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BJP के लिए बंगाल चुनाव 2026 की राह कांटों भरी नजर आ रही है और पहले चरण का रण खत्म होते-होते यह साफ हो गया है कि बंगाल की जनता प्रोपेगैंडा फैलाने वालों के साथ किस तरह पेश आ रही है। रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर से लेकर BJP प्रत्याशी शुभेंदु सरकार तक को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा और उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। बंगाल चुनाव 2026 के इस पहले चरण में BJP नेता हैरान और परेशान हैं क्योंकि उन्हें हर तरफ विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ममता बनर्जी की लोकप्रियता आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है और BJP की एक नहीं चल रही है, जिसके चलते अब वे पूरी तरह बौखला चुके हैं।

आयोग के दावों की मुर्शिदाबाद में निकली हवा

चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े दावे किए थे कि इस बार चुनाव पूरी तरह भयमुक्त और हिंसा रहित होंगे। आयोग ने टीएमसी को घेरते हुए कहा था कि न धमकी चलेगी और न ही बूथ जामिंग होगी। लेकिन 23 अप्रैल को बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण में मुर्शिदाबाद ने इन दावों की पूरी तरह धज्जियां उड़ा दीं। वोटिंग शुरू होने से पहले ही वहां जमकर देसी बम चले, जिसमें कई लोग लहूलुहान हो गए। जब आयोग ने पहले चरण के लिए ही 2,407 कंपनियां और मुर्शिदाबाद में 316 कंपनियां तैनात की थीं, तो फिर यह खून-खराबा क्यों नहीं रुका?

सुरक्षाबलों की मौजूदगी में भी पिटते रहे बीजेपी नेता

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बंगाल चुनाव 2026 के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए ढाई लाख अर्धसैनिक बल आखिर कर क्या रहे थे? मुर्शिदाबाद की हिंसा में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने BJP नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया, लेकिन भारी सुरक्षा बल सिर्फ मूकदर्शक बने रहे। चुनाव आयोग के वो बड़े-बड़े दावे कि इस बार चप्पे-चप्पे पर पहरा होगा, पूरी तरह फेल साबित हुए। बंगाल चुनाव 2026 की तस्वीरों ने दिखा दिया है कि लाखों की फौज जमीन पर माहौल को शांत रखने में नाकाम रही है, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं।

वोटर लिस्ट से नाम गायब और दीदी का अपमान

BJP को जब लगा कि बंगाल चुनाव 2026 की सीधी लड़ाई में वह नहीं जीत पाएगी, तो चुनाव आयोग को मोहरा बनाकर साजिशें रची गईं। एसआईआर के नाम पर 90 लाख से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटवा दिए गए ताकि ममता बनर्जी का वोट बैंक कमजोर किया जा सके। इसके अलावा अमित शाह और मोदी जी जिस तरह ‘ओ दीदी’ और ‘ऐ दीदी’ कहकर ममता बनर्जी को संबोधित करते हैं, उसे बंगाल की जनता ने अपनी अस्मिता पर चोट माना है। बंगाल चुनाव 2026 में BJP का यह घटिया बर्ताव ही उनकी हार की सबसे बड़ी वजह बनता दिख रहा है।

ईवीएम की गड़बड़ी ने बढ़ाई मतदाताओं की नाराजगी

बंगाल चुनाव 2026 के मतदान के दौरान सिर्फ हिंसा ही नहीं हुई, बल्कि कुप्रबंधन ने भी जनता को परेशान किया। कई केंद्रों पर घंटों तक ईवीएम खराब रही, जिसकी वजह से लोग कतारों में खड़े-खड़े थक गए। 152 सीटों पर हो रहे इस मतदान में शाम 5 बजे तक रिकॉर्ड 90 प्रतिशत वोटिंग हुई, लेकिन आयोग की मशीनें कई जगह दगा दे गईं। क्या यही चुनाव आयोग की वह ‘खास तैयारी’ थी जिसका ढोल पीटा जा रहा था? बंगाल चुनाव 2026 का यह अव्यवस्थित मंजर इस बात का सबूत है कि BJP के पक्ष में माहौल बनाने के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग तो किया गया, लेकिन बुनियादी इंतजाम भी ठीक नहीं किए गए।

बीजेपी की साजिशों पर भारी पड़ेगा ममता का जादू

सच तो यह है कि BJP चाहे जितने भी नाटक कर ले या जितनी भी साजिशें रच ले, बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी का जादू खत्म होने वाला नहीं है। मुर्शिदाबाद की हिंसा और मतदाताओं के नाम काटने जैसे हथकंडे साफ बताते हैं कि BJP विपक्ष को रोकने के लिए हर रास्ता अपना रही है। फिर भी बंगाल की जनता ने मन बना लिया है कि वहां टीएमसी की ही सरकार आएगी। बंगाल चुनाव 2026 का पहला चरण खत्म होते ही यह तय हो गया है कि दिल्ली से चाहे कितनी भी ताकत लगा दी जाए, बंगाल में ‘खेला’ तो दीदी ने ही कर दिया है।


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