Madhu Kishwar

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Madhu Kishwar आजकल कानूनी पचड़ों और विवादों के केंद्र में हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे प्रबल समर्थक मानी जाने वाली Madhu Kishwar के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है। मामला एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसने न केवल एक साधारण परिवार की निजता का उल्लंघन किया, बल्कि देश के संवैधानिक पदों की गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजी वीडियो को राजनीतिक रंग देने का आरोप

इस पूरे विवाद की जड़ में एक वीडियो है, जिसे Madhu Kishwar ने अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर साझा किया था। इस वीडियो में एक महिला अपने पति की मसाज करती नजर आ रही है, लेकिन Madhu Kishwar ने इसे बेहद आपत्तिजनक संदर्भ में पेश किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “महक बहना बाकी के 8 वीडियो भी तो शेयर करो।” बाद में जांच में खुलासा हुआ कि यह वीडियो किसी राजनेता का नहीं, बल्कि एक सिख ट्रैवल ब्लॉगर जसपाल सिंह सराय और उनकी पत्नी प्रदीप कौर ढिल्लन का था।

चंडीगढ़ पुलिस की दिल्ली में दबिश

अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल होते देख इस सिख दंपत्ति ने चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज कराई। इसके परिणामस्वरुप 20 अप्रैल को चंडीगढ़ पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली के सरिता विहार स्थित Madhu Kishwar के कार्यालय पहुंची। पुलिस ने वहां उन्हें नोटिस थमाकर जांच में शामिल होने का आदेश दिया है। सोशल मीडिया पर पुलिस की इस कार्रवाई के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें Madhu Kishwar पुलिस अधिकारियों से बहस करती नजर आ रही हैं।

पुराने रिश्तों में आई कड़वाहट और संगीन दावे

आपको बता दें कि Madhu Kishwar कभी मोदी जी के लिए एक अभेद्य ढाल की तरह खड़ी रहती थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर किताबें लिखीं और उनके पक्ष में जमकर प्रचार किया। लेकिन हाल के वर्षों में Madhu Kishwar ने पाला बदल लिया और प्रधानमंत्री पर ऐसे संगीन और निजी आरोप लगाए जिन्हें सार्वजनिक रूप से दोहराना भी कठिन है। कभी उनके बेडरूम तक की खबरें रखने का दावा करने वाली यह महिला आज उनके चरित्र पर सवाल उठा रही है।

गिरफ्तारी न होने पर उठते सवाल

जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि Madhu Kishwar के खिलाफ अब तक सिर्फ नोटिस की कार्रवाई ही क्यों हुई है? लोगों का तर्क है कि यदि कोई सामान्य नागरिक प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसे घिनौने दावे करता, तो वह अब तक सलाखों के पीछे होता। Madhu Kishwar की गिरफ्तारी न होना कई संदेह पैदा करता है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक सत्ता के करीब रहने के कारण उनके पास कुछ ऐसी संवेदनशील जानकारियां हो सकती हैं, जो सरकार के लिए मुसीबत बन सकती हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी और ‘गले की फांस’ वाली राजनीति

सिर्फ Madhu Kishwar ही नहीं, बल्कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी लगातार अपनी ही सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखे हमले कर रहे हैं। स्वामी ने तो अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यक्तिगत स्तर पर ऐसे दावे किए हैं जो किसी भी सरकार को हिला सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन पुराने करीबियों को गिरफ्तार करना मोदी सरकार के लिए ‘गले की फांस’ बन सकता है। शायद यही वजह है कि Madhu Kishwar और स्वामी जैसे दिग्गजों पर कानूनी शिकंजा कसने में प्रशासन बहुत सावधानी बरत रहा है, लेकिन सवाल वही है कि क्यों नहीं इनलोगों को सीधे गिरफ्तार किया जा सकता है?


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