Modi Government
Modi Government के बड़े-बड़े दावों, विज्ञापनों, अमृतकाल और नए भारत के सपनों के बीच देश की शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अगर आप भी अपने बच्चों को बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों को देखकर सरकारी स्कूलों या बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में भेज रहे हैं, तो रुक जाइए। क्योंकि जो Modi Government हर मंच से विकास का ढिंढोरा पीट रही है, उसके राज में पढ़ाई के मंदिरों को चुपचाप खत्म किया जा रहा है और युवाओं के हाथों में डिग्रियों की जगह बेरोजगारी का ठप्पा थमाया जा रहा है।
जानिए कि कैसे आपके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
यूडाइस प्लस रिपोर्ट का सनसनीखेज खुलासा और बंद होते स्कूल
यूडाइस प्लस की आई ताजा और सबसे लेटेस्ट रिपोर्ट ने Modi Government के दावों का जो पोस्टमार्टम किया है, उसे देखकर आपका कलेजा कांप उठेगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर रोज औसतन 13 सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। जी हां, हर दिन 13 स्कूलों पर ताला लग रहा है। आंकड़े बताते हैं कि अकेले साल 2025-26 के दौरान ही देशभर में कुल 4,791 स्कूल हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गए.
इस नाकामी में सबसे आगे खड़ा है बीजेपी का तथाकथित मॉडल राज्य मध्य प्रदेश, जहां बंद हुए कुल स्कूलों में से आधे से भी ज्यादा, यानी अकेले 2,426 स्कूल सिर्फ मध्य प्रदेश के भीतर बंद कर दिए गए। साल 2024-25 के दौरान जिस देश में 14 लाख 71 हजार 473 स्कूल हुआ करते थे, वो साल 2025-26 में घटकर महज 14 लाख 66 हजार 682 पर सिमट कर रह गए हैं। सरकार बड़े आराम से दलील दे रही है कि अनेक राज्यों में स्कूलों के आपस में विलय यानी मर्जर की वजह से यह संख्या कम दिख रही है।
बिना छात्रों के चल रहे स्कूल और सैलरी उठाते शिक्षक
लेकिन हुजूर, असलियत तो यह है कि कई राज्यों में कहने को भले ही स्कूलों की संख्या बढ़ी हो, लेकिन वहां छात्रों का नामांकन लगातार कम होता चला गया है। Modi Government के इस दौर में देश के भीतर आज 5,663 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नहीं है, यानी जीरो एनरोलमेंट है। लेकिन मजेदार बात देखिए कि इन बिना छात्रों वाले स्कूलों में 20,667 शिक्षक आराम से तैनात हैं और सरकार की तिजोरी से सैलरी उठा रहे हैं।
यह गंभीर स्थिति साफ दर्शाती है कि जमीनी हकीकत पर Modi Government का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और केवल कागजी आंकड़ों की बाजीगरी चल रही है।
उत्तर प्रदेश में जीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों का बढ़ता आंकड़ा
कुछ समय पहले तक तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार यह कह रही थी कि जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है या नामांकन नहीं है, उन्हें मर्ज किया जाएगा और ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 27 हजार बताई जा रही थी। लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। योगी जी के राज में पिछले सत्र में बिना एडमिशन वाले स्कूलों की संख्या जहां महज 81 थी, वहीं 2025-26 के सत्र में यह संख्या घटने के बजाय बढ़कर सीधे 313 पहुंच गई।
इतना ही नहीं, जिन स्कूलों में कोई बच्चा पढ़ने ही नहीं आ रहा है, वहां खाली बैठे शिक्षकों की फौज भी 56 से बढ़ाकर 177 कर दी गई। आखिर Modi Government और प्रांतीय सरकार जनता को यह क्यों नहीं बताते कि जब बच्चे ही नहीं हैं, तो ये स्कूल और शिक्षकों के आंकड़े कागजों पर किसके लिए बढ़ाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में अचानक खाली हुए सरकारी स्कूल
कमोबेश यही दिलचस्प और हैरान करने वाला खेल छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार में भी चल रहा है। साल 2024-25 के सत्र में छत्तीसगढ़ के भीतर जीरो एनरोलमेंट वाला, यानी बिना बच्चों वाला एक भी स्कूल नहीं था, लेकिन साल 2025-26 आते-आते अचानक वहां 149 स्कूल ऐसे हो गए जहां एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया। और गजब की बात देखिए कि इन खाली स्कूलों में भी 140 शिक्षक बकायदा कार्यरत दिखाए गए हैं। Modi Government के केंद्रीय नेतृत्व के संरक्षण में राज्यों में चल रही यह लचर व्यवस्था यह साबित करती है कि Modi Government को बच्चों के भविष्य से ज्यादा आंकड़ों को छिपाने में रुचि है।
तकनीकी शिक्षा पर मंडराता संकट और एआईसीटीई का सख्त रुख
यह बदहाली सिर्फ प्राइमरी स्कूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि Modi Government ने तो देश की उच्च और तकनीकी शिक्षा का भी बेड़ा गर्क करके रख दिया है। अभी कुछ दिनों पहले ही हमारे देश में तकनीकी शिक्षा की सबसे बड़ी नियामक संस्था, यानी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने एक ऐसा फरमान जारी किया, जिसने देश के लाखों इंजीनियरिंग छात्रों को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है।
एआईसीटीई ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देशभर के 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेजों को पूरी तरह से बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया था। सिर्फ इतना ही नहीं, गलत नीतियों के कारण देशभर के अलग-अलग तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से ज्यादा कोर्सेज को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है, क्योंकि इन कोर्सेज को चलाने के लिए कॉलेजों के पास ना तो बुनियादी सुविधाएं बची थीं और ना ही जरूरी संसाधन।
साफ है कि Modi Government को देश के गरीब और मिडिल क्लास बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से कोई सरोकार नहीं रह गया है, इन्हें बस चुनावों में विकास के झूठे दावे करने हैं, जबकि हकीकत में प्राइमरी स्कूल से लेकर देश के बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज तक, सब के सब इस घटिया सिस्टम की भेंट चढ़ते जा रहे हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर Modi Government जिम्मेदार है।
Also Read
Bollywood सितारों की अंधभक्ति: जब भगवान राम को त्रेता से द्वापर युग में कराया लैंड
मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
