Rajiv Gandhi
Rajiv Gandhi भारत के इतिहास में एक ऐसे आधुनिक, डिजिटल और युवा सोच वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने देश को 21वीं सदी के लिए तैयार किया। 20 अगस्त 1944 को जन्मे Rajiv Gandhi महज 40 साल की उम्र में देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच से भारत की ऐसी मजबूत नींव रखी जिसने पूरे देश की तकदीर बदलकर रख दी।
युवाओं को वोट देने का अधिकार और लोकतंत्र में भागीदारी
जब Rajiv Gandhi ने देश की कमान संभाली, तब उन्होंने सबसे पहले देश के युवाओं की ताकत को पहचाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सीधा भागीदार बनाने का फैसला किया। उन्होंने संविधान के 61वें संशोधन के जरिए वोट देने की उम्र सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया। इस ऐतिहासिक कदम ने करोड़ों युवाओं के हाथों में अपना भविष्य चुनने का अधिकार दे दिया।
दूरसंचार क्रांति और सी-डॉट व एमटीएनएल की शुरुआत
युवाओं को ताकत देने के बाद उनका ध्यान देश के संचार ढांचे को बदलने पर गया। आज जिस डिजिटल इंडिया और तकनीक पर हम गर्व करते हैं, उसकी नींव Rajiv Gandhi ने उसी दौर में रख दी थी। उन्होंने अगस्त 1984 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानी C-DOT की शुरुआत की। इसके बाद गांवों और शहरों में जगह-जगह पीसीओ का जाल बिछ गया और एक आम आदमी भी देश-दुनिया से आसानी से जुड़ने लगा। 1986 में MTNL की स्थापना करके Rajiv Gandhi ने इस दूरसंचार क्रांति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
कंप्यूटर क्रांति और रेलवे का कंप्यूटरीकरण
Rajiv Gandhi जानते थे कि आने वाला दौर तकनीक का है। इसलिए उन्होंने अपने मित्र सैम पित्रोदा के साथ मिलकर देश में कंप्यूटर क्रांति का बिगुल फूंक दिया। उस दौर में जब लोग कंप्यूटर से डरते थे, तब Rajiv Gandhi ने कंप्यूटर उपकरणों पर आयात शुल्क कम किया ताकि यह आम जनता की पहुंच में आ सके। रेलवे में टिकटों का कंप्यूटरीकरण भी उन्हीं की दूरदर्शी सोच का नतीजा था।
नई शिक्षा नीति, नवोदय विद्यालय और पंचायती राज
तकनीक के साथ-साथ Rajiv Gandhi ने शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव किए। गांव-देहात के गरीब लेकिन मेधावी बच्चों को बेहतरीन शिक्षा देने के लिए उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुआत की। साथ ही 1986 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाकर उच्च शिक्षा का आधुनिकीकरण किया। इतना ही नहीं, लोकतंत्र को देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए Rajiv Gandhi ने पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने का पूरा ढांचा तैयार कराया। भले ही उनके बनाए प्रस्ताव को बाद में 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के रूप में कानूनी रूप मिला, लेकिन सत्ता के विकेंद्रीकरण का यह सपना उन्हीं की सोच का परिणाम था।
श्रीपेरंबुदूर का दुखद अंत और देश की अनमोल विरासत
देश को आधुनिकता के पथ पर आगे ले जाने वाले इस महान जननेता का सफर बेहद दुखद मोड़ पर खत्म हुआ। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी सभा के दौरान तमिल उग्रवादी संगठन लिट्टे यानी LTTE के आत्मघाती हमले में Rajiv Gandhi की निर्मम हत्या कर दी गई। इस दुखद घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, लेकिन अपने पांच साल के छोटे से कार्यकाल में Rajiv Gandhi ने देश को जो राह दिखाई, उसके लिए भारत हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
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