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BJP के अंदर एक ऐसी बगावत की चिंगारी सुलग उठी है, जिसने आलाकमान की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या मोदी-शाह का वो अटूट अनुशासन अब कांच की तरह बिखरने लगा है? जो नेता कल तक दूसरों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते थे, आज वही अपनी ही सरकार के सामने चक्काजाम और पथराव जैसी स्थितियों का कारण बन रहे हैं। मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक फैली इस कलह से अब पार्टी में सीधे-सीधे टूट का खतरा मंडराने लगा है।

दतिया बना रणक्षेत्र, पुलिस पर पथराव

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के दतिया का है, जहां BJP के सबसे कद्दावर और फायरब्रांड चेहरों में से एक, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद बवाल खड़ा हो गया है। आगामी 30 जुलाई को होने वाले दतिया विधानसभा सीट के चुनाव के लिए पार्टी ने जैसे ही नरोत्तम मिश्रा का पत्ता साफ करके आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, वैसे ही दतिया की सड़कें रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं। मिश्रा के समर्थक इस कदर भड़के कि उन्होंने न सिर्फ चक्काजाम किया, बल्कि पुलिस पर भारी पथराव भी किया। इस हिंसक झड़प में जिले के एसपी समेत 8 पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए।

दतिया में धारा 163 लागू, छावनी में बदला जिला

जो पूर्व गृह मंत्री कुछ समय पहले तक सूबे की कानून-व्यवस्था का डंडा चलाते थे, आज उन्हीं के गढ़ में कानून की धज्जियां उड़ रही हैं। हालात इतने बेकाबू हो गए कि 11 जुलाई की सुबह प्रशासन को पूरे जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू करनी पड़ गई। इसके तहत पांच लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दी गई है और बिना अनुमति के किसी भी सभा या जुलूस पर रोक है। अपनी ही पार्टी के भीतर उपजे इस आक्रोश से सहमी सरकार को पूरे दतिया को पुलिस छावनी में तब्दील करना पड़ा है।

भोपाल में हाई लेवल मीटिंग का नाटक

दतिया में मचे इस गदर के बाद नरोत्तम मिश्रा को मनाने के लिए भोपाल स्थित सीएम हाउस में रेड कारपेट बिछाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव और BJP प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में घंटों हाई लेवल मीटिंग का दौर चला। मिश्रा मीटिंग से बाहर तो आए और कैमरे के सामने एक फीकी मुस्कान के साथ यह कह भी दिया कि वे आलाकमान के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन दतिया की सड़कों पर सुलग रही आग यह साफ बता रही है कि यह सिर्फ तूफान के आने से पहले की शांति है।

बिहार में भी BJP को लगा बड़ा झटका

वैचारिक संकट और आंतरिक कलह के यह दिन सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर अब बिहार में भी देखने को मिल रहा है। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले BJP को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उसके घोषित प्रत्याशी ने अचानक मैदान छोड़ दिया और अपना नाम वापस ले लिया। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि जिस BJP के टिकट के लिए कभी नेताओं में मारामारी होती थी, आज वहां उम्मीदवार ऐन वक्त पर पीछे हट रहे हैं।

आलाकमान का रसूख पड़ा कमजोर

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि दिल्ली का जो रसूख कभी नेताओं को एक इशारे पर नचाता था, वो अब बेअसर होता दिख रहा है। मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक फैली यह बगावत साफ संकेत दे रही है कि BJP के भीतर आंतरिक असंतोष गहरा चुका है। जहां एक तरफ मनचाहा टिकट न मिलने पर पुलिस के सिर फोड़े जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी मैदान से कदम पीछे खींचे जा रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि BJP के सामने फिलहाल अपने ही कुनबे को संभालने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है।


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