? अगर हुआ है तो कितने लोग इसमें शामिल थे? और आखिर ये पैसा कहां-कहां गया?
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