Rahul Gandhi
Rahul Gandhi को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर दिए बयान से जुड़े आपराधिक मानहानि केस को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। उत्तर प्रदेश में दर्ज इस मुकदमे और मजिस्ट्रेट के समन आदेश को देश की सबसे बड़ी अदालत ने सीधे खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सच को परेशान किया जा सकता है, लेकिन उसे कभी पराजित नहीं किया जा सकता।
भारत जोड़ो यात्रा के बयान से शुरू हुआ विवाद
आपको बता दें कि पूरे विवाद की शुरुआत साल 2022 में हुई थी, जब अपनी ऐतिहासिक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान Rahul Gandhi ने महाराष्ट्र की धरती से ऐतिहासिक तथ्यों को जनता के सामने रखा था। Rahul Gandhi ने साफ-साफ कहा था कि वीर सावरकर अंग्रेजों के नौकर थे। वे अंग्रेजों से पेंशन लेते थे और उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ने के बजाय अंग्रेजों के सामने घुटने टेके थे। Rahul Gandhi के इसी बयान के बाद उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया गया था।
कानूनी मंजूरी के अभाव में केस खारिज
लेकिन आज कानून के सामने यह मामला टिक नहीं सका। सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जब इस मामले में जरूरी कानूनी सैंक्शन यानी मंजूरी ही नहीं ली गई, तो फिर केस की कोई अहमियत ही नहीं रह जाती। यूपी सरकार कोर्ट में कोई मंजूरी पत्र पेश ही नहीं कर पाई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने Rahul Gandhi के खिलाफ चल रहे इस केस को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
सरकारी तंत्र के इस्तेमाल पर उठा सवाल
अदालत का यह फैसला सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार और उसके पूरे प्रचार तंत्र के मुंह पर एक करारा तमाचा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार पिछले दस सालों से सावरकर के नाम पर जो राष्ट्रवाद बेच रही थी, आज कोर्ट के फैसले ने उसकी पोल खोल कर रख दी है। Rahul Gandhi को राहत मिलने के बाद यह साबित होता है कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का किस कदर गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। Rahul Gandhi के समर्थन में खड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले से न्याय की जीत हुई है।
सावरकर के परिवार के बयान से खड़ा हुआ नया विवाद
जिस सावरकर को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उनकी हकीकत को लेकर खुद उनके अपने परिवार का बयान सामने आया था। जून के महीने में पुणे की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के दौरान सावरकर के अपने परपोते सत्यकी सावरकर ने अदालत के सामने यह स्वीकार किया था कि सावरकर ने अंडमान की जेल से छूटने के लिए अंग्रेजों के सामने दया याचिकाएं लिखी थीं। उनके माफीनामों का पूरा रिकॉर्ड सरकारी फाइलों में दर्ज है।
जनता के सामने आई सच्चाई
खुद उनके परपोते ने माना कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और बटुकेश्वर दत्त जैसे असली शूरवीरों ने अंग्रेजों के सामने झुकने से इनकार कर दिया था, लेकिन सावरकर ने अपनी याचिकाएं दायर की थीं। जब सावरकर के परिवार के बयान कोर्ट के रिकॉर्ड में हैं, तो फिर बीजेपी नेताओं के दावों पर सवाल उठना लाजमी है। जनता अब समझ चुकी है कि सच के साथ कौन खड़ा है और कौन इतिहास के तथ्यों को मोड़ने की कोशिश कर रहा है। Rahul Gandhi के खिलाफ बने इस पूरे नैरेटिव का अब अंत हो चुका है।
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