Rahul Gandhi
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Rahul Gandhi ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार और प्रधानमंत्री की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। नेता विपक्ष Rahul Gandhi का मानना है कि देश आज जिस आर्थिक और ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है, वह सरकार की दूरदर्शिता की कमी का परिणाम है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को एक ‘कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम’ करार दिया।
Rahul Gandhi के अनुसार, 12 साल के शासन के बाद देश को इस मुकाम पर ला खड़ा किया गया है जहां सरकार अब जनता को यह बता रही है कि उसे क्या खाना चाहिए, क्या खरीदना चाहिए और कहां घूमना चाहिए। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री द्वारा सिकंदराबाद में दी गई नसीहतें असल में उनकी अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का एक तरीका मात्र हैं।
चुनावी रैलियों में व्यस्त रही सरकार
जब पूरी दुनिया और भारत के पड़ोसी देश मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध और उससे पैदा होने वाले आर्थिक संकट से निपटने की रणनीति बना रहे थे, तब मोदी सरकार का पूरा ध्यान पांच राज्यों के चुनावी गणित और रैलियों पर था। Rahul Gandhi और कांग्रेस पार्टी लगातार चेतावनी दे रहे थे कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
लेकिन सरकार इन चेतावनियों को अनसुना कर बंगाल और अन्य राज्यों में ध्रुवीकरण की राजनीति और प्रचार में व्यस्त रही। आज जब संकट गहरा गया है, तो Rahul Gandhi की वे भविष्यवाणियां सच साबित हो रही हैं जिन्हें सरकार ने वक्त रहते गंभीरता से नहीं लिया था।
जनता से त्याग की अपील और विरोधाभास
सिकंदराबाद की रैली में प्रधानमंत्री ने जनता से पेट्रोल-डीजल कम जलाने, सोना न खरीदने और खाद्य तेल के इस्तेमाल में 10 प्रतिशत की कटौती करने की जो अपील की है, उसे Rahul Gandhi ने जनता पर बोझ डालना बताया है। एक तरफ प्रधानमंत्री जनता से सादगी और त्याग की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद 11 मई को सोमनाथ मंदिर में सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ रोड शो करते नजर आए।
Rahul Gandhi ने इसी विरोधाभास को रेखांकित करते हुए सवाल उठाया है कि क्या नियम और देशभक्ति की परिभाषा सिर्फ आम आदमी के लिए है, जबकि सत्ता में बैठे लोग विलासिता का आनंद ले रहे हैं?
प्रधानमंत्री का विदेशी दौरा और तंज
प्रधानमंत्री ने जनता से अपील की है कि वे अभी विदेश घूमने न जाएं ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सके और शादियां भी देश में ही करें। लेकिन Rahul Gandhi की ओर से उठाए गए सवालों के बीच यह खबर भी प्रमुख है कि प्रधानमंत्री खुद 15 से 19 मई के बीच नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे ठंडे देशों के आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं।
Rahul Gandhi के समर्थकों और विपक्ष का तर्क है कि जब देश भीषण गर्मी और आर्थिक दबाव झेल रहा है, तब प्रधानमंत्री का विदेशी दौरा उनकी अपनी ही अपीलों के विपरीत नजर आता है। ताइवानी मशरूम से लेकर महंगे विदेशी दौरों तक, प्रधानमंत्री की जीवनशैली पर Rahul Gandhi ने कड़ा प्रहार किया है।
किसानों और मध्यम वर्ग पर नया संकट
प्रधानमंत्री द्वारा खाद का इस्तेमाल कम करने और मेट्रो में सफर करने की सलाह को भी राहुल गांधी ने किसान विरोधी और मध्यम वर्ग के लिए अपमानजनक बताया है। खेती-किसानी के लिए खाद एक बुनियादी जरूरत है और उसमें कटौती का सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
Rahul Gandhi का कहना है कि सरकार अपनी गलत नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई और आपूर्ति की कमी का सारा दोष अब किसानों और आम लोगों के मत्थे मढ़ रही है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इसे सरकार की जवाबदेही से बचने का एक सुरक्षित रास्ता करार दिया है, जिससे आम आदमी का जीवन और भी कठिन हो जाएगा।
नेतृत्व की क्षमता पर गंभीर सवाल
अंत में, Rahul Gandhi ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश चलाना अब मौजूदा नेतृत्व के बस की बात नहीं लग रही है। राहुल गांधी ने जनता को याद दिलाया कि कैसे चुनाव के समय ‘मंगलसूत्र’ बचाने के दावे किए गए थे, लेकिन आज उसी सोने को न खरीदने की हिदायत दी जा रही है।
राहुल गांधी के मुताबिक, एक सक्षम सरकार वह होती है जो आने वाले संकटों का पहले से आकलन करे और जनता को सुरक्षा प्रदान करे, न कि वह जो संकट आने पर हाथ खड़े कर दे और जनता से ही अपनी बुनियादी जरूरतें कम करने को कहे। अब देखना यह है कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए इन ज्वलंत सवालों का सरकार क्या ठोस जवाब देती है।
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