Rahul Gandhi and Amit Shah
Rahul Gandhi in Parliament: पूरा मानसून सत्र बीतने के बाद आखिरकार अमित शाह ने बयान दिया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने ऐसा जबरदस्त दबाव बनाया कि अमित शाह को ANI और PTI को बुलाकर अपनी बात रखनी पड़ रही है। ये सब राहुल गांधी की वजह से हो पाया है। वरना इससे पहले अमित शाह को संसद सत्र के बीच ANI PTI से बात करते हुए आपने कब देखा है? कभी नहीं देखा।
कैसे Rahul Gandhi ने किया मजबूर?
अब राहुल गांधी ने कैसे ये दबाव बनाया, ये पूरी कहानी समझना जरूरी है। देखिए ये तो हम सब जानते हैं कि जंतर मंतर पर छात्रों ने पेपर लीक, परीक्षा सुधार और नौकरियों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। सरकार ने उन पर लाठीचार्ज करवाया, पैलेट गन चलाई, युवाओं को बुरी तरह घायल कर दिया। कई छात्रों की आंखें खराब हो गईं, कई गंभीर रूप से चोटिल हुए। जब ये हुआ तो राहुल गांधी सबसे पहले सड़क पर उतरे। छात्रों से मिले, उनकी पीड़ा सुनी, घायलों से बात की और साफ कहा कि ये बर्बरता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संसद में भी उठाया मुद्दा
फिर संसद में Rahul Gandhi ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। बार बार सवाल पूछे कि जंतर मंतर पर छात्रों के ऊपर लाठी और पैलेट गन क्यों चलवाई गई? किसके आदेश पर चलाई गई? गृह मंत्रालय दिल्ली पुलिस और आरएएफ को नियंत्रित करता है। बिना गृह मंत्री के आदेश के गोली कैसे चल सकती है? राहुल ने साफ साफ कहा कि अगर अमित शाह ने आदेश दिया तो वो सीधे जिम्मेदार हैं। और अगर नहीं दिया तो वो अक्षम हैं। दोनों सूरत में उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। राहुल गांधी ने सदन में बार बार कहा कि अमित शाह या तो कल्पेबल हैं या इनकंपिटेंट। दोनों हालत में उनका जाना जरूरी है।
विपक्ष हुआ एकजुट
इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष राहुल गांधी के साथ एकजुट होकर अड़ गया। मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा समेत सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि अमित शाह सदन में आकर जवाब दें। प्रधानमंत्री मोदी माफी मांगें। छात्रों पर हुई हिंसा कोई छोटी मोटी बात नहीं है। देश का भविष्य जो युवा हैं, उन पर गोली चलाना लोकतंत्र के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है। विपक्ष ने नारे लगाए, विरोध प्रदर्शन किया और मुद्दे को जिंदा रखा। इस बीच बीजेपी झारखंड प्रोटेस्ट का मुद्दा उठाकर ध्यान भटकाने की पूरी कोशिश करती रही।
बीजेपी ने भी चली कई चालें
Rahul Gandhi को उलझाने की कोशिश की गई। लेकिन राहुल गांधी और विपक्ष मुख्य मुद्दे से जरा भी नहीं भटके। छात्रों पर हुई बर्बरता का जवाब लगातार मांगा जाता रहा। सत्र के दौरान अमित शाह सदन में नजर नहीं आए। 15 से 17 दिन तक गायब रहे। उनकी कुर्सी खाली रही। लेकिन दबाव इतना बढ़ गया कि सत्र खत्म होने के बाद उन्हें मीडिया के सामने आना पड़ा। ANI PTI को बुलाकर बयान देना पड़ा। ये राहुल गांधी की साफ जीत है। उन्होंने सड़क से लेकर संसद तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ी। उनकी जिद, लगातार सवालों और पूरे विपक्ष की एकजुटता के आगे आखिरकार अमित शाह को झुकना पड़ा।
ये सामान्य बात नहीं है दोस्तों। आमतौर पर अमित शाह संसद सत्र के बीच ऐसे बयान नहीं देते। लेकिन इस बार राहुल गांधी ने ऐसा माहौल बना दिया कि अमित शाह के लिए चुप रहना मुश्किल हो गया। राहुल गांधी ने साबित कर दिया कि अगर सही मुद्दे पर अड़े रहो, सड़क से संसद तक आवाज उठाओ तो सत्ता को जवाब देना ही पड़ता है। छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश हुई लेकिन राहुल गांधी ने उसे और तेज कर दिया।
अब अमित शाह को अपनी सफाई देनी पड़ रही है। ये दबाव सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी और विपक्ष की मजबूती की वजह से बना है। अब देश देख रहा है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे पर कितने गंभीर और अडिग हैं। सत्ता पक्ष चाहे जितना भी भाग ले, राहुल गांधी के सवालों से भाग नहीं सकता।
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