NEET Exam 2026
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NEET Exam 2026 की तैयारी में जुटे देशभर के 23 लाख परीक्षार्थियों के लिए आज का दिन किसी काले सपने से कम नहीं है। 3 मई को जब ये छात्र भारी उम्मीदों के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे, तब उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी साल भर की मेहनत का सौदा चंद पैसों के लिए पहले ही किया जा चुका है।
12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक तौर पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला सुनाया, जिसके बाद लाखों परिवारों की उम्मीदें टूट गई हैं। राजस्थान एसओजी द्वारा जयपुर से मनीष नाम के आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ ‘क्वेश्चन बैंक’
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि NEET Exam 2026 का पेपर छपने से पहले ही नकल माफियाओं के हाथ लग चुका था। जीव विज्ञान के 90 और रसायन विज्ञान के 35 सवाल हूबहू वही थे जो परीक्षा में पूछे गए। इस गिरोह ने लाखों रुपये लेकर चुनिंदा छात्रों को ‘क्वेश्चन बैंक’ उपलब्ध कराया था।
अब इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है और सरकार ने परीक्षा दोबारा कराने के साथ-साथ छात्रों की फीस वापस करने का वादा किया है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या सरकार उन छात्रों का मानसिक तनाव और कीमती समय वापस कर पाएगी जिन्होंने इस परीक्षा के लिए दिन-रात एक कर दिया था।
विवादों का पुराना नाता और NTA की साख पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब चिकित्सा प्रवेश परीक्षा विवादों के घेरे में आई है। अगर इतिहास देखें तो 2016 में भी व्यवस्था की खामियों के चलते परीक्षा दो चरणों में करानी पड़ी थी। वहीं, 2024 में एक ही सेंटर से कई टॉपर्स निकलने और पटना-हजारीबाग में पेपर लीक के सबूतों ने काफी तूल पकड़ा था, लेकिन तब छोटे स्तर पर कार्रवाई कर मामले को शांत कर दिया गया। NEET Exam 2026 ने तो धांधली के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पेपर लीक का स्तर इतना व्यापक था कि सरकार के पास पूरी परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
राहुल गांधी का हमला: “भविष्य की नीलामी”
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में NEET Exam 2026 और जेईई मेंस जैसी कुल 89 महत्वपूर्ण परीक्षाएं लीक हुई हैं। उनके अनुसार, 48 बार परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करना पड़ा है, जो सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य की नीलामी है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार हर बार कड़े कदम उठाने के खोखले वादे करती है, लेकिन धरातल पर नतीजे शून्य रहते हैं। NEET Exam 2026 के रद्द होने से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि सिस्टम में छेद बहुत गहरे हैं।
सख्त कानून के बावजूद बेखौफ माफिया
हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024’ जैसा सख्त कानून बनाया है, जिसमें 10 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद NEET Exam 2026 के दौरान नकल माफिया इतने बेखौफ नजर आए कि वे सीधे प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंच गए। यह बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं लगता। छात्रों का मानना है कि जब तक NTA जैसी बड़ी एजेंसियों के भीतर बैठे सफेदपोशों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक NEET Exam 2026 जैसे हादसों को रोकना नामुमकिन है।
सिस्टम की हार और छात्रों का टूटता भरोसा
अंततः यह केवल एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विफलता है। 10 साल से एक ही सरकार होने के बावजूद एक ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था नहीं बन पाई जो NEET Exam 2026 को सुरक्षित रख सके। सरकार का ध्यान अक्सर राजनीतिक विरोधियों पर एजेंसियों के इस्तेमाल पर रहता है, लेकिन जब बात छात्रों के करियर की आती है तो सिस्टम पंगु नजर आता है। आज देश का हर युवा यही पूछ रहा है कि क्या अगली बार आयोजित होने वाली NEET Exam 2026 निष्पक्ष होगी या एक बार फिर उनकी मेहनत बाजार में नीलाम कर दी जाएगी।
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