Shivsena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से घमासान मचा हुआ है।

Shivsena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से घमासान मचा हुआ है।

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Shivsena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से घमासान मचा हुआ है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना में एक बार फिर फूट पड़ने की आशंका दिख रही है। इस बीच पार्टी के सीनियर नेता संजय राउत ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बागी सांसदों को सीधी चुनौती दे दी है। संजय राउत ने कहा कि अगर तुम पाला बदलना चाहते हो तो पहले इस्तीफा दे दो। तुम्हें जीत शिवसेना के चिह्न पर मिली थी, मोदी के चेहरे पर नहीं। अगर धोखा करना है तो इस्तीफा देकर जाओ।

संजय राउत ने किया बड़ा दावा (Shivsena UBT Split)

राउत ने बड़ा दावा भी किया। उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी है कि इन सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये एडवांस में दिए गए हैं। जिसके बाद वे नांदेड़ और पुणे समेत तीन जगहों से चार्टर फ्लाइट में सवार हुए। इन बागी सांसदों से आगे 50-50 करोड़ देने का वादा भी किया गया है। राउत का कहना है कि जो लोग पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं, उन्हें पार्टी से गद्दारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

शिंदे गुट का ऑपरेशन टाइगर

तो वहीं, शिंदे गुट की तरफ से इस पूरे खेल को ऑपरेशन टाइगर नाम दिया गया है। उनके दावे के मुताबिक शिवसेना युबीटी (Shivsena UBT Split) के छह सांसद अलग ग्रुप बना सकते हैं और उनके साथ आ सकते हैं। इन नामों में संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख, नागेश पाटिल, ओमराजे निंबालकर और संजय पाटिल शामिल बताए जा रहे हैं।

राउत ने कसा तंज

संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी ट्वीट कर इन बागी सांसदों पर तंज कसा है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, अपना सपना मनी मनी। महाराष्ट्र के सांसदों को 15 करोड़ रुपये ऑफर किए जा रहे हैं, जो बेहद शॉकिंग और repulsive है। संजय राउत के इस ट्वीट पर टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी तंज कसा है। उन्होंने लिखा, केवल 15 करोड़? इतने सस्ते में क्यों बिक रहे हो? हमारे यहां तो 4 करोड़ upfront और अगले 36 महीने तक हर महीने 1 करोड़ देने का ऑफर था। Honey plus Money।

बीजेपी का रणनीति साफ

जान लीजिए कि ये घटनाएं अकेली नहीं हैं। बीजेपी की रणनीति साफ दिख रही है। एक-एक करके विपक्षी पार्टियों को तोड़ना और निगल जाना। पहले उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना तोड़ी, फिर एनसीपी तोड़ी और अब फिर शिवसेना युबीटी (Shivsena UBT Split) को तोड़ने की कोशिश हो रही है।

इसी तरह बंगाल में भी ममता बनर्जी की टीएमसी के साथ यही खेल खेला जा रहा है। हाल ही में टीएमसी के कुल 28 में से 20 लोकसभा सांसद बागी हो गए हैं। ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र देकर एक छोटी पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में मर्ज होने और एनडीए को सपोर्ट करने की घोषणा कर चुके हैं। बंगाल विधानसभा में भी दर्जनों विधायकों ने बगावत की है।

बीजेपी की ये रणनीति अब साफ हो चुकी है। जहां भी विपक्षी पार्टी मजबूत हो, वहां पैसे, पद और दबाव का इस्तेमाल करके उसे कमजोर कर दो। एक-एक सांसद-विधायक को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ा लो। शिवसेना हो या टीएमसी, बीजेपी का तरीका एक ही है। पहले पार्टी के अंदर फूट डालो, फिर पैसे का लालच दो, फिर ऑपरेशन का नाम देकर सांसदों को अपनी तरफ खींच लो।

क्या बच पाएंगी ये पार्टियां?

संजय राउत कह रहे हैं कि जो लोग पार्टी के सिंबल पर जीते हैं, उन्हें गद्दारी नहीं करनी चाहिए। लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये सिलसिला कब रुकेगा? क्या हर विपक्षी पार्टी को बीजेपी निगलती ही रहेगी? महाराष्ट्र और बंगाल दोनों जगहों पर ये घटनाएं दिखा रही हैं कि लोकतंत्र में पैसे की ताकत कितनी बड़ी हो गई है। सांसद-विधायक जनता के वोट से चुने जाते हैं, लेकिन बाद में पैसे के लालच में पार्टी बदल देते हैं। अब देखना होगा कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत अपनी पार्टी को कैसे संभाल पाते हैं और बंगाल में ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से बचा पाती हैं या नहीं।


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