End of AAP

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End of AAP: आम आदमी पार्टी अब खत्म हो गई है। जी हां, आपने सही सुना। वो पार्टी जो जमीन से उठकर अपने दम पर बनी थी, वो पार्टी जो अन्ना हजारे के आंदोलन से निकली और दिल्ली तथा पंजाब की सत्ता तक पहुंची, आज पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। अब आप का बाहर से बस नाम बचा है, लेकिन अंदर से पूरी तरह खोखली हो चुकी है। और ये सब किया धरा है बीजेपी का। बीजेपी ने आप को खत्म करने का खेल बहुत सोच समझकर खेला।

इन दो आप नेताओं ने दिया बीजेपी का साथ (End of AAP)

और इस काम में उसका साथ दिया विभीषण और मंथरा ने। राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी को अंदर से तोड़ने में बीजेपी का भरपूर साथ दिया। यही दो लोग हैं जिन्होंने पार्टी के अंदर रहकर उसे कमजोर करने का काम किया। स्वाति तो लंबे समय से खुलकर आप का विरोध कर रही थीं। लेकिन राघव चड्ढा ने अंदर ही अंदर पार्टी को खोखला किया। धीरे धीरे दीमक की तरह खाते रहे उसे। और अंत में जब कुछ नहीं बचा तो पार्टी का साथ छोड़ दिया।

किसी की सगी नहीं बीजेपी

आज इन दो लोगों को लग रहा होगा कि इन्होंने बहुत बड़ा तीर मारा है। बीजेपी ज्वाइन करके ये लोग बड़े ऊंचे बन गए हैं। लेकिन इन्हें ये नहीं पता कि भारतीय जनता पार्टी किसी की सगी नहीं है। वो सिर्फ काम निकलवाना जानती है। जो पार्टी अपने ही नेताओं की सगी नहीं हुई वो दूसरी पार्टी के बागी (End of AAP) नेताओं के साथ क्या अच्छा करेगी भला। पर स्वाति और राघव चड्ढा जैसे नेताओं को अभी ये बात नहीं समझ आ रही है। अभी वो पूरे जोश में हैं। बीजेपी ने उन्हें ऐसी चाभी कसी है कि वो कुछ और सोचने समझने की ताकत ही खो बैठे हैं। और यही बीजेपी की असली चाल है।

बहुत पहले हो गई थी प्लानिंग

बीजेपी ने बहुत पहले ही प्लानिंग कर ली थी इस सब की। आप (End of AAP) को तोड़ने के लिए बीजेपी ने बहुत बड़ा खेल खेला। सबसे पहले शुरू किया नेताओं की गिरफ्तारी से। एक एक करके फर्जी केस लगाए। मनीष सिसोदिया को जेल भेज दिया, संजय सिंह को जेल भेजा और आखिर में पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को भी जेल भेज दिया। बाद में सारे आरोप खारिज हो गए, सब बरी हो गए। मतलब साफ था कि गिरफ्तारी सिर्फ पार्टी को कमजोर करने और तोड़ने के लिए की गई थी।

गिरफ्तारी तक नहीं सीमित था प्लान

बीजेपी की चाल सिर्फ गिरफ्तारी तक नहीं सीमित थी। बीजेपी ने कई साल पहले से ही आप (End of AAP) के अंदर फूट डालने का काम शुरू कर दिया। राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल जैसे नेताओं को तोड़ने में कामयाब हो गई। पार्टी के अंदर बगावत करवाई, उन्हें बागी बना दिया। प्रलोभन दिए, दबाव बनाया और आखिरकार उन्हें अपनी तरफ मिला लिया। स्वाति मालीवाल पहले ही बागी हो चुकी थीं, अब राघव चड्ढा भी हो गए।

राघव चड्ढा ने किया ये ऐलान

24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान कर दिया कि वे आप छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। सिर्फ वे अकेले नहीं, उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल और आप के राज्यसभा के दो तिहाई सांसद यानी 7 से 8 सांसद सब बीजेपी में विलय हो रहे हैं। राघव चड्ढा ने खुद कहा कि हम दो तिहाई सदस्य हैं इसलिए एंटी डिफेक्शन कानून भी लागू नहीं होगा। स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता लंबी लिस्ट है। ये सारे चेहरे अब बीजेपी के हो चुके हैं।

ये था पूरा खेल

बीजेपी का खेल (End of AAP) एकदम साफ दिख रहा है। पहले गिरफ्तारी, फिर ईडी सीबीआई का डर, फिर अंदरूनी फूट डालो और आखिर में पूरी पार्टी को निगल लो। आप जैसी पार्टी को उन्होंने बिल्कुल खोखला कर दिया। केजरीवाल जेल से बाहर आए तो देखा कि उनकी अपनी पार्टी के बड़े चेहरे ही विद्रोह कर चुके थे। पहले आप दिल्ली और पंजाब में सरकार चला रही थी लेकिन अब हाल देखिए। दिल्ली से सत्ता तो छिनी ही, अब पंजाब में भी हाल खराब है। इधर अब राज्यसभा में भी बहुमत चला गया।

लेकिन ये सिर्फ एक पार्टी का अंत (End of AAP) नहीं है। ये दिखाता है कि बीजेपी विपक्ष की छोटी बड़ी किसी भी पार्टी को बर्दाश्त नहीं करती। विपक्षी पार्टियों को ईडी सीबीआई का डर दिखाकर, उनके नेताओं को धमकाकर, लालच देकर तोड़ती है। इनका यही फॉर्मूला है। पहले कमजोर करो, फिर फोड़ो, फिर निगल लो। आप पर यही फॉर्मूला लागू हुआ।

अब क्या करेंगे केजरीवाल?

अब सवाल उठ रहा है कि आप के बचे खुचे नेता क्या करेंगे। केजरीवाल अकेले कितना लड़ पाएंगे। जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी थी आज खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी हुई है और उसके ही नेता बीजेपी में जा रहे हैं। ये आम आदमी पार्टी के लिए बिल्कुल भी अच्छी खबर नहीं है। ये खतरे के संकेत हैं। अब देखना होगा कि केजरीवाल इस भारी विद्रोह के बाद भी अपनी पार्टी (End of AAP) को संभाल लेते हैं या फिर इसी के साथ आम आदमी पार्टी का दी एंड हो जाता है।


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