Modi Government
Modi Government के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आज देश के युवाओं के सामने एक ऐसा खौफनाक सच आ खड़ा हुआ है, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं।
देश में युवाओं को बेहतर भविष्य और रोजगार के अवसर देने की बजाय, उनके हाथों में डिग्री के साथ बेरोजगारी का थप्पा थमाया जा रहा है। हमारे देश के जो बड़े-बड़े कर्णधार और नीति निर्माता हैं, उन्हें देश के आने वाले कल और भविष्य की कोई चिंता नहीं दिखती है, बल्कि वे केवल अपनी सियासत चमकाने की फिक्र में डूबे हुए हैं।
तकनीकी शिक्षा पर गहराता संकट और AICTE का कड़ा फैसला
मामला सीधे तौर पर देश के तकनीकी और इंजीनियरिंग कॉलेजों से जुड़ा हुआ है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई, जो हमारे देश में तकनीकी शिक्षा की सबसे बड़ी नियामक संस्था है, उसने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देशभर के 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेजों को पूरी तरह से बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।
जो संस्था देश के भीतर इंजीनियर, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के भविष्य को तय करती है, उसी के कार्यकाल में कॉलेजों पर ताले लटक रहे हैं। Modi Government के अंतर्गत इस कार्रवाई से यह साफ है कि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है।
सैकड़ों कोर्सेज हमेशा के लिए बंद, छात्रों के भविष्य पर लगा ठप्पा
बात सिर्फ कॉलेज बंद होने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसी दौरान देशभर के अलग-अलग तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से ज्यादा कोर्सेज को भी हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। ये वे कोर्सेज हैं जिनमें या तो छात्रों की रुचि नहीं बची थी या जिन्हें चलाने के लिए कॉलेजों के पास बुनियादी सुविधाएं और सही संसाधन ही उपलब्ध नहीं थे।
हालांकि एआईसीटीई का कहना है कि जो छात्र पहले से वहां पढ़ रहे हैं, उन्हें अंतिम बैच पास होने तक बीच में नहीं छोड़ा जाएगा, लेकिन उन युवाओं के मानसिक तनाव का क्या, जिनके संस्थानों पर Modi Government की लचर नीतियों के कारण बंद होने का ठप्पा लग चुका है।
सरकारी स्कूलों की बदहाली और उत्तर प्रदेश में तालाबंदी का सच
उच्च शिक्षा के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा का सच भी बेहद डरावना है। पिछले 10 सालों में देशभर के भीतर करीब 93,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। यदि सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात की जाए, तो वहां 27 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने यानी दूसरे स्कूलों में मर्ज करने के आदेश थमा दिए गए हैं।
Modi Government के इस दौर में करोड़ों गरीब बच्चे आज सरकारी स्कूलों की चौखट छोड़ चुके हैं। देश की पूरी बुनियादी शिक्षा व्यवस्था लगातार खोखली और कमजोर होती जा रही है, जिससे ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी से युवाओं में आक्रोश
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में इस पूरे सिस्टम ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। कभी नीट (NEET) से लेकर नेट (NET) तक की बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के पेपर लीक कराकर करोड़ों होनहार युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया जाता है, तो कभी यूनिवर्सिटी के परीक्षा पेपरों के बंडल्स ही रहस्यमयी तरीके से चोरी हो जाते हैं।
Modi Government के इसी लचर सिस्टम की नाकामी ने आज देश के करोड़ों शिक्षित युवाओं को सड़कों पर धक्के खाने के लिए मजबूर कर दिया है। युवाओं में परीक्षा प्रणाली की शुचिता को लेकर भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
सियासत और प्राथमिकताओं पर उठते गंभीर सवाल
इन सब हालातों को देखकर साफ हो जाता है कि Modi Government को इस देश की शिक्षा व्यवस्था और यहां के गरीब तथा मिडिल क्लास बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से कोई सरोकार नहीं रह गया है। हमारे प्रधानमंत्री जी को सिर्फ और सिर्फ अपनी आलीशान विदेश यात्राओं की चिंता रहती है कि कब किस देश का दौरा करना है, तो वहीं देश के गृहमंत्री अपने बेटे के क्रिकेट करियर को संवारने में व्यस्त दिखाई देते हैं।
अंततः देखा जाए तो Modi Government के राज में केवल अपने करीबियों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है और देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की रत्ती भर भी परवाह नहीं की जा रही है।
Also Read
Modi Government के राज में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में भारी गिरावट, वैश्विक छवि पर उठे सवाल
मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
