Adani Group
Adani Group को बड़ा फायदा पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर विवादित आदेश जारी कर दिया है। देश के अमूल्य जंगलों, प्राकृतिक पर्यावरण तथा जल-जमीन की बलि देकर आखिर किस उद्योगपति का विशाल औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया जा रहा है, इस पर अब राज्य भर में तीखे सवाल उठने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने Adani Group की दो बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए बहुमूल्य वनों और मैंग्रोव की जमीन को दांव पर लगा दिया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक रायगढ़ और अमरावती जिलों में Adani Group को लगभग 83,700 वर्ग फुट सुरक्षित वन भूमि हस्तांतरित करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
रायगढ़ में मैंग्रोव और आरक्षित वन की बलि
रायगढ़ जिले के अलीबाग में सीमेंट टर्मिनल हेतु आरक्षित वन, नाला मैंग्रोव और क्रीक मैंग्रोव की जमीन चिन्हित की गई। जिस तटीय मैंग्रोव और हरे-भरे जंगलों को बचाने की बड़ी-बड़ी कसमें खाई जाती थीं, उन्हें Adani Group सीमेंटेशन लिमिटेड की बर्थिंग जेटी, कन्वेयर कॉरिडोर और नई एप्रोच रोड के निर्माण हेतु रातों-रात कटने के लिए छोड़ दिया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र तटीय इलाकों में मैंग्रोव का यह विनाश आने वाले समय में भयंकर प्राकृतिक आपदाओं और तटीय कटाव का मुख्य कारण बनेगा। इस प्रकार निजी कंपनी के व्यावसायिक विस्तार को गति देने के लिए महत्वपूर्ण जैव विविधता और जंगलों की खुलेआम बलि दी जा रही है।
अमरावती में गैस पाइपलाइन के लिए आदेश
दूसरी ओर अमरावती जिले में Adani Group की गैस पाइपलाइन बिछाने हेतु बड़ी सुरक्षित वन भूमि साफ कर दी गई। अमरावती क्षेत्र में Adani Total Gas Limited की पाइपलाइन बिछाने के नाम पर 13,800 वर्ग फुट से भी अधिक घने वन क्षेत्र को व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। महाराष्ट्र के वन विभाग ने बाकायदा इस संबंध में दो अलग-अलग आधिकारिक आदेश जारी करके अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। इन फैसलों से यह साफ संदेश मिलता है कि पर्यावरण भले ही तबाह हो जाए, लेकिन Adani Group का मुनाफा और व्यापारिक कारोबार किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहिए।
विभिन्न राज्यों में नीतियों के बदलाव का पैटर्न
बिहार में महज एक रुपये के भाव पर जमीन हस्तांतरित करने का मामला हो या फिर विभिन्न प्रांतीय नीतियां बदलना। गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक जहां भी देखा जाए, वहां की पूरी सरकारी मशीनरी और नीतियां Adani Group की व्यावसायिक सुविधा के अनुसार ही मोड़ी जा रही हैं। देश के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स और बेशकीमती संपत्तियां लगातार एक ही औद्योगिक समूह को सौंपने की प्रवृत्ति पर अब जनता भी सवाल उठाने लगी है। आखिर जनहित और पर्यावरण संरक्षण की उपेक्षा करके Adani Group को यह असाधारण सहूलियत कब तक मिलती रहेगी।
बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में एकछत्र साम्राज्य
हवाई अड्डे, बंदरगाह, बिजली, सीमेंट और गैस पाइपलाइन जैसे हर प्रमुख सेक्टर में केवल एक ही घराने का दबदबा बढ़ा। और तो और, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगभग हर बड़े विदेशी दौरे के बाद उन देशों में मिलने वाला बड़ा व्यापारिक ठेका भी घूम-फिरकर Adani Group को ही प्राप्त होता है। देश के जंगल, जल, जमीन, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन धीरे-धीरे गुजरात से आने वाले एक ही व्यवसायी के नियंत्रण में सौंपे जा रहे हैं। यह बहस भी जोर पकड़ रही है कि जब देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और लाभार्थी उद्योगपति तीनों एक ही राज्य से संबंध रखते हैं, तो क्या यह महज इत्तेफाक है।
महंगाई से पिसती जनता और दोस्तों पर मेहरबानी
महाराष्ट्र के जंगलों की बलि देकर दिया गया यह नया तोहफा दिखाता है कि सत्ता की असली प्राथमिकता क्या है। जबकि देश की आम जनता भीषण महंगाई और बेरोजगारी के बोझ तले बुरी तरह पिस रही है, तब सरकार देश की कीमती जल-जमीन और वनों को कौड़ियों के भाव अपने सबसे चहेते मित्र की झोली में डाल रही है। Adani Group को लगातार दी जा रही इन असाधारण प्राथमिकताओं ने देश में संसाधनों के न्यायसंगत वितरण पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पर्यावरण विनाश की कीमत पर Adani Group का व्यापारिक साम्राज्य बढ़ाने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
Also Read
राहुल गांधी ने अमित शाह को झुकने पर किया मजबूर, संसद आए गृह मंत्री, मीडिया को दिया बयान
मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
