Arvind Kejriwal

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Arvind Kejriwal: आज अरविंद केजरीवाल का समय बहुत बुरा चल रहा है। एक-एक करके उनके पुराने साथी उनका साथ छोड़ रहे हैं। जो लोग उनके सबसे करीबी थे, वो अब उन्हें धोखा दे रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग केजरीवाल पर संवेदना जता रहे हैं कि भाई, बहुत मुश्किल समय है। लेकिन दूसरी तरफ बहुत से लोग कह रहे हैं कि ये तो कर्मों के फल हैं। जो उन्होंने दूसरों के साथ किया, वही अब उनके साथ हो रहा है। जैसे केजरीवाल ने अन्ना हजारे को धोखा दिया, वैसे ही अब उनके भी पुराने साथी उन्हें धोखा दे रहे हैं।

अन्ना हजारो को Arvind Kejriwal ने दिया धोखा

वैसे तो बहुत से लोग मानते हैं कि अन्ना हजारे को केजरीवाल ने धोखा दिया। पर कुछ लोग ये भी कहते हैं कि केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने वही किया, जो उन्हें करना चाहिए था। इसमें कोई धोखा नहीं था। अब कौन सही है और कौन गलत, ये तो हम नहीं बता सकते। लेकिन हम आपको केजरीवाल के जमीन से उठने की वो कहानी जरूर बता सकते हैं, जिसमें उन्होंने अन्ना हजारे को इस्तेमाल किया।

2011 का वो आंदोलन

इस सबकी शुरुआत हुई थी 2011 से। 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन चला था। इस आंदोलन के मुख्य चेहरा थे अन्ना हजारे। वे भूख हड़ताल कर रहे थे और जन लोकपाल बिल की मांग कर रहे थे, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे। लेकिन इस आंदोलन के पीछे का असली दिमाग अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) था। केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण जैसे लोग टीम में थे। केजरीवाल ने ही अन्ना हजारे को महाराष्ट्र से लाकर आंदोलन का मुख्य चेहरा बनाया।

घर से दिल्ली लाए गए अन्ना

अन्ना को दिल्ली लाया गया, और आंदोलन बहुत बड़ा हो गया। जंतर मंतर, रामलीला मैदान पर लाखों लोग जमा हुए।अब ये आंदोलन तो जोरदार हुआ, लेकिन लोकपाल बिल पूरी तरह नहीं बन पाया। आंदोलन के बाद सवाल उठा अब आगे क्या करें। अन्ना हजारे का स्टैंड बहुत साफ था। वे कहते थे कि राजनीति गंदी है। मैं राजनीति में नहीं जाऊंगा। सिर्फ आंदोलन के जरिए सिस्टम को बदलना है। लेकिन केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और उनकी टीम का मानना था कि सिर्फ आंदोलन से कुछ नहीं होगा। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सत्ता में जाना जरूरी है। वे कहते थे कि सत्ता में जाकर ही असली बदलाव लाया जा सकता है।

2012 में शुरु हुए मतभेद

सितंबर 2012 में दोनों के बीच बड़ा मतभेद हो गया। अन्ना ने साफ मना कर दिया कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं बनेंगे। लेकिन केजरीवाल ने अन्ना की इच्छा के खिलाफ जाकर फैसला कर लिया। 2 अक्टूबर 2012 को गांधी जयंती के दिन आम आदमी पार्टी की घोषणा हो गई। अन्ना हजारे ने इसे अपना समर्थन नहीं दिया और केजरीवाल से पूरी तरह दूरी बना ली। इसके बाद अन्ना हजारे लगातार कहते रहे कि केजरीवाल ने उन्हें धोखा दिया है। उन्होंने कई बार खुलकर कहा कि केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने वादा किया था कि राजनीति में नहीं जाएंगे, लेकिन उन्होंने वादा तोड़ दिया। उन्होंने पूरे आंदोलन को हाइजैक कर लिया।

बाद में अन्ना ने ये भी आरोप लगाया कि केजरीवाल सत्ता और पैसे के लालच में पड़ गए। भ्रष्टाचार मुक्त भारत का मूल मिशन खत्म हो गया। लेकिन केजरीवाल ने कभी इन आरोपों पर ध्यान नहीं दिया। और आज वही सिलसिला केजरीवाल के साथ चल रहा है, जो उन्होंने हजारे के साथ किया। 2014 से लेकर अब 2026 तक एक-एक करके उनके पुराने साथी पार्टी छोड़ रहे हैं।

अब तक इन लोगों ने छोड़ी Arvind Kejriwal की पार्टी

2014 में शाजिया इल्मी गईं। 2015 में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे संस्थापक सदस्य गए। 2018 में कुमार विश्वास, आशुतोष, आशीष खेतान गए। 2019 में पंजाब में एच एस फुल्का और सुखपाल सिंह खैरा गए। 2025 में दिल्ली चुनाव से पहले नरेश यादव, भावना गौड़, राजेश ऋषि समेत 5 विधायकों ने इस्तीफा दिया।

और अब अप्रैल 2026 में राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने केजरीवाल का साथ छोड़ दिया और भाजपा में चले गए। अब कुछ लोग संवेदना जता रहे हैं कि केजरीवाल अकेले पड़ गए हैं। लेकिन बहुत से लोग हंसकर कह रहे हैं कि ये तो वही हो रहा है जो उन्होंने (Arvind Kejriwal) अन्ना हजारे के साथ किया था। गुरु को धोखा दिया, अब शिष्य उन्हें धोखा दे रहे हैं। जैसा बोया, वैसा काट रहे हैं।


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