BJP
BJP की ओर से प्रचार-प्रसार के तरीकों और राष्ट्रवाद के दावों पर एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रचार करने के लिए सोशल मीडिया पर एक 9 सेकंड की रील जारी की गई थी। इस वीडियो के बैकग्राउंड स्कोर में लाहौर के एक मशहूर रॉक बैंड ‘बयान’ के 2024 के चर्चित गाने ‘सफ़र’ का इस्तेमाल किया गया। इस रील को लाखों व्यूज तो मिले, लेकिन इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी के अपने ही दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी निर्देशों और नीतिगत पाबंदियों पर उठे सवाल
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियमों के तहत कड़े निर्देश जारी किए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता का हवाला देते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ओटीटी और स्ट्रीमिंग सेवाओं से पाकिस्तानी कंटेंट को हटाने के आदेश दिए गए थे। यहाँ तक कि संगीत प्लेटफॉर्म्स से पोस्टर्स तक बदलने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में इस प्रकार के बैकग्राउंड स्कोर के इस्तेमाल को लेकर विरोधी पक्ष BJP पर दोहरे रवैये का आरोप लगा रहे हैं।
अतीत के विवादों और पुरानी घटनाओं का जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब BJP नेताओं से जुड़े संगीत या प्रचार वीडियो को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। इससे पहले 2019 में तेलंगाना के एक विधायक द्वारा भारतीय सेना को समर्पित एक गाना जारी किया गया था, जिसे बाद में पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक प्रचार गीत की नकल बताया गया था। उस समय भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय को लेकर काफी चर्चा हुई थी और राजनीतिक विरोधियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
विपक्ष के आरोप और नीतियों का दोहराव
विपक्षी दलों का कहना है कि BJP अक्सर कांग्रेस की पुरानी योजनाओं और नीतियों को रीब्रांड करके उनका क्रेडिट लेती रही है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एक तरफ जहाँ सांस्कृतिक और कूटनीतिक मामलों में कड़े रुख का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ प्रचार के मामलों में सीमा-पार के धुनों का सहारा लिया जा रहा है। विरोधियों का मानना है कि ऐसे कदम पार्टी के राजनीतिक स्टैंड और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच के अंतर को दर्शाते हैं।
क्रिकेट और कूटनीतिक रिश्तों पर बहस
कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों के अलावा खेल के मोर्चे पर भी BJP सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। एक तरफ जहाँ राजनीतिक मंचों से कड़े संदेश दिए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलने की अनुमति दी जाती है। विपक्षी दल इसे सुविधा की राजनीति करार दे रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों का इस्तेमाल केवल चुनावी फायदों के लिए किया जाता है।
राष्ट्रवाद के मापदंडों पर उठती आवाजें
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक विश्लेषक और आम जनता राष्ट्रवाद के तय मापदंडों पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि देशप्रेम और नीतियां किसी सहूलियत के हिसाब से तय नहीं होनी चाहिए। इस विवाद के सामने आने के बाद BJP के पीआर मैनेजमेंट और सोशल मीडिया रणनीति पर सवालिया निशान लग गए हैं, जिसका जवाब देने से फिलहाल पार्टी बचती नजर आ रही है।
Also Read
Modi Government के शासन में बेरोज़गारी का दंश और अमृतकाल का सच
मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
