Modi Government
Modi Government के दावों और कड़वी जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। जो लोग कल तक भारत को विश्वगुरु बनाने का ढिंढोरा पीट रहे थे, आज ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट सुनकर उनके दावों की हवा निकल जाएगी। इस नई रिपोर्ट ने तथाकथित ‘अमृतकाल’ के गुब्बारे की हवा निकाल कर रख दी है। दावे तो ऐसे किए जाते हैं जैसे पूरी दुनिया हमारे सामने पलकें बिछाए खड़ी है, लेकिन हकीकत यह है कि हमारा पासपोर्ट आज दुनिया के टॉप 100 देशों की लिस्ट में शामिल होने के लिए भी तरस रहा है।
वैश्विक रैंकिंग में लगातार पिछड़ता भारत
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रैंकिंग में भारत खिसककर सीधे 125वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल यानी 2025 में हम 124वें नंबर पर थे। उम्मीद थी कि देश आगे बढ़ेगा, लेकिन Modi Government की नीतियों के चलते बिल्कुल उल्टा हुआ है। आज भारतीय पासपोर्ट पर केवल 26 देशों में ही बिना वीजा के जाने की सुविधा मिलती है। शर्म की बात तो यह है कि जो Modi Government आज दुनिया का नेतृत्व करने की बातें करती है, उसका पासपोर्ट आज नामीबिया से नीचे और फिलीपींस, मोरक्को तथा उज्बेकिस्तान जैसे देशों से भी पीछे खड़ा है।
इन तीन पैमानों पर फेल हुई सरकार
आखिर इस वैश्विक इंडेक्स को तय कैसे किया जाता है, इसे भी समझना जरूरी है। इसे जारी करने वाली संस्था मुख्य रूप से तीन आधार देखती है। पहला है घूमने की आज़ादी यानी मोबिलिटी, जिसमें भारत का स्थान बेहद निराशाजनक यानी 136वां है। दूसरा पैमाना निवेश के अवसर और तीसरा देश का जीवन स्तर यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ है। इन तीनों ही मोर्चों पर Modi Government की नाकामी ने देश की रैंकिंग को भारी नुकसान पहुंचाया है।
कूटनीति और विदेश नीति को लगा झटका
जानकारों का मानना है कि Modi Government की कमजोर विदेश नीति और देश के भीतर बढ़ती सांप्रदायिक राजनीति ने भारत की वैश्विक छवि को अंदर से पूरी तरह प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़े-बड़े आयोजनों के बावजूद जमीनी स्तर पर भारतीय नागरिकों के लिए विदेशी यात्राओं और मोबिलिटी के रास्ते आसान नहीं हो पा रहे हैं। Modi Government के पीआर स्टंट और खोखली बयानबाजी के बीच इस कड़वे सच ने देश की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनमोहन सिंह सरकार के दौर से तुलना
अब जरा तुलना कीजिए उस दौर से, जब देश में कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार हुआ करती थी और उस समय भारत का पासपोर्ट दुनिया में कितना मजबूत था। अगर हम पारंपरिक हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें, तो मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भारतीय पासपोर्ट लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ था। साल 2006 में भारत अपने इतिहास की सबसे बेहतरीन यानी 71वीं रैंकिंग पर था। उस दौर में आज की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पासपोर्ट की साख को लेकर सवाल नहीं उठते थे।
खोखले दावों बनाम मजबूत कूटनीति का सच
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के पूरे 10 साल के दौरान, चाहे साल 2008 हो या 2013, भारत का पासपोर्ट कभी भी 80वें पायदान से नीचे नहीं गिरा। वह हमेशा 71 से 77 के बीच ही घूमता रहा, जो देश की मजबूत कूटनीति और बेहतरीन छवि को दर्शाता था। उस समय दुनिया भारत की आर्थिक नीतियों और शांतिपूर्ण माहौल का सम्मान करती थी। लेकिन आज Modi Government के राज में मजबूत पासपोर्ट को लगातार नुकसान पहुंच रहा है और कथनी-करनी का यह अंतर अब देश की जनता अच्छे से समझ चुकी है।
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