Crime Against Dalits

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Crime Against Dalits: मोदी सरकार बार-बार कहती है कि दलितों का उत्थान हो रहा है, उनके लिए सब कुछ किया जा रहा है। लेकिन NCRB के आंकड़े इस दावे को पूरी तरह झुठला रहे हैं। मोदी राज में दलितों के खिलाफ अत्याचार लगातार बढ़ रहा है। देखिए आंकड़े: 2020 में SC वर्ग के खिलाफ अपराध के 50,291 मामले दर्ज हुए। 2021 में 50,900 मामले, 2022 में 57,582 मामले, 2023 में 57,789 मामले और 2024 में 55,698 मामले दर्ज हुए। यानी 10 साल में SC के साथ अपराधों में काफी बढ़ोतरी हुई है।

2014 से अपराधों में हुई बढ़ोतरी (Crime Against Dalits)

2014 में जहां 40,401 मामले थे, वहीं 2023 तक ये 57,789 तक पहुंच गए। पूरे 10 साल में कुल 4 लाख 68 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।ST वर्ग के भी हालात अच्छे नहीं हैं। 2020 में 8,272 मामले, 2022 में 10,064, 2023 में 12,960 और 2024 में 9,966 मामले दर्ज हुए हैं। और राज्यों के आधार पर आंकड़े देखें तो यहां भी यूपी ने टॉप किया है। ठीक उसी तरह जैसे महिलाओं के खिलाफ अपराध में टॉप पर है।

यूपी सबसे आगे है

आंकड़े बताते हैं कि 2024 में दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध (Crime Against Dalits) उत्तर प्रदेश में हुए। कुल 11,891 मामले। उसके बाद मध्य प्रदेश (7,765), बिहार (7,549), राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य हैं। गौर कीजिएगा, ये सारे राज्य वो हैं जहां बीजेपी की सरकारें हैं। जहां-जहां बीजेपी है, वहां-वहां दलितों का हाल बेहाल है। दलितों के साथ खूब अत्याचार हो रहे हैं।

ये सिर्फ नंबर नहीं हैं। ये हजारों दलित (Crime Against Dalits) परिवारों की चीख, त्रासदी और न्याय की बेसब्री हैं। हर दिन किसी न किसी दलित युवक या महिला के साथ अत्याचार हो रहा है। मारपीट, बलात्कार, सामाजिक बहिष्कार, जमीन छीनना। ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

इसीलिए जातिगत जनगणना से भाग रही मोदी सरकार

सवाल ये है कि मोदी सरकार इन अपराधों को रोकने के लिए क्या कर रही है? जवाब है, लगभग कुछ नहीं। बल्कि ऐसा लगता है कि सरकार शायद ऐसा चाहती ही है। तभी तो वो जातिगत जनगणना करने से इतना भाग रही है। राहुल गांधी लगातार कह रहे हैं कि देश में जातिगत जनगणना होनी चाहिए। इससे पता चलेगा कि दलित, पिछड़े, आदिवासी कितनी आबादी में हैं और उन्हें कितना हक मिल रहा है। लेकिन मोदी सरकार इसे टाल रही है। क्यों? क्योंकि अगर जातिगत जनगणना हो गई तो दलितों को उनका असली हक मिल जाएगा।

शिक्षा, नौकरी, संसाधनों में उनका हिस्सा बढ़ जाएगा। वे आगे बढ़ जाएंगे। और जब वे आगे बढ़ जाएंगे तो उन पर अत्याचार (Crime Against Dalits) करना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार जातिगत जनगणना से डरती है।मोदी जी सबका साथ, सबका विकास का नारा तो बहुत देते हैं, लेकिन जब दलितों की बात आती है तो विकास का मतलब सिर्फ फोटो खिंचवाना और भाषण देना रह जाता है। असल में न तो अपराध रुक रहे हैं, न न्याय मिल रहा है।

बीजेपी इस मुद्दे पर रहती है चुप

जो राज्य दलितों के खिलाफ अत्याचार में टॉप पर हैं, वहां बीजेपी की सरकारें हैं। फिर भी सरकार चुप है। SC-ST एक्ट को कमजोर करने की कोशिश होती है, लेकिन अपराधियों पर सख्ती नहीं होती।अब दलित समाज को समझना होगा कि उनके नाम पर सिर्फ वोट लिया जा रहा है। उन्हें शिक्षा, जमीन, सुरक्षा और सम्मान नहीं दिया जा रहा। राहुल गांधी जातिगत जनगणना की मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि इससे दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज को असली न्याय मिल सकता है। पर मोदी सरकार इससे भाग रही है।

दलितों के साथ क्यों नहीं रुक रहे अत्याचार?

ऐसा लगता है कि सरकार दलितों को कमजोर और डरा हुआ रखना चाहती है, ताकि वे हमेशा वोट बैंक बने रहें। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक ये अत्याचार (Crime Against Dalits) चलते रहेंगे। दलित समाज को अब मोदी सरकार से सवाल करना चाहिए कि 12 साल में दलितों के खिलाफ अपराध क्यों बढ़े? जातिगत जनगणना से क्यों डर रहे हैं? क्या दलितों को उनका हक देने से आपकी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी?


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