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Odisha में बीजेपी सरकार को आए अभी 2 साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन राज्य में जंगलराज चरम पर पहुंच गया है। जिस प्रदेश को कभी नवीन पटनायक की बीजेडी सरकार के दौरान शांत राज्यों की सूची में सबसे ऊपर रखा जाता था, आज वहां की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। ताजा मामला भुवनेश्वर के पास का है, जहां रेलवे पुलिस के एक जवान सौम्य रंजन स्वाइन को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।

सौम्य रंजन कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि खाकी वर्दी पहनने वाले एक सिपाही थे, लेकिन Odisha के बेखौफ गुंडों के लिए उनकी जान की कोई कीमत नहीं थी। घटना के समय पुलिस बल मूकदर्शक बना रहा, जिससे साफ पता चलता है कि राज्य में अब पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है।

मामूली विवाद और मौत का तांडव

सौम्य रंजन अपने दोस्त ओम प्रकाश राउत के साथ आधिकारिक कार्य के लिए बाइक से एक वरिष्ठ अधिकारी से मिलने जा रहे थे। रास्ते में स्थानीय लोगों के साथ उनकी मामूली कहासुनी हुई, जिसे महिलाओं पर टिप्पणी का रंग देकर तनाव बढ़ा दिया गया। इसके बाद Odisha की उस पत्थर दिल भीड़ ने उन्हें पकड़कर एक खंभे से बांध दिया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि सौम्य रंजन अपनी जान की भीख मांग रहे हैं, लेकिन हमलावर उन्हें तब तक मारते रहे जब तक उनके प्राण नहीं निकल गए।

विधानसभा में जंगलराज की गवाही

यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि Odisha की बीजेपी सरकार ने जैसे राज्य को अराजकता के हवाले कर दिया है। खुद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 9 मार्च 2026 को विधानसभा में जो आंकड़े पेश किए, वे इस जंगलराज की पुष्टी करते हैं। मुख्यमंत्री ने सदन में स्वीकार किया कि जून 2024 में बीजेपी सरकार आने के बाद से अब तक Odisha में 54 सांप्रदायिक दंगे और 7 मॉब लिंचिंग के मामले दर्ज किए गए हैं। सौम्य रंजन के मामले को मिलाकर अब यह संख्या 8 हो चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा हिंसा बालासोर और खुर्दा जैसे जिलों में देखी गई है।

महिलाओं के लिए असुरक्षित होता प्रदेश

हिंसा का यह खेल सिर्फ दंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि Odisha में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बीजेपी सरकार के शुरुआती 14 महीनों के डेटा के अनुसार, राज्य में महिलाओं के खिलाफ कुल 37,611 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें 2,933 दुष्कर्म और 9,181 छेड़छाड़ की घटनाएं शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि आज Odisha सार्वजनिक स्थानों पर यौन उत्पीड़न के मामले में देश में टॉप पर पहुंच गया है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है।

बढ़ती अपराध दर और असुरक्षित शहर

अगर अपराध दर की बात करें, तो 2024 के मुकाबले 2025 में Odisha में कुल अपराधों में 7.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अकेले राजधानी भुवनेश्वर में यह आंकड़ा 8.6 प्रतिशत को पार कर गया है। चोरी, लूटपाट और डकैती अब आम बात हो गई है और राज्य का कोई भी कोना अब सुरक्षित नहीं बचा है। जनता यह पूछने पर मजबूर है कि आखिर अपराधियों को किसका संरक्षण प्राप्त है कि वे सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

आदिवासियों पर दमन और सत्ता का अहंकार

सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि Odisha के दूर-दराज के इलाकों में भी दमन का दौर जारी है। अप्रैल 2026 में रायगढ़ा के सिजीमाली माइनिंग प्रोजेक्ट के दौरान अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रहे आदिवासियों पर सुरक्षा बलों ने बर्बरता से लाठियां भांजीं, जिसमें 70 से ज्यादा लोग घायल हुए। सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों की आवाज को कुचलने में लगी है, जबकि शहरों में भीड़ को खुला छोड़ दिया गया है कि वे जिसे चाहें अपनी अदालत लगाकर मौत के घाट उतार दें।

विफलता का पर्याय बनती सरकार

चाहे क्योंझर में चर्च में हुई तोड़फोड़ हो या फिर बीच सड़क पर होने वाली लिंचिंग, Odisha की बीजेपी सरकार हर मोर्चे पर फेल नजर आ रही है। मुख्यमंत्री का विधानसभा में आंकड़ों को स्वीकार कर लेना ही काफी नहीं है, जनता ठोस कार्रवाई चाहती है। अगर राज्य में एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? आज Odisha का हर नागरिक इस हिंसा के मॉडल और सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रहा है।


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