Rahul Gandhi
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Rahul Gandhi ने संसद के पटल से जो चेतावनी दी थी, आज वह हकीकत बनकर देश के सामने खड़ी है। भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अब दिल्ली के साउथ ब्लॉक से नहीं, बल्कि वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस से तय हो रहे हैं। यह 56 इंच के सीने वाली ‘मजबूत सरकार’ का असली चेहरा है। खबर आई है कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए महज 30 दिन का ‘स्पेशल लाइसेंस’ दिया है। इसे कूटनीति की भाषा में छूट कहा जा सकता है, लेकिन असल में यह भारत की संप्रभुता पर करारा प्रहार है। राहुल गांधी पहले ही कह चुके थे कि मोदी सरकार की विदेश नीति घुटने टेकने वाली साबित होगी।
स्कॉट बेसेंट का आदेश और भारत की विवशता
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यह छूट सिर्फ 3 अप्रैल तक वैध है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगले महीने भारत अपने पुराने और भरोसेमंद मित्र रूस से तेल खरीदेगा या नहीं, इसके लिए हमें फिर से अमेरिका के आगे हाथ फैलाना होगा। Rahul Gandhi ने ठीक यही बात कही थी कि भारत के आंतरिक फैसले अब सात समंदर पार से लिए जाएंगे। जो सरकार अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशी ताकतों के ‘लाइसेंस’ की गुलाम बन चुकी है, उसके अखंड भारत और POK जीतने के दावे अब खोखले नजर आने लगे हैं। Rahul Gandhi के शब्दों में, मोदी सरकार ने देश की आन-बान और शान को गिरवी रख दिया है।
संसद में दी गई राहुल गांधी की चेतावनी
11 फरवरी के उस दिन को याद कीजिए जब संसद के भीतर Rahul Gandhi ने दहाड़ते हुए केंद्र सरकार को आगाह किया था। Rahul Gandhi ने साफ कहा था कि अब अमेरिका ही तय करेगा कि भारत किससे तेल खरीदेगा और किससे नहीं। चाहे रूस हो या ईरान, हर फैसला वॉशिंगटन में होगा क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सरेंडर कर चुके हैं। Rahul Gandhi के इस बयान को अभी एक महीना भी नहीं बीता और ट्रंप प्रशासन के आदेश ने उस पर मुहर लगा दी है। स्कॉट बेसेंट का सोशल मीडिया पोस्ट इस बात का प्रमाण है कि भारत की संप्रभुता अब समझौते के दौर से गुजर रही है, जिसका अंदेशा Rahul Gandhi ने बहुत पहले जता दिया था।
ट्रंप के सामने ‘बिछी’ मोदी सरकार
आजाद भारत का यह हाल पहले कभी नहीं देखा गया। अब अमेरिका तय कर रहा है कि भारत की रसोई में गैस कहाँ से आएगी और गाड़ियों में तेल कहाँ से डलेगा। ट्रंप प्रशासन के सामने मोदी सरकार पूरी तरह बिछ चुकी है। देश का हर जागरूक नागरिक आज यही पूछ रहा है कि अमेरिका आखिर होता कौन है भारत को इजाजत देने वाला? हम किसी के उपनिवेश नहीं हैं, हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं। लेकिन Rahul Gandhi ने जिस ‘सरेंडर सरकार’ का जिक्र किया था, आज उसकी तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है। विदेशी दौरों पर गले मिलने और ‘हाउडी मोदी’ जैसे आयोजनों का कड़वा सच आज देश के सामने है।
रूस जैसे पुराने दोस्त का साथ छोड़ा
अमेरिका की ट्रंप सरकार ने हाल ही में भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। इसके बाद लगातार दबाव डाला गया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे और मोदी सरकार इस दबाव के आगे झुक गई। हमने एक ऐसे भरोसेमंद दोस्त को मुश्किल हालात में अकेला छोड़ दिया जिसने हर संकट में भारत का साथ दिया था। Rahul Gandhi का तर्क रहा है कि भारत की विदेश नीति अब स्वाभिमान से नहीं, बल्कि अमेरिकी दबाव से चल रही है। यह सिर्फ तेल का सौदा नहीं है, बल्कि देश के गौरव का सौदा है। Rahul Gandhi लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हमारी स्वतंत्र विदेश नीति को क्या हो गया है?
साख पर लगा गहरा बट्टा
आज स्थिति यह है कि रूस जैसे मित्र देश के साथ खुलकर खड़े होने की हिम्मत भी यह सरकार नहीं जुटा पा रही है। Rahul Gandhi ने बार-बार आगाह किया है कि अगर भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता खो देता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप के फैसलों पर निर्भरता दर्शाती है कि भारत की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा धक्का लगा है। Rahul Gandhi के मुताबिक, मोदी सरकार के कार्यकाल में देश की विदेश नीति अब राम भरोसे चल रही है। अगर समय रहते संप्रभुता की रक्षा के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से बाहरी ताकतों के नियंत्रण में होगी, जैसा कि Rahul Gandhi ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था।
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