Amit Malviya

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Amit Malviya, जो लंबे समय से खुद को बीजेपी के डिजिटल साम्राज्य का बेताज बादशाह समझते थे, उनकी आखिरकार पार्टी से छुट्टी हो ही गई है। सोशल मीडिया पर नफरत का बाजार सजाने और दिन-रात फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने का आरोप झेल रहे Amit Malviya की हालत अब पूरी तरह पतली हो चुकी है। पार्टी ने उन्हें घसीटकर आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रमुख के पद से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जिस कुर्सी पर बैठकर वो सालों से ट्रोल आर्मी चला रहे थे, अब वो कुर्सी उनके हाथ से छीन ली गई है।

विपक्ष का दबाव और परफॉरमेंस में गिरावट

असल में बात यह है कि बीजेपी अब कांग्रेस और विपक्ष का सोशल मीडिया प्रेशर बिल्कुल नहीं झेल पा रही थी, और इसी दबाव की पहली गाज Amit Malviya पर आ गिरी है। Amit Malviya लंबे समय से सिर्फ हवाबाजी कर रहे थे और काम के नाम पर कुछ कर नहीं पा रहे थे। उनके रहते-रहते कांग्रेस सोशल मीडिया के हर फ्रंट पर बीजेपी पर हावी होती चली गई।

विफल रणनीति और नैरेटिव का ध्वस्त होना

Amit Malviya का एक ही पुराना ढर्रा था, फर्जी खबरें फैलाना और अपनी ही पार्टी की फजीहत कराना। Amit Malviya जितने नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करते, सब में पूरी तरह से फिसड्डी साबित होते। कभी जेन-जी को बदनाम करने का पैंतरा आजमाया, तो कभी हर बात पर ‘अर्बन नक्सल’ का पुराना घिसा-पिटा राग अलापा, लेकिन उनका कोई भी पैंतरा जनता के गले नहीं उतरा। हर मोर्चे पर कांग्रेस उनसे चार कदम आगे रही, जिससे Amit Malviya का हर दांव उलटा पड़ता गया और बीजेपी की किरकिरी होती रही।

संगठन में बड़ा फेरबदल और नए चेहरों की एंट्री

जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, तो बीजेपी को भी समझ आ गया कि इस खोखले नैरेटिव से काम नहीं चलेगा और फिर पार्टी ने पूरा ढांचा ही बदल डाला। Amit Malviya की जगह अब छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को बीजेपी आईटी सेल का नया राष्ट्रीय प्रमुख बना दिया गया है। दीपक म्हस्के, जो पहले पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं और हाल ही में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी बने थे, अब यह कमान संभालेंगे।

इसके अलावा पार्टी ने अपनी पूरी टीम का ही नया ऐलान कर दिया है, जिसमें वसुंधरा राजे और राम माधव समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक के पद पर बनाए रखा गया है। साथ ही महाराष्ट्र से प्रीति गांधी, दिल्ली से शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड से आलोक भट्ट और हरियाणा से अरुण यादव को सोशल मीडिया समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्या चेहरा बदलने से बदलेगी पार्टी की फितरत?

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ चेहरा बदल देने से बीजेपी की वो फितरत बदल जाएगी, जो सालों से झूठ और नफरत के दम पर सोशल मीडिया पर बनाई गई थी? Amit Malviya को बलि का बकरा बनाकर क्या मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छुपा पाएगी? क्योंकि Amit Malviya भी तो वही कर रहे थे, जिसका उन्हें आदेश मिला था। मतलब अब जो आईटी सेल सालों से सच को दबाने और फर्जी खबरों को सच बताने की दुकान चला रहा था, क्या दीपक म्हस्के के आने से उसकी बदनामी मिट जाएगी?

मोहरे की कुर्बानी और संगठन का सच

असलियत तो यह है कि Amit Malviya सिर्फ एक मोहरा थे। असली खेल तो उस सोच का है, जिसने देश के युवाओं के हाथों में रोजगार की जगह नफरत का कीबोर्ड थमा दिया। अब जब वही नफरत का दांव उलटा पड़ने लगा, तो बीजेपी ने चुपचाप अपने सबसे वफादार सिपाही Amit Malviya का ही पत्ता साफ कर दिया। याद रखिएगा, बीजेपी किसी की सगी नहीं है।


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